ताज़ा खबर
 

घर से बाहर निकली महिलाओं के लिए ‘हमसफर’

महिला स्पेशल बस सेवा शुरुआत से ही घाटे में रही। इससे डीटीसी को नुकसान भी हुआ। पर शीला दीक्षित ने यह सेवा बंद नहीं की। बल्कि एक-एक कर साल 2012 तक 26 रूटों पर इस सेवा का विस्तार किया।

Author Published on: July 21, 2019 6:07 AM
शीला दीक्षित ने अपनी किताब “सिटीजन दिल्ली: माय टाइम्स, माय लाइफ” में कई दिलचस्प बातों का जिक्र किया था।(Photo-Vijay Mathur/Reuters)

निर्भय कुमार पांडेय

राजधानी में कामकाजी महिलाओं को घर से दफ्तर और शाम को दफ्तर से घर लौटते समय किसी प्रकार की असुविधा न हो इसके मद्देनजर 27 सितंबर 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने महिला विशेष बस सेवा की शुरुआत की थी। इसके साथ ही 11 बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। कामकाजी महिलाओं के अलावा इस सेवा की शुरुआत होने से छात्राओं को भी सुविधा होने लगी थी। दिल्ली में महिलाओं के लिए इस तरह की सुविधा की मांग लंबे समय से हो रही थी।

अच्छे नतीजों के बाद मुख्यमंत्री रहते हुए शीला दीक्षित ने राजधानी के विभिन्न इलाकों में 26 रूटों पर दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) की बसों का संचालन शुरू किया था। हालांकि धीरे-धीरे यह सेवा उनके मुख्यमंत्री रहते हुए पूरी तरह से बंद हो गई। फिलहाल दिल्ली में किसी भी रूट पर महिला स्पेशल बस का संचालन डीटीसी द्वारा नहीं किया जा रहा है।

डीटीसी द्वारा महिला स्पेशल बसों का संचालन उत्तम नगर से नेहरु प्लेस, दिल्ली सचिवालय से इंद्रपुरी, रोहिणी सेक्टर-22 से शिवाजी स्टेडियम, शाहदरा से आरके पुरम, मधु विहार से सीजीओ कॉम्पलेक्स, मोरी गेट से कापसहेड़ा बॉर्डर, पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन से महरौली, हर्ष विहार से कर्मपुरा, कमरुद्दीन नगर से शिवाजी स्टेडियम, जहांगीरपुरी से उत्तम नगर टर्मिनल के अलावा अन्य रूटों पर किया जाता था।

ये बसें सुबह साढ़े आठे बजे अपने निर्धारित टर्मिनल से चलती थीं और अपने गंत्वय तक पहुंचती थीं। शाम के समय निर्धारित रूट से होते हुए बस उसी टर्मिनल तक जाती थीं, जहां से सुबह शुरू होती थी। उत्तम नगर से चलने वाली बस भीकाजी कामा प्लेस, एम्स, साउथ एक्स, लेडी श्रीराम कॉलेज होते हुए नेहरू प्लेस पहुंची थी।

घाटे के बाद भी सेवा रही चालू
महिला स्पेशल बस सेवा शुरुआत से ही घाटे में रही। इससे डीटीसी को नुकसान भी हुआ। पर शीला दीक्षित ने यह सेवा बंद नहीं की। बल्कि एक-एक कर साल 2012 तक 26 रूटों पर इस सेवा का विस्तार किया। हालांकि बाद में बंद कर दिया गया। सेवा शुरू होते समय डीटीसी के बेडेÞ में एक भी महिला चालक या फिर परिचालक (कंडक्टर) नहीं थी। आज जब डीटीसी में महिला चालक और परिचालक हैं तो यह सेवा बंद है।

छात्राओं को भी सुविधा
स्पेशल बस कई कॉलेज के आसपास से गुजरती थी, जिसका फायदा छात्राओं को भी होता था। आइटीओ से चलने वाली बसों में मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज और जाकीर हुसैन कॉलेज में पढ़ने वाली छात्राएं सफर करती थीं। हर्ष विहार से कर्मपुरा के बीच चलने वाली बस दिल्ली विश्वविद्यालय से होते हुए गुजरती थी।

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

Next Stories
1 आलाकमान के कहने पर संभाली कमान
2 ‘मेरी दिल्ली मैं ही सवारूं’
3 कड़े और बड़े फैसलों की मिसाल