असम विधानसभा चुनाव की सुगबुगाहट के बीच गुवाहाटी के कोर्ट ने कांग्रेस नेता गौरव गोगोई, जितेंद्र सिंह अलवर और भूपेश बघेल को 9 मार्च तक राज्य के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ “अपमानजनक बयान” देने से मना किया है। कोर्ट ने यह आदेश सरमा द्वारा उनके खिलाफ दायर मानहानि के मामले के संबंध में दिया है।
9 मार्च को पेश होने का दिया आदेश
बुधवार को मामले में सुनवाई करते हुए सिविल जज ने ‘अंतरिम निषेधाज्ञा’ जारी किया जिसमें तीनों नेताओं के साथ-साथ एक असमिया दैनिक समाचार पत्र को “अदालत में पेश होने तक याचिकाकर्ता के संबंध में कोई और अपमानजनक बयान या कंटेंट बनाने, प्रकाशित करने या प्रसारित करने” से रोका गया है।
कोर्ट ने बचाव पक्ष को 9 मार्च को अदालत में पेश होने की तारीख मुकर्रर की है। असम के एडवोकेट जनरल देवजीत सैकिया ने पत्रकारों को बताया, “मुख्यमंत्री यह मामला कोर्ट में ले गए हैं कि अगर उनकी प्रॉपर्टी में कुछ गैर-कानूनी है, तो कांग्रेस पार्टी सबूत लाकर उसे साबित करे। उन्होंने कांग्रेस पार्टी और गौरव गोगोई, भूपेश बघेल और जितेंद्र सिंह जैसे लोगों को चुनौती दी है। अगर वे इसे साबित नहीं कर पाए, तो मुख्यमंत्री ने 500 करोड़ रुपये के मानहानि का दावा किया है।”
एडवोकेट जनरल ने कहा, “सुनवाई के बाद, जज ने अंतरिम रोक का आदेश दिया है। इन तीनों लोगों को इस पर आगे कुछ भी बोलने से रोक दिया गया है, और दैनिक अखबार को भी 9 मार्च को कोर्ट में पेश होने तक ऐसी रिपोर्ट छापने से रोक दिया गया है।”
कांग्रेस ने जमीन हड़पने का लगाया आरोप
दरअसल, पिछले बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, कांग्रेस ने CM सरमा के खिलाफ एक नया कैंपेन शुरू किया था, जिसमें उनके परिवार पर कथित तौर पर जमीन हड़पने में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। सरमा ने आरोपों को खारिज कर दिया है और उन्हें “झूठा, गलत इरादे वाला और बदनाम करने वाला” कहा है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले कांग्रेस नेताओं के खिलाफ सिविल और क्रिमिनल मानहानि का केस चलाने की धमकी दी।
गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच दोनों पार्टियां आमने-सामने हैं। मार्च में प्रस्तावित चुनाव के पहले एक ओर जहां CM सरमा गौरव गोगोई पर पाकिस्तानी कनेक्शन का आरोप लगाकर हमलावर हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस CM सरमा को भ्रष्टाचार के आरोपों में घेर रही है। वार-पलटवार का दौर जारी है।
