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करवाचौथ की रात परिवार के साथ डिनर करने जा रहे थे पत्रकार रामचंद्र, घर के बाहर बुलाकर मारी गई थीं गोलियां

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की मौत पर गुरमीत राम रहीम पर पंचकूला स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए गुनाहगार करार दिया था। जिसके बाद आज कोर्ट ने सजा का ऐलान करते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है।

गुरमीत राम रहीम और पत्रकार रामचंद्र छत्रपति, फोटो सोर्स- लोकसत्ता

पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की मौत पर गुरमीत राम रहीम पर पंचकूला स्पेशल सीबीआई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए गुनाहगार करार दिया था। जिसके बाद आज कोर्ट ने सजा का ऐलान करते हुए उसे उम्रकैद की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने गुरमीत पर पचास हजार का जुर्माना भी लगाया है। बता दें कि पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की उनके घर के बाहर ही राम रहीम के गुर्गों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। बता दें कि पिछले 16 साल से छत्रपति का परिवार इस फैसला का इंतजार कर रहा था। ऐसे में पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल ने बताया कि आखिर करवाचौथ की उस रात हुआ क्या था…

ज्यादा देर न टिकी खुशी: पत्रकार रामचंद्र छत्रपति के बेटे अंशुल ने बताया कि 24 अक्टूबर 2002 को करवाचौथ था और मां किसी वजह से उस दिन घर पर नहीं था। मां के मायके में किसी की मौत हो गई थी जिस वजह से उन्हें पंजाब जाना पड़ा था। वैसे पापा हर रोज काम खत्म कर करीब दस बजे तक आते थे लेकिन उस दिन पापा करीब 7.30 तक जल्दी घर आ गए।

टूटी दीवार की तरफ से आई आवाज: हमारे घर के एक हिस्से में खाली प्लॉट पड़ा था, जिसमें मिट्टी डाली जा रही थी। उस हिस्से की दीवार भी तोड़ी गई थी ताकि ट्रैक्टर- ट्रॉली आसानी से अंदर आ सके। ऐसे में उस दीवार की तरफ से करीब पौने 8 किसी ने तेज आवाज में पापा को नाम लेकर बुलाया। उस वक्त हम खाना शुरू करने जा रहे थे लेकिन आवाज सुनकर पापा उठकर चल दिए।

कुलदीप गोली मार: पापा को उठकर बाहर जाते देख हम भी उठकर बाहर चल दिए। घर के बाहर थोड़ी सी दूर पर दो शख्स खड़े थे। जब तक कोई बात हो पाती उतने में एक युवक ने दूसरे से कहा कि कुलदीप गोली मार, इतना सुनते ही कुलदीप ने फायरिंग कर दी। जिसके बाद फायरिंग कर दोनों फरार हो गए।

मातम में बदल गई वो रात: अंशुल कहते हैं कि इस घटना को हम देख रहे थे और हमें कुछ भी समझ ही नहीं आया। पापा को गोली लगते ही वो नीचे गिर गए। वो एक बार उठे और घर के नजदीक आकर फिर से गिर गए। आनान फानन में उन्हें अस्पताल लेकर जाया गया। जहां से कुछ दिनों बाद उन्हें दिल्ली के अपोलो अस्पतला में रेफर कर दिया गया। जहां 28 दिन बाद उनकी मौत हो गई। अंशुल कहते हैं कि करवाचौथ की वो रात उनके लिए मातम में बदल गई।

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