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एचएएल प्रमुख बोले- रफाल विवाद में हमें न घसीटिए, कॉन्ट्रैक्ट पाने के नहीं थे दावेदार

माधवन ने कहा कि हमारा संदेश साफ है कि इस पूरे विवाद में एचएएल को ना घसीटा जाए। हमारा काम अपने प्रोडक्शन को बढ़ाना है। हमारी यूनियन ने भी अपने बयान में साफ कर दिया है कि वह इस मामले में कोई पार्टी नहीं है।

RAFALE DEALहिन्दुस्तान एअरोनॉटिक्स लिमिटेड के निदेशक का बयान एचएएल ऑफसेट बिजनेस में नहीं है।(file photo)

हिन्दुस्तान एअरोनोटिक्स लिमिटेड (HAL) के निदेशक आर. माधवन ने रफाल डील के ऑफसेट बिजनेस विवाद में एचएएल को घसीटे जाने पर आपत्ति जतायी है। अपने एक हालिया इंटरव्यू में आर. माधवन ने कहा कि ‘एचएएल ऑफसेट बिजनेस में नहीं है और एचएएल, रफाल डील के ऑफसेट बिजनेस का कॉन्ट्रैक्ट पाने के लिए बतौर दावेदार शामिल भी नहीं हुई थी।’ बता दें कि विपक्षी पार्टियां रफाल डील के मुद्दे पर सरकार पर निशाना साध रही हैं। विपक्षी पार्टियों ने सरकार पर आरोप लगाया है कि रफाल डील में ‘ऑफसेट बिजनेस’ का कॉन्ट्रैक्ट एचएएल को नहीं दिया गया है। इकॉनोमिक टाइम्स से बातचीत में एचएएल के डायरेक्टर आर. माधवन ने इस आरोप पर दी गई सफाई में उपरोक्त बात कही है। आर. माधवन ने कहा कि ‘एचएएल ने अपने कर्मचारियों को भी निर्देश दिए हैं कि वह इस मुद्दे पर किसी राजनैतिक पार्टी के साथ शामिल ना हों, क्योंकि इससे कंपनी की छवि पर नकारात्मक असर पड़ेगा।’

माधवन ने कहा कि हमारा संदेश साफ है कि इस पूरे विवाद में एचएएल को ना घसीटा जाए। हमारा काम अपने प्रोडक्शन को बढ़ाना है। हमारी यूनियन ने भी अपने बयान में साफ कर दिया है कि वह इस मामले में कोई पार्टी नहीं है। ऑफसेट बिजनेस के पूरे विवाद पर एचएएल के निदेशक ने साफ कहा कि “उनका बिजनेस मैन्यूफैक्चरिंग है, ना कि ऑफसेट।” एचएएल की क्षमता पर उठ रहे सवालों के जवाब में आर. माधवन ने कहा कि तकनीकी तौर पर एचएएल की क्षमता पर सवाल खड़े नहीं किए जा सकते। एचएएल ही भारतीय वायुसेना के 75 प्रतिशत फ्लाइंग इक्विपमेंट्स की मेंटिनेंस का काम देखती है। फिलहाल एचएएल प्राइवेट सेक्टर की लार्सन एंड टर्बो, VEM टेक्नोलजीज, अल्फा डिजाइन और डाइनामेटिक्स आदि कंपनियों के साथ मिलकर लाइट कॉम्बैट एअरक्राफ्ट के निर्माण पर फोकस कर रही है।

क्या होता है ऑफसेट बिजनेसः आज चूंकि दुनियाभर में डिफेंस डील हो रही हैं। ऐसे में ऑफसेट बिजनेस नामक नया फील्ड उभरकर सामने आया है। ऑफसेट बिजनेस के तहत किन्हीं दो देशों के बीच होने वाली बड़ी डिफेंस डील के तहत डिफेंस आइटम बेचने वाला देश खरीदने वाले देश को कुछ आर्थिक फायदा पहुंचाता है। ऑफसेट बिजनेस दो तरह का होता है। एक डायरेक्ट और दूसरा इनडायरेक्ट। डायरेक्ट ऑफसेट बिजनेस डिफेंस डील से सीधे तौर पर जुड़ा होता है। इसमें डिफेंस आइटम बेचने वाली कंपनी डिफेंस डील से जुड़ी तकनीक स्थानीय कंपनियों के साथ साझा करती है। ताकि भविष्य में स्थानीय तौर पर ही डिफेंस आइटम का निर्माण किया जा सके।

वहीं इनडायरेक्ट ऑफसेट बिजनेस डिफेंस डील से सीधे तौर पर जुड़ी नहीं होती है। इसके तहत डिफेंस आइटम बेचने वाली कंपनी डिफेंस आइटम खरीदने वाले देश की स्थानीय इंडस्ट्रीज में इनवेस्ट करती है और देश के माल के निर्यात में मदद करती है। हाल ही में खबर आयी थी कि भारत ने रफाल डील में करीब 30 फीसदी का ऑफसेट अनुबंध जोड़ा है। इस अनुबंध के तहत करीब 6 अरब की रफाल डील में से भारत को करीब 2 अरब डॉलर का परोक्ष रुप से फायदा मिलने की उम्मीद है।

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