जानिए क्या है नीतीश सरकार की “हर घर नल का जल योजना”, जिसमें डिप्टी सीएम की बहू, साले को मिला 53 करोड़ का ठेका

सितंबर 2016 में आधिकारिक तौर पर शुरू की गई इस योजना ने अब तक 152.16 लाख नल कनेक्शनों को पेयजल उपलब्ध कराया है। इस योजना का मकसद बिहार के सभी शहरी और ग्रामीण इलाकों में पाइपलाइन से साफ पानी पहुंचाना है।

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इस योजना का मकसद बिहार के सभी घरों में पाइपलाइन से साफ पानी पहुंचाना है। (express file)

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ‘हर घर नल का जल’ योजना 2015 में चुनावी वादे के रूप में शुरू हुई थी। यह उनकी सरकार की सबसे बड़ी कल्याणकारी पहल है। सितंबर 2016 में आधिकारिक तौर पर शुरू की गई इस योजना ने अब तक 152.16 लाख नल कनेक्शनों को पेयजल उपलब्ध कराया है।

इस योजना का मकसद बिहार के सभी शहरी और ग्रामीण इलाकों में पाइपलाइन से साफ पानी पहुंचाना है। यह केंद्र सरकार के जल जीवन मिशन के तहत प्रदान किए गए 8.44 लाख कनेक्शन और राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत दिये गए 2.32 लाख कनेक्शन से अलग है।

इस योजना के तहत हर दिन सुबह, दोपहर और शाम को दो-दो घंटे के लिए साफ पीने का पानी दिया जाता है। इसका काम पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट (PHED), पंचायत राज और शहरी विकास विभाग द्वारा मानक बोली दस्तावेज (एसबीडी) के जरिए ठेकेदारों को दिया गया है।

पंचायती राज द्वारा कराये जा रहे काम के लिए एक पंचायत समिति बनाई गई है। इसका काम योजना को लागू करना है। परियोजना की लागत वार्ड के आकार और घरों की संख्या के आधार पर 15-18 लाख रुपये तय की गई है। इस योजना का काम देखने वाली पंचायत समिति में तीन सदस्य होते हैं। इसका नेतृत्व मुखिया करता है। राज्य स्तर पर पंचायती राज सचिव की अध्यक्षता में एक टीम जनसंख्या के आधार पर पंचायत वार्ड के लिए आवंटित की जाने वाली राशि तय करती है।

इसी काम के लिए पीएचईडी पानी की गुणवत्ता के आधार पर 30-57 लाख रुपये का वितरण करता है। रखरखाव और फ़िल्टरिंग लागत के कारण परियोजना की लागत अधिक है। इस योजना का कामकाज देखने वाला विभाग ठेकेदारों को अनुबंध राशि का 60 से 65 प्रतिशत काम के दौरान देता है। वहीं बचा हुआ 35 से 40 प्रतिशत अगले 5 साल में रखरखाव के आधार पर दिया जाता है।

वहीं नगर विकास विभाग एक ठेके के लिए 45-50 लाख रुपये आवंटित करता है, जिसमें प्रत्येक वार्ड के लिए पांच साल का रखरखाव शामिल है। पीएचईडी और शहरी विकास विभाग के अनुबंधों के लिए, कार्यकारी अभियंता प्रभारी बोली प्रक्रिया के बाद अनुबंधों को मंजूरी देते हैं।

बता दें ‘हर घऱ नल का जल’ नाम की इस परियोजना का अब तक 95 फीसदी काम पूरा हो चुका है। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक इस स्कीम से राजनेताओं के करीबियों को बड़ा फायदा मिला है। चार महीने तक की गई इन्वेस्टिगेशन के बाद पता चला है कि इस योजना के तहत भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के विधायकों और उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद के रिश्तेदारों को भी बड़ा फायदा मिला है।

जानकारी के मुताबिक तारकिशोर प्रसाद की बहू पूजा कुमारी और उनके साले को 53 करोड़ का ठेका मिला है। हालांकि जब इस इस मामले में उपमुख्यमंत्री से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि क्या बिजनेस करने में कुछ गलत है?

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