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हाजीअली दरगाह में महिलाओं पर लगी रोक की सीमा बढ़ी, सुप्रीम कोर्ट में 24 अक्तूबर को सुनवाई

ट्रस्ट ने महिलाओं को हाजी अली दरगाह के गर्भ गृह में प्रवेश की अनुमति देने के बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है।

Author नई दिल्ली | Published on: October 17, 2016 8:28 PM
haji ali dargah, Women Entry Haji Dargah, haji ali dargah Mumbai, Bombay High Court, haji ali dargah News, Women haji ali dargah, Women in haji ali dargah, Women Entry haji ali dargahकुछ मुस्लिम महिलाओं ने मुंबई की हाजी अली दरगाह के भीतरी भाग में महिलाओं के जाने पर प्रतिबंध को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

उच्चतम न्यायालय ने हाजीअली दरगाह के गर्भ गृह में महिलाओं के प्रवेश पर लगा प्रतिबंध हटाने के फैसले पर बंबई उच्च न्यायालय द्वारा लगाई गयी रोक की अवधि सोमवार (17 अक्टूबर) को 24 अक्तूबर तक के लिए बढ़ा दी। न्यायालय इस मामले में अब 24 अक्तूबर को सुनवाई करेगा। प्रधान न्यायाधीश तीरथ सिंह ठाकुर, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनंजय वाय चंद्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष यह मामला सोमवार को भी सुनवाई के लिए नहीं आ सका। इस पर हाजी अली दरगाह ट्रस्ट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम ने उच्च न्यायालय द्वारा 22 अगस्त के अपने फैसले पर लगायी गयी रोक की अवधि बढ़ाने का अनुरोध किया। खंडपीठ ने यह अनुरोध स्वीकार करते हुए रोक की अवधि सुनवाई की अगली तारीख तक बढ़ा दी। शीर्ष अदालत ने सात अक्तूबर को आशा व्यक्त की थी कि उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाला ट्रस्ट प्रगतिशील दृष्टिकोण अपनायेगा।

सुब्रमण्यम ने भी पीठ को भरोसा दिलाया था कि वह ‘प्रगतिशील मिशन’ पर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा था कि पवित्र पुस्तकों और धार्मिक ग्रंथों ने समानता को बढ़ावा दिया है और ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहिए जो पीछे की ओर ले जाने वाला हो। पीठ ने यह भी टिप्पणी की थी कि यदि आप पुरुष और महिलाओं दोनों को ही एक निश्चित स्थान से आगे जाने की अनुमति नहीं दे रहे हैं, तो कोई समस्या नहीं है। परंतु यदि आप कुछ लोगों को एक निश्चित स्थान से आगे जाने दे रहे हैं और दूसरों को नहीं, तो समस्या है। पीठ ने यह भी कहा था कि इसी तरह केरल में सबरीमाला मंदिर से संबंधित एक अन्य मामला भी शीर्ष अदालत में लंबित है और इस तरह की समस्या मुस्लिम में ही नहीं बल्कि हिन्दुओं में भी है। महिलाओं के समूह का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील ने महिलाओं को गर्भ गृह के निकट जाने की अनुमति नहीं देने के ट्रस्ट के रवैये को चुनौती देते हुए कहा था कि 2011 से पहले स्थिति एकदम भिन्न थी। ट्रस्ट ने महिलाओं को हाजी अली दरगाह के गर्भ गृह में प्रवेश की अनुमति देने के बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को शीर्ष अदालत में चुनौती दी है।

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