डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर फरलो पर बाहर आने की अनुमति मिल गई है। उन्हें 17वीं बार बाहर निकलने की अनुमति दी गई है। बाबा राम रहीम अपनी दो शिष्याओं के साथ रेप मामले में दोषी सिद्ध होने के बाद 20 साल की सजा काट रहा है। राम रहीम की यह फरलो ऐसे समय में दी गई है, जब पंजाब के चुनाव निकट है। ऐसे में इसे लेकर एक बार फिर सियासत गर्म हो सकती है।

बाबा राम रहीम जिला कारागार सुनरिया में अभी बंद हैं, जेल प्रशासन ने राम रहीम को 21 दिनों की फरलो मंजूर की है। अब तक वह 16 बार जेल से बाहर आ चुके हैं। गंभीर अपराध की सजा काट रहे बाबा राम रहीम के बार-बार बाहर आने को लेकर अक्सर सवाल और आलोचना होती रहती है।

सिरसा आश्रम के लिए रवाना

राम रहीम को सुबह 06.05 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच सुनरिया जेल से निकाला गया है और यहां से वह सिरसा स्थित डेरा आश्रम की ओर रवाना हुआ है। बताया जा रहा कि इससे पहले वह मई में 30 दिनों की पैरोल पर जेल से बाहर आया था।

बाबा राम रहीम को साल 2017 में सजा मिली थी, तब से अब तक 10 सालों में वह 16 बार बाहर आ चुका है। यह फरलो 17वीं बार हैं। 25 अगस्त 2017 में सीबीआई की स्पेशल कोर्ट ने दो साध्वियों से दुष्कर्म मामले में दोषी करार दिया था, जिसके बाद 28 अगस्त 2017 को भी कोर्ट ने 10-10 साल की सजा सुनाई थी।

कितनी अलग होती है पैरोल से फरलो?

पैरोल का अर्थ है कि किसी कैदी को छोटी अवधि के लिए अस्थायी तौर रिहा करना ताकि वह अपने पारिवारिक और सामाजिक दायित्वों को पूरा करने के लिए परिवार या समाज से संबंध बनाए रख सके। लेकिन पैरोल पर रहते हुए जेल के बाहर किसी बंदी द्वारा बिताई गई अवधि किसी भी तरह की कोई रियायत नहीं है। कैदी को पैरोल पर बाहर रहने वाली अवधि के एवज में जेल में अतिरिक्त समय बिताना पड़ता है। पैरोल दो तरह की होती है- एक इमरजेंसी पैरोल और दूसरा नियमित पैरोल। इमरजेंसी पैरोल 24 घंटे के लिए कैदी के अपनों के मृत्यु मामले में मिलती है। जबकि नियमित पैरोल 30 दिनों के लिए और एक कैलेंडर वर्ष में दो बार से अधिक नहीं मिल सकती।

फरलो का अर्थ है कि कैदी को अच्छा आचरण बनाए रखने और जेल में अनुशासित रहने के लिए प्रेरणा के रूप में कुछ सालों की कैद के अंतराल के बाद थोड़े समय के लिए रिहा करना। यह जेल में अच्छे आचरण के लिए प्रोत्साहन है इसलिए बंदी द्वारा जेल के बाहर फरलो पर बिताई गई अवधि को उसकी सजा में गिना जाएगा। फरलो में दोषीसिद्धि बंदी को एक साल में 4 सप्ताह की छुट्टी दी जा सकती है।

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पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम के साध्वी यौन शोषण मामले की सुनवाई कर रहीं न्यायाधीश ने खुद को केस से अलग कर लिया है। अब डेरा मुखी मामले की सुनवाई दूसरी पीठ पर होगी। हाई कोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तय करेंगे कि मामले की सुनवाई कौन सी नई पीठ करेगी। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें