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नरेंद्र मोदी को सारा विपक्ष मिलकर भी 2019 में हरा पाएगा? क्‍या कहते हैं विशेषज्ञ, जानिए

पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए की टीम है जिसमें मोदी शाह की जोड़ी के अलावा नीतीश कुमार, सुखबीर सिंह बादल, महबूबा मुफ्ती, रामविलास पासवान, रामदास अठावले, उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेताओं की पार्टी शामिल है। इस टीम के पास कुल 32 फीसदी वोट शेयर है जबकि कांग्रेस की अगुवाई वाली टीम के पास 36 फीसदी वोट शेयर दिखाया गया है।

पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह (पीटीआई फोटो)

कर्नाटक में बीजेपी की येदियुरप्पा सरकार के ढाई दिन में ही गिर जाने और कांग्रेस जेडीएस गठबंधन सरकार की संभावनाओं के बाद देशभर में यह चर्चा होने लगी है कि क्या अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों में अगर सारा विपक्ष मिल जाय तो केंद्र से बीजेपी की नरेंद्र मोदी सरकार को गिर जाएगी। इंडिया टुडे चैनल ने इसी सवाल पर एक परिचर्चा आयोजन किया जिसमें बीजेपी, कांग्रेस और सपा के प्रवक्ताओं के अलावा कई वरिष्ठ पत्रकारों और दलित चिंतक ने भी हिस्सा लिया। चर्चा में यह दिखाया गया कि आज की तारीख में देश में तीन गुट हैं। एक पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई में एनडीए की टीम है जिसमें मोदी शाह की जोड़ी के अलावा नीतीश कुमार, सुखबीर सिंह बादल, महबूबा मुफ्ती, रामविलास पासवान, रामदास अठावले, उपेंद्र कुशवाहा जैसे नेताओं की पार्टी शामिल है। इस टीम के पास कुल 32 फीसदी वोट शेयर है जबकि कांग्रेस की अगुवाई वाली टीम के पास 36 फीसदी वोट शेयर दिखाया गया है। इसमें सपा, बसपा, जेडीएस, राजद, एनसीपी, तृणमूल कांग्रेस, सीपीएम, टीडीपी, डीएमके, एनसी और रालोद भी शामिल है। तीसरे कैम्प के पास 13 फीसदी वोट शेयर है। इसमें नवीन पटनायक, केसीआर, जगनमोहन रेड्डी और अन्नाद्रमुक शामिल है।

राजदीप सरदेसाई- इंडिया टुडे ग्रुप के वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि आज की तारीख में विपक्षी गठबंधन अवसरवादी है। हालांकि, यह गठबंधन 2019 तक जारी रहा तो टीम मोदी के लिए मुश्किलें जरूर खड़ी होंगी। उन्होंने कहा कि अगर जातीय गोलबंदी हावी रही तो क्षेत्रीय दल बीजेपी पर भारी पड़ेंगे लेकिन बीजेपी उसे धार्मिक रंग दे सकती है। उन्होंने कहा कि आज देश में मोदी बनाम अन्य की लड़ाई है। साम्प्रदायिकता और विकास का मुद्दा भी पीछे छूट गया है। उन्होंने पीएम मोदी के बयान को उद्धृत किया कि पीएम मोदी अक्सर कहते हैं, वो कहते हैं मोदी हटाओ, मैं कहता हूं देश बचाओ। सरदेसाई ने कहा कि अगर गठबंधन हो भी जाता है तो बड़ा सवाल यह उठता है कि प्रधानमंत्री कौन बनेगा। इस लिहाज से देश के लोग खासकर युवा वर्ग स्थाई सरकार देने और एक व्यक्ति विशेष के ध्यान में रखकर फिर से मोदी सरकार को चुन सकते हैं। उन्होंने कहा कि एंटी इन्कमबेंसी फैक्टर को प्रो इन्कमबेंसी फैक्टर में बदलना मोदी सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।

राज चेंगप्पा, ग्रुप एडिटोरियल डायरेक्टर, इंडिया टुडे- राज चंगप्पा ने कहा कि जेडीएस ने कांग्रेस से इसलिए दोस्ती की क्योंकि उसे सीएम का पद मिल रहा था। बीजेपी के साथ गठबंधन करने पर कुमारस्वामी सीएम नहीं बन सकते थे। यानी विपक्षी दलों की लामबंदी अवसरवादी है। उन्होंने कहा कि अगर ये गठबंधन पहले होता तो शायद कर्नाटक में आज सियासी हालात दूसरे होते। 2019 में भी अगर मोदी टीम के खिलाफ अन्य क्षेत्रीय दल एक गठजोड़ करते हैं तो मौजूदा लोकसभा की स्थिति बदल सकती है। उन्होंने कहा कि यह दुखद है कि सरकारें चाहे किसी भी गठबंधन की रही हो लेकिन देश में किसानों का मुद्दा, गरीबी का मुद्दा, सिंचाई का मुद्दा बरकरार है।

सोमा चौधरी, वरिष्ठ पत्रकार- सोमा चौधरी ने कहा कि अगले साल 2019 के आम चुनावों में मोदी सरकार का कामकाज एक बड़ा मुद्दा होगा। मोदी जी ने नारे तो बहुत दिए, सबका साथ, सबका विकास लेकिन उनके शासनकाल में हिन्दुत्व के नाम पर हिन्दुओं के अंदर घोर निराशा है। लोग बीजेपी सरकार को जुमलाबाज सरकार कह रहे हैं। किसानों, युवाओं, महिलाओं, दलितों में सरकार के खिलाफ आक्रोश है। चौधरी ने कहा कि सरकार आम आदमी से जुड़े महंगाई, रोजगार जैसे मुद्दों पर फेल रही है।

शिवम विज, पत्रकार- देश में फिर से गठबंधन की सरकार आएगी क्योंकि यूपीए के 10 वर्षों के शासनकाल में देश की जीडीपी ग्रोथ अच्छी रही थी। मौजूदा सरकार ने दावे तो बहुत किए लेकिन आर्थिक मोर्चे पर मोदी सरकार फेल रही है। इस वजह से लोगों की जीवनस्तर नहीं सुधर सका। लोगों को रोजगार नहीं मिल सके। पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से छुटकारा नहीं मिल सका। इसलिए अगर 2019 में तमाम क्षेत्रीय दल मिलकर मोदी टीम पर हमला बोलेंगे तो मोदी सरकार के लिए बड़ी मुश्किल हो सकती है।

प्रो. विवेक कुमार, दलित चिंतक- जेएनयू के प्रोफेसर रहे विवेक कुमार ने कहा कि यूपी में सपा-बसपा के गठजोड़ ने मोदी सरकार के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। इस साल होने वाले विधान सभा चुनाव भी मोदी सरकार के लिए अलार्मिंग हैं, जहां दलित-किसान और युवा केंद्र सरकार की नीतियों से न केवल खफा हैं बल्कि सबक सिखाने को तैयार हैं। कुमार ने कहा कि हिन्दी पट्टी राज्यों में बीजेपी के खिलाफ जबर्दस्त आक्रोश है। 2019 की राह टीम मोदी के लिए कांटों भरी हो सकती है।

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