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ABVP को चुनौती देकर चर्चा में आईं गुरमेहर कौर की मां परेशान, फौज में आठ साल की सेवा के बाद शहीद हुए थे पिता

गुरमेहर कौर के पिता कैप्टन मनदीप सिंह साल 1999 में एक आतंकी हमले के दौरान जम्मू-कश्मीर में शहीद हो गए थे।

Author नई दिल्ली | February 28, 2017 2:01 PM
अपने पिता की तस्वीर के साथ गुरमेहर कौर। (Photo Source: Indian Express)

दिल्ली यूनिवर्सिटी की छात्रा गुरमेहर कौर ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के खिलाफ कैम्पेन चलाकर उसे चुनौती दी थी। इसके बाद गुरमेहर को जान से मारने और रेप तक की धमकी मिली है। इससे गुरमेहर कौर की मां काफी परेशान हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के बाद धमकियां मिलने के बाद गुरमेहर कौर दिल्ली छोड़कर चली गई हैं। गुरमेहर कौर के पिता कैप्टन मनदीप सिंह साल 1999 में एक आतंकी हमले के दौरान जम्मू-कश्मीर में शहीद हो गए थे। कश्मीर में आतंकियों ने राष्ट्रीय राइफल कैंप पर हमला कर दिया था। कैंप को बचाने की कोशिश में गुरमेहर के पिता के अलावा छह अन्य जवान भी शहीद हो गए थे।

इंडियन एक्सप्रेस के पास मौजूद कैप्टन मनदीप सिंह की द बैटल कैजुअल्टी रिपोर्ट के मुताबिक वे जम्मू-कश्मीर में आतंक विरोधी ऑपरेशन राक्षस के साथ काम कर रहे थे। कैप्टन सिंह को साल 1991 में 49 आर्मी एयर डिफेंस रेजीमेंट में कमिशन मिला था। 6 अगस्त 1999 को जब वे शहीद हुए तो 4 राष्ट्रीय राइफल बटालियन के साथ जुड़े हुए थे। उनकी बटालियन 7 सेक्टर राष्ट्रीय राइफल के अंडर में थी जो कि विक्टर फोर्स के नेतृत्व में काम कर रही थी।

आतंकियों ने कुपवाड़ा जिले के चाक नुटनुसा गांव में करीब आधी रात को हमला कर दिया था। द बैटल कैजुअल्टी रिपोर्ट के मुताबिक, ‘जिस चौकी पर आतंकियों ने हमला किया, कैप्टन सिंह उसके कमांडिंग ऑफिसर थे। मुठभेड़ के दौरान करीब 1.15 बजे पर वे घायल हो गए और मौके पर ही उनकी मौत हो गई।’ आतंकियों से लड़ते हुए सिंह के अलावा छह अन्य जवान भी शहीद हुए थे।

कैप्टन सिंह की पत्नी राजविंदर कौर अभी पंजाब सरकार के आबकारी एवं कराधान विभाग में काम करती हैं। उनके परिवार को इस मामले में घसीटे जाने से गुरमेहर की मां दुखी हैं। ब्रिगेडियर अश्विनी कुमार(रिटायर) 3 राष्ट्रीय राइफल बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर थे। यह बटालियन उस इलाके में तैनात थी, जहां कैप्टन सिंह की कंपनी हेडक्वार्टर पर आतंकियों ने हमला किया था। ब्रिगेडियर कुमार ने कहा कि वे उस यूनिट के साथ करीब से जुड़े हुए थे। उन्हें अमरनाथ यात्रा को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

शांति की अपील करतीं गुरमेहर कौर, देखें वीडियो-

ब्रिगेडियर कुमार ने बताया, ‘4 राष्ट्रीय राइफल की दो कंपनियां मेरी कमांड में थीं, जिनका नेतृत्व ले. कर्नल डीवी देव कर रहे थे। कैप्टन सिंह और उनके साथियों ने आतंकियों के खिलाफ हिम्मत के साथ लड़ाई लड़ी। कैप्टन सिंह एक उत्साही और समर्पित युवा अधिकारी थे।’

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