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गुड़गांव: 2 पुलिस अफसरों की रेप केस को लेकर जंग, जांच का आदेश

गुड़गांव के दो शीर्ष आइपीएस अधिकारियों के बीच घमासान से हरियाणा पुलिस को शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है। संयुक्त पुलिस आयुक्त भारती अरोड़ा एक समूचे परिवार को बलात्कार के मामले में फंसाने का आरोप पुलिस आयुक्त नवदीप सिंह विर्क पर लगा रही हैं।

Author गुड़गांव | September 30, 2015 8:12 AM
’संयुक्त पुलिस आयुक्त भारती अरोड़ा ने विर्क के खिलाफ कई आरोप लगाए हैं। उनके अनुसार, इस अधिकारी ने एक परिवार को बलात्कार के मामले में ‘झूठे तौर पर फंसाने’ के लिए उन पर विभिन्न आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसकी जांच सीबीआइ से कराने की मांग की है। (फोटो: मनोज कुमार)

गुड़गांव के दो शीर्ष आइपीएस अधिकारियों के बीच घमासान से हरियाणा पुलिस को शर्मिंदगी उठानी पड़ रही है। संयुक्त पुलिस आयुक्त भारती अरोड़ा एक समूचे परिवार को बलात्कार के मामले में फंसाने का आरोप पुलिस आयुक्त नवदीप सिंह विर्क पर लगा रही हैं।

विर्क इससे इनकार कर रहे है। भारती का यह भी आरोप है कि वे उन्हें भी धमकियां दे रहे हैं। इस बीच पुलिस महानिदेशक (अपराध) ने मंगलवार रात इस मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए। इससे पहले यह मामला मीडिया में उछलने के बाद राज्य पुलिस प्रमुख वाइपी सिंघल तक पहुंच गया था। चंडीगढ़ में देर रात जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, हरियाणा सरकार ने डीजी अपराध केपी सिंह को गुड़गांव के पुलिस आयुक्त और संयुक्त पुलिस आयुक्त के आरोपों की जांच करने को कहा गया है। विर्क और अरोड़ा के आरोपों के साथ ही पीड़ित और आरोपी के पक्ष की भी जांच की जाएगी।

संयुक्त पुलिस आयुक्त भारती अरोड़ा का आरोप है कि पुलिस आयुक्त नवदीप सिंह विर्क बलात्कार केएक मामले में समूचे परिवार को फंसा रहे हैं। विर्क इससे इनकार कर रहे हैं। भारती का यह भी आरोप है कि विर्क खुद उन्हें भी धमकियां दे रहे हैं।
दोनों आला अफसरान की यह जंग पुलिस महानिदेशक वाइपी सिंघल के पास पहुंच गई और उन्होंने मामले की जांच के आदेश दिए। भारती ने विर्क के खिलाफ कई आरोप लगाए हैं।

उनके अनुसार, इस अधिकारी ने एक परिवार को बलात्कार के मामले में ‘झूठे तौर पर फंसाने’ के लिए उन पर विभिन्न आरोप लगाए हैं। उन्होंने इसकी जांच सीबीआइ से कराने की मांग की है।

उन्होंने आरोप लगाए: जब मैंने बलात्कार मामले की जांच शुरू की तो मैंने पाया कि पुलिस आयुक्त ने एक पूरे परिवार को मामले में झूठे तौर पर फंसाया है। मैंने एतराज जताया और उनसे कहा, ‘सर, यह गलत है।’ उसके बाद उन्होंने मुझे मानसिक यातनाएं देनी शुरू कर दी और कहा कि मैं मामले की जांच से हट जाऊं, वरना मुझे नुकसान पहुंचाया जाएगा। भारती ने दावा किया कि जिस महिला ने मामला दायर किया है, वह पिछले मौकों पर भी तीन अन्य बलात्कार के मामले दायर कर चुकी है।
भारती ने पुलिस महानिदेशक को भेजे गए पत्र में आरोप लगाया कि विर्क बलात्कार मामले में जांच और फाइलों की निगरानी के मुद्दे पर उन्हें मानसिक यातनाएं दे रहे हैं।

उन्होंने कहा, मैं पूरे मामले की सीबीआइ जांच चाहती हूं ताकि हकीकत बेनकाब हो। वरना, कोई वजह नहीं है कि कैसे समूचा परिवार झूठे तौर पर फंसाया जाए, वह भी एक महिला के हाथों, जिसने बलात्कार के तीन अलग-अलग मामले दर्ज कराए हैं…।
इस पर प्रतिक्रिया जताते हुए विर्क ने कहा, ‘ये आरोप गलत हैं…मैं क्या कह सकता हूं जब कोई कुछ कह रहा हो।’ पुलिस आयुक्त ने कहा कि दोनों अधिकारियों ने जांच और कार्रवाई के लिए पुलिस महानिदेशक को लिखा है। विर्क ने कहा, ये सरकारी मामले हैं। हमारा विभाग इससे निपट रहा है।

बाद में पंचकूला में सिंघल ने पत्रकारों से कहा, दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी बातें रखी हैं। भारती अरोड़ा और विर्क ने मुझे अलग-अलग लिखा है। मैं दोनों पत्रों का अध्ययन कर रहा हूं। मामले में जो भी करने की जरूरत होगी, कानून के अनुरूप किया जाएगा।

उन्होंने कहा, मैं सारी चीजों का ध्यान से अध्ययन कर रहा हूं और किसी वरिष्ठ अधिकारी से मामले की जांच कराऊंगा। सिंघल ने एक सवाल के जवाब में कहा, दोनों को मीडिया के पास जाने से परहेज करना चाहिए था क्योंकि वे मामले को मेरी नोेटिस में ला चुके थे। इस तरह के मामलों में उन्हें विभागीय प्रक्रिया पर अडिग होना और उसका पालन करना चाहिए था और नतीजे का इंतजार करना चाहिए था। पुलिस आयुक्त ने कहा, मुझे उम्मीद है कि अब वे मामले में मीडिया के पास जाने से परहेज करेंगे।

बहरहाल मंगलवार शाम को विर्क ने एक बयान जारी कर कहा, श्रीमती भारती अरोड़ा द्वारा मेरे खिलाफ बलात्कार के मामले में पीड़िता का पक्ष लेने के जो आरोप लगाए गए हैं वे पूरी तरह गलत, आधारहीन और मेरी प्रतिष्ठा को धूमिल करने की मंशा से प्रेरित हैं। उन्होंने कहा, मैं पीड़िता को निजी तौर पर नहीं जानता हूं और उससे केवल अपने पद के अधिकार क्षेत्र में रहते हुए ही मेरी बात हुई है । उन्होंने कहा कि जिस मामले की बात की जा रही है वह पिछले वर्ष 26 जुलाई को दर्ज किया गया था और आरोपी को दो दिन बाद गिरफ्तार किया गया।

आयुक्त ने कहा, ये दोनों घटनाएं 23 नवंबर 2014 को गुड़गांव के पुलिस आयुक्त का पदभार संभालने से कई महीने पहले हुई थीं। अन्य जिन मामलों का जिक्र किया गया है उनमें भी कार्रवाई गुण-दोष के आधार पर की गई। पुलिस आयुक्त ने कहा, बलात्कार पीड़िता और एक अन्य व्यक्ति मनोज कुमार ने कई बार शिकायत की थी कि भारती अरोड़ा आरोपी का पक्ष लेने के लिए पूर्वग्रह के तहत काम कर रही हैं ।

उन्होंने कहा, इस बारे में मैं पहले ही हरियाणा के डीजीपी को सभी तथ्यों के साथ पहले ही लिख चुका हूं। इस बीच, पीड़िता ने विर्क का बचाव किया और भारती के इस आरोप को गलत बताया कि पुलिस आयुक्त सीमा से बाहर जाकर उसकी मदद कर रहे हैं । उसने आरोप लगाया कि आरोपी गुड़गांव के पूर्व उपायुक्त का बेटा है और उसकी बहन, भारती अरोड़ा को अच्छी तरह जानती है। उसने कहा कि संयुक्त पुलिस आयुक्त ने मामले की जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों को उसके गुड़गांव स्थित आवास पर भेजा जिन्होंने उसे धमकाया। उसने आरोप लगाया, इसके बाद मैंने गुड़गांव पुलिस आयुक्त से संपर्क कर तथ्य उनके संज्ञान में लाए और भारती के बनाए जा रहे दबाव से उन्हें अवगत कराया।

इस बीच, गुड़गांव में भारती अरोड़ा के कार्यालय पर नाटकीय घटनाक्रम हुआ। अपने कार्यालय में मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान एक अनजान चेहरा देखकर वह बिफर पड़ीं। पहचान पूछने पर इस व्यक्ति ने बताया कि वह हरियाणा पुलिस का कांस्टेबल है जिसके बाद भारती ने उसे तुरंत वहां से जाने को कहा। भारती ने सादे कपड़ों में मौजूद इस कांस्टेबल पर चिल्लाते हुए कहा, तुम्हारी मेरे कार्यालय में आने की हिम्मत कैसे हुई । तुम्हें मेरी जासूसी करने के लिए भेजा गया है।

कुछ समय बाद भारती ने एक और व्यक्ति से उसकी पहचान पूछी जिसने खुद को ‘सीआइडी कांस्टेबल ’ बताया। भारती ने उससे कहा, ‘ तुम्हारा यहां क्या काम ।’ इसके बाद उन्होंने उससे तुरंत वहां से चले जाने को कहा।

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