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Gulbarg Society Case: वो नरसंहार जिसमें चली गई थी 69 लोगों की जान, 30 अभी भी हैं लापता; दोषी भी जमानत पर हैं बाहर

गुलबर्ग सोसाइटी नरसंहार में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर काफी सवाल खड़े हुए थे। जकिया जाफरी की याचिका खारिज कर पीएम मोदी को सुप्रीम कोर्ट ने क्लीन चिट दे दी है।

Gulberg Society Massacre
गुलबर्ग सोसाइटी केस (फोटो सोर्स- द इंडियन एक्स्प्रेस)

साल 2002 के गोधरा कांड के बाद हुए गुलबर्ग सोसाइटी केस में सुप्रीम कोर्ट ने जकिया जाफरी की याचिका खारिज कर पीएम नरेंद्र मोदी को क्लीन चिट दे दी। इस हिंसा के दौरान जकिया जाफरी ने अपने पति अहसान जाफरी को खो दिया था, जो कांग्रेस के पूर्व सांसद थे। इस हिंसा में 69 लोगों की जान गई थी, जिनके दोषी आज भी जमानत पर बाहर घूम रहे हैं।

28 फरवरी, 2002 को अहमदाबाद के मेघानीनगर इलाके में गुलबर्ग सोसाइटी पर हुए हमले में जो लोग मारे गए थे, उनमें से 30 अभी भी लापता हैं। जाकिया के पति भी उन्हीं लोगों में शामिल हैं जिनके अवशेष आज तक नहीं मिले हैं। इस मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की तरफ से नियुक्त की गई एसआईटी द्वार करवाई गई थी।

गोधरा कांड और गुलबर्ग सोसाइटी केस में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर काफी सवाल खड़े हुए थे। हालांकि, एसआईटी ने उनको क्लीन चिट दे दी थी, जिसके बाद जकिया जाफरी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया और वहां भी पीएम मोदी को क्लीन चिट मिल गई है।

गुलबर्ग सोसाइटी मामले में कुल 72 लोगों को आरोपी बनाया गया था, जिनमें चार किशोर शामिल थे। इन पर अलग-अलग मुकदमा चलाया गया था। कुल आरोपियों में से छह की मौत सुनवाई के दौरान ही हो गई, जबकि 38 को बरी कर दिया गया। बरी किए गए लोगों में उस समय मेघानीनगर पुलिस स्टेशन के प्रभारी निरीक्षक के जी एरडा शामिल थे, जिनके अधिकार क्षेत्र में गुलबर्ग सोसाइटी आती थी।

वहीं, जून 2016 को 24 दोषियों को एक विशेष अदालत ने सजा सुनाई, जिनमें 11 को उम्रकैद की सजा दी गई थी। इन दोषियों में से तीन ने अपनी सजा पूरी कर ली, जबकि उनकी अपील लंबित है। बाकी सभी 21 जमानत पर बाहर हैं, जिनमें 11 उम्रकैद वाले आरोपी भी शामिल हैं। इन 24 दोषियों में से कुछ पर गंभीर आरोप थे जबकि कुछ पर कम गंभीर आरोप थे। इनमें चार आरोपी फरार हैं।

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