गुरुग्राम के एक कपल के लिए आईवीएफ ट्रीटमेंट एक बुरा सपना साबित हुआ जब उनकी दोनों बेटियों के DNA उनसे मैच नहीं हुए। IVF ट्रीटमेंट से पैदा हुईं उनकी बच्चियां अपने माता-पिता में से किसी से भी मिलती-जुलती नहीं थीं जिसके बाद उन्होंने डीएनए टेस्ट कराने का फैसला किया। टेस्ट रिजल्ट ने उन्हें बुरी तरह हिला दिया।
पहले से ही दो बेटियों के माता-पिता राहुल राठौर (41) और उनकी पत्नी मीनू (39) ने साल 2024 के अंत में इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन (IVF) की कठिन प्रक्रिया से गुजरने का फैसला किया। गुरुग्राम में रहने वाले इस कपल के पहले से ही दो बेटियां हैं। प्रोसेस के बाद 5 जनवरी 2026 को मीनू ने जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया। हालांकि, जल्द ही कपल ने गौर किया कि बच्चियां उन दोनों में से किसी से भी मिलती-जुलती नहीं थीं। जिसके बाद उनके मन में बार-बार यह सवाल उठा कि वे किसके बच्चों का पालन-पोषण कर रहे हैं?
बच्चियों का DNA माता-पिता से मैच नहीं
डीएनए टेस्ट में सामने आया कि लड़कियां जैविक रूप से अपने माता-पिता में से किसी से भी संबंधित नहीं थीं। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए मीनू ने कहा, “मुझे चार महीने तक इंजेक्शन सहने पड़े। मैंने उन मासूम बच्चों को नौ महीने तक अपने गर्भ में रखा। वे बच्चियां किसकी हैं? मैं बस जानना चाहती हूं।”
इसके बाद, दंपति ने दिल्ली के एक फर्टिलिटी क्लिनिक में भ्रूणों की अदला-बदली का आरोप लगाते हुए अदालत का रुख किया। कई सुनवाइयों के बाद, दिल्ली की एक अदालत ने मार्च में उनके पक्ष में फैसला सुनाया और एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। कपल के अनुसार, उनके स्त्री रोग विशेषज्ञ ने उन्हें एक आईवीएफ विशेषज्ञ से मिलवाया जिसके चलते वे ग्रेटर कैलाश स्थित एससीआई आईवीएफ अस्पताल तक पहुंचे। 9 जनवरी, 2025 को टेस्ट शुरू हुए। तीन महीने बाद, 14 मई को डॉक्टरों की टीम ने कहा कि पांच स्वस्थ भ्रूण सफलतापूर्वक विकसित हो गए थे। उसी दिन, उनमें से तीन भ्रूणों को प्रत्यारोपित किया गया।
IVF ट्रीटमेंट से हुईं थी जुड़वा बेटियां
5 जनवरी 2026 को मीनू ने द्वारका के मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में जुड़वां बच्चियों को जन्म दिया लेकिन उनकी खुशी कुछ समय तक ही रही क्योंकि जुड़वां बच्चियां अपने माता-पिता में से किसी से भी मिलती-जुलती नहीं थीं। मानसिक शांति के लिए राहुल ने आईवीएफ क्लिनिक के माध्यम से डीएनए टेस्ट कराने की कोशिश की लेकिन अस्पताल के कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। आखिरकार दंपति ने 8 जनवरी, 2026 को दो स्वतंत्र डीएनए परीक्षण एजेंसियों को सैंपल जमा कराए।
10 और 14 जनवरी को सामने आए रिजल्ट के अनुसार, जुड़वां बच्चियां राहुल या मीनू से जैविक रूप से संबंधित नहीं थीं। रिपोर्टों से पता चला कि व बच्चियां आपस में भी जैविक रूप से संबंधित नहीं थी। 17 जनवरी को दंपति ने पुलिस से संपर्क किया लेकिन जब कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने मार्च में अदालत का रुख किया। 23 मार्च को मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट देवंशी जनमेजा ने आदेश जारी कर पुलिस को क्लिनिक के डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।
बच्चों के अपहरण या तस्करी की संभावना से इनकार नहीं- अदालत
अपने आदेश में न्यायाधीश ने कहा, “रिकॉर्ड की सावधानीपूर्वक जांच से यह प्रतीत होता है कि सभी तथ्य और परिस्थितियां मिलकर गंभीर और जघन्य अपराधों की ओर इशारा करती हैं। यह केवल जालसाजी और आईवीएफ प्रक्रियाओं के संचालन के लिए वैधानिक दिशानिर्देशों का उल्लंघन तक ही सीमित नहीं हैं बल्कि बाल तस्करी और अपहरण की साजिश का भी खुलासा कर सकते हैं, जिसकी जांच आवश्यक है। इस स्तर पर शिकायतकर्ता के वास्तविक बच्चों के अपहरण या तस्करी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है।”
कपल का कहना है कि वो केवल सच्चाई जानना चाहते
शुक्रवार को सुनवाई के बाद दिल्ली सचिवालय के बाहर खड़े राहुल ने कहा, “एआरटी विभाग हमारी मांगों को सुनने के लिए तीन मिनट का समय भी नहीं निकाल सकता। हम पांच महीने से जवाब पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मैं पिछले 6 महीनों से काम पर नहीं जा पाया हूं।” वहीं, उनकी पत्नी मीनू ने कहा, “बच्चे पहले ही पांच महीने के हो चुके हैं। हमारे पास सारे कागजात हैं। हमारे पास सब कुछ है। फिर भी कोई हमारी बात सुनने को तैयार नहीं है।”
दंपति ने कहा कि वे केवल सच्चाई जानना चाहते हैं। अपने इस दुख में भी उन्होंने अपने उन बच्चों को नहीं छोड़ा है जिन्हें वे प्यार से चीकू और स्ट्रॉबेरी कहते हैं। राहुल ने कहा, “ जब तक उनके असली माता-पिता खुद सामने नहीं आ जाते, वे दोनों मेरी बेटियां हैं। मैं उन्हें मजबूत और बहादुर बनाऊंगा।”
यह भी पढ़ें: ‘घर से भागकर लिव-इन में रहने वाला कपल खराब कर सकता है परिवार का नाम’, हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी
पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने एक लिव इन कपल को पुलिस सुरक्षा देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जहां भारतीय समाज का एक हिस्सा लिव-इन रिलेशनशिप को मॉडर्न लाइफस्टाइल के तौर पर तेज़ी से अपना रहा है, वहीं घर से भागे बच्चे अपने परिवार का नाम खराब कर सकते हैं और अपने माता-पिता की इज्ज़त और सम्मान पर असर डाल सकते हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें
