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ज्ञानवापी केसः “फव्वारा” कह हमारी आस्था को पहुंचाते हैं ठेस, वहीं विदेश में एक कार्टून पर हो जाते हैं कत्ल- बोलीं BJP नेत्री

वहीं असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है जब तक वज़ू न करे, तब तक नमाज़ नहीं पढ़ी जा सकती।

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काशी विश्वनाथ मंदिर धाम और ज्ञानवापी मस्जिद परिसर का दृश्य (फोटो- पीटीआई)

ज्ञानवापी मस्जिद विवाद बढ़ता ही जा रहा है और पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। हिन्दू पक्ष का कहना है कि वजु खाने में शिवलिंग मिला है तो वहीं शिवलिंग के दावे पर मुस्लिम पक्ष का कहना है कि जिसे हिन्दू पक्ष शिवलिंग बता रहा, दरअसल केवल वो एक फव्वारा है। वहीं टीवी चैनलों पर बहस भी इसी मुद्दे को लेकर चल रही है। इसी क्रम में समाचार चैनल न्यूज़ 24 पर बहस चल रही थी।

बहस में बीजेपी प्रवक्ता नुपुर शर्मा और एआईएमआईएम प्रवक्ता सैयद वसीम वकार भी मौजूद थे। बहस के दौरान बीजेपी प्रवक्ता नुपुर शर्मा ने कहा, “आप उसे फव्वारा कहते हैं, आप हमारी आस्था को ठेस पहुंचाते हैं। एक किसी ने कार्टून बना दिया था चार्ली हेब्दो में, आपने क्या किया था? आपने जान ले ली थी। यही जगजाहिर करता है कि आपका विश्वास है कहां, शरिया में। हमारा देश संविधान से चलता है, शरिया से नहीं।”

नुपुर शर्मा ने आगे कहा, “इन्हें (ज्ञानवापी मस्जिद के पक्षधर) केवल शरिया पर विश्वास है। इन्होने सर्वोच्च न्यायलय पर सीधा निशाना साधा है। डॉक्टर केके मोहम्मद की 1976 की सर्वे रिपोर्ट थी, जिसे अपहोल्ड करते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायलय ने कहा था कि बाबरी मस्जिद के नीचे हिन्दू स्ट्रक्चर था। मैंने तो पूरी दीवार देखी है और ऐसा लगता है जैसे मंदिर हो। इनको मजा आता है कि इनके लोग हमारे मंदिर तोड़े, हमारे बच्चों को मारे।

वहीं असदुद्दीन ओवैसी ने कहा है कि बगैर वजू किए नवाज नहीं पढ़ी जा सकती। शुक्रवार को मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, “यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि स्थानीय डीएम याचिकाकर्ताओं के साथ सहयोग कर रहे हैं। अगर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि धार्मिक अनुष्ठान की अनुमति दें, तो इसमें तालाब से वजू शामिल है। जब तक वज़ू न करे तब तक नमाज़ नहीं पढ़ी जा सकती। फव्वारा संरक्षित किया जा सकता है लेकिन तालाब खुला होना चाहिए।”

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, “भविष्य के विवादों को रोकने के लिए पूजा स्थल अधिनियम 1991 बनाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने राम मंदिर पर सुनवाई के दौरान कहा कि यह कानून संविधान के बुनियादी ढांचे का हिस्सा है। अदालत को बात पर चलना चाहिए।”

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