बिहारः नीतीश कुमार की जल योजना में जेडीयू नेता के परिवार को मिला 80 करोड़ का ठेका , खूब चला ‘भाई-भतीजावाद’

समस्तीपुर से मधुबनी और जमुई से शेखपुरा तक कम से कम 20 जिलों में ऐसे ठेके दिये गए हैं और इसका फायदा नेताओं के सहयोगियों को हो रहा है। इसमें भाजपा, जेडीयू और आरजेडी के सीनियर नेताओं के रिश्तेदार शामिल हैं।

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘हर घर नल का जल’ योजना से राजनेताओं के करीबियों को बड़ा फायदा मिला है। इस बात का खुलासा “द इंडियन एक्सप्रेस” ने अपनी एक रिपोर्ट में किया था। रिपोर्ट के मुताबिक उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता तारकिशोर प्रसाद की बहू पूजा कुमारी और उनके साले को 53 करोड़ का ठेका मिला है।

हालांकि जब इस बारे में उपमुख्यमंत्री से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि “बिजनेस करने में कुछ भी गलत नहीं है।”  इंडियन एक्सप्रेस की जांच में पाया गया है कि ठेका उनकी बहू और दो अन्य कंपनियों को दिया गया था। जिनमें से एक उनके साले की है वहीं बाकी तीन उनके सहयोगियों की है।

द इंडियन एक्सप्रेस ने पाया कि समस्तीपुर से मधुबनी और जमुई से शेखपुरा तक कम से कम 20 जिलों में ऐसे ठेके दिये गए हैं और इसका फायदा नेताओं के सहयोगियों को हो रहा है। इसमें भाजपा, जेडीयू और आरजेडी के सीनियर नेताओं के रिश्तेदार शामिल हैं।

इस सूची में सबसे ऊपर JDU के पूर्व राज्य सचिव अनिल सिंह का परिवार है, जिसे लगभग 80 करोड़ रुपये का ठेका मिला है। अनिल सिंह अभी भी राज्य की राजनीति में एक प्रमुख नेता हैं और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सत्ताधारी पार्टी के सभी प्रमुख कार्यक्रमों में शामिल होते हैं।

इसके अलावा सूची में भाजपा विधायक विनोद नारायण झा के भतीजे भी हैं। 2019-20 में जब उनके चाचा पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (PHED) मंत्री थे तब उन्हें लगभग 3.5 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया था।

इस योजना का अधिकांश काम पीएचईडी द्वारा किया जा रहा है। इसी काम के लिए पीएचईडी पानी की गुणवत्ता के आधार पर 30-57 लाख रुपये का वितरण करता है। रखरखाव और फ़िल्टरिंग लागत के कारण परियोजना की लागत अधिक है। इस योजना का कामकाज देखने वाला विभाग ठेकेदारों को अनुबंध राशि का 60 से 65 प्रतिशत काम के दौरान देता है। वहीं बचा हुआ 35 से 40 प्रतिशत अगले 5 साल में रखरखाव के आधार पर दिया जाता है।

इस योजना को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने करीब पांच साल पहले लांच किया था और इसकी सफलता का अंदाजा इससे लगा सकते हैं कि इसके लिए 1.08 लाख पंचायत वार्ड्स का लक्ष्य रखा गया था जिसमें से 95 फीसदी हिस्सा योजना के तहत कवर हो चुका है।

केंद्र सरकार ने पिछले महीने ‘जल जीवन मिशन’ के तहत बिहार के आंकड़ों को भी शामिल किया और इसके मुताबिक दो साल पहले बिहार के सिर्फ 1.84 फीसदी परिवारों को टैप वॉटर पहुंच में था जबकि अब यह 86.96 फीसदी तक पहुंच गया। 

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