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होली है: जानिए, किस रंग में होते हैं कौन से खतरनाक केमिकल

Holi 2018: होली के रंगों में इस्तेमाल होने वाले कुछ रसायनों से आपके स्वास्थ्य के आधार पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इससे पैरालिसिस, गुर्दे की खराबी और त्वचा के कैंसर जैसी समस्याएं जुड़ी हैं इसलिए सावधान रहें।

Holi 2018: चंडीगढ़ में होली मनाते छात्र। (Photo: PTI)

होली का त्‍योहार शुक्रवार (2 मार्च) को पूरे देश में मनाया जा रहा है। इस मौके पर रंगों, गुलाल, अबीर का जमकर इस्‍तेमाल होगा, मगर केमिकल्‍स से जरा संभलकर रहें। रंगों में आमतौर पर घातक केमिकल्‍स का प्रयोग होता है जो त्‍वचा से लेकर शरीर के कई अंगों को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। मसलन काले रंग में लेड ऑक्‍साइड होता है जिससे रेनल फेल्‍योर हो सकता है। हरे रंग के लिए कॉपर सल्‍फेट का प्रयोग किया जाता है, इससे आंखों में एलजी, जलन, कुछ समय के लिए अंधापन भी हो सकता है। चांदी वाले रंग में एल्‍युमिनियिम ब्रोमाइड इस्‍तेमाल होता है, इससे कैंसर तक हो सकता है।

नीले रंग में रशियल ब्‍लू नाम का केमिकल प्रयोग किया जाता है जो त्‍वजा के लिए एलर्जी का सबब बनता है। लाल रंग के लिए मर्करी सल्‍फाइट रसायन का इस्‍तेमाल होता है तो त्‍वचा के कैंसर की वजह बन सकता है। इन सब दुष्‍प्रभावों से बचने का सबसे अच्‍छा तरीका है कि हर्बल रंगों का प्रयोग करें। होली के रंगों में इस्तेमाल होने वाले कुछ रसायनों से आपके स्वास्थ्य के आधार पर स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इससे पैरालिसिस, गुर्दे की खराबी और त्वचा के कैंसर जैसी समस्याएं जुड़ी हैं इसलिए सावधान रहें।

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रंगों से यदि केमिकल या पेट्रोल की गंध आए तो उन्हें न खरीदें। यदि रंग पानी में घुलता नहीं है तो उनमें केमिकल हो सकता है, बेहतर होगा उन्हें न खरीदें।

ऑर्गेनिक रंगों में चमकदार कण नहीं होते हैं और वे गहरे रंगों (डार्क शेड) में उपलब्ध नहीं होते हैं। इसलिए सिल्वर, गहरा पर्पल या काला रंग न खरीदें, हो सकता है कि वे प्राकृतिक रंग न हों।

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