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सोहराबुद्दीन केस: जज ने कहा- मैं असहाय हूं, गवाह पलट जाएं तो कुछ नहीं क‍िया जा सकता

सीबीआई के स्पेशल जज एसजे शर्मा ने कहा कि सीबीआई ने केस के संबंध में अपनी तरफ से सराहनीय काम किए। लेकिन, अगर मामले में गवाह ही पलट जाएं तो कोई क्या कर सकता है। गवाहों पर दबाव नहीं डाला जा सकता।

सोहराबुद्दीन कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया गया (फोटो सोर्स: एक्सप्रेस आर्काइव)

मुंबई स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने शुक्रवार को सोहराबुद्दीन कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में 22 आरोपियों को बरी कर दिया। इस केस में सोहराबुद्दीन की पत्नी कौसरबी और अहम गवाह तुलसी प्रजापति की हत्या का भी मामला शामिल था। हालांकि, इस दौरान स्पेशल कोर्ट के जज की टिप्पणी गौर करने वाली रही।  जज ने कहा कि मामले में सीबीआई ने अच्छा काम किया। लेकिन, जब गवाह ही पलट जाएं और बोलने से मना करें तो कुछ भी नहीं किया जा सकता। जज ने यहां तक कह डाला कि “मैं मजबूर हूं”।

गुजरात में हुए इस मामले में सीबीआई ने 22 लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किए थे। इनमें से 21 सेवारत जबकि एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी शामिल था। इन पर आरोप थे कि उन्होंने सोहराबुद्दीन को अगवा करके उसका फर्जी एनकाउंटर किया और इसके अगले दिन कौसरबी की भी हत्या की गई। इसके बाद नवंबर 2005 में मामले के अहम गवाह तुलसी प्रजापति की भी साजिश के तहत हत्या कर दी गई। नवंबर, 2017 में इस केस का ट्रायल शुरू हुआ और 210 गवाहों से पूछताछ की गई। इनमें से 92 ट्रायल के दौरान अपने बयान से मुकर गए।

सीबीआई के स्पेशल जज एसजे शर्मा ने कहा कि केस से जुड़े लोगों पर आरोप सिद्ध नहीं हो पाए। अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ठोस और पुख्ता सबूत पेश करने में असफल रहा। घटनाक्रम से जुड़े तमाम सबूत केस को फर्जी-एनकाउंटर ठहराने में नाकाम रहे। उन्होंने यह भी कहा कि सीबीआई ने केस के संबंध में अपनी तरफ से सराहनीय कोशिश की है। लेकिन, अगर मामले में गवाह ही पलट जाएं तो कोई क्या कर सकता है। गवाहों पर दबाव नहीं डाला जा सकता। केस की परिस्थितियों को हवाला देते हुए जज ने कहा कि वह मजबूर हैं।

संक्षेप में जाने कथित एनकाउंटर का पूरा मामला: गुजरात के वांटेड अपराधी सोहराबुद्दीन शेख, उसकी बीवी कौसरबी और साथी तुलसी प्रजापति को कथित रूप से गुजरात पुलिस ने 23 नवंबर, 2005 को महाराष्ट्र में एक लग्जरी बस से अगवा किया और अहमदाबाद लेकर आई। 26 नंबर को सोहराबुद्दीन को कथित तौर पर फर्जी एनकाउंटर में मारा गया और इसके तीन दिन बाद उसकी पत्नी की भी लाश बरामद हुई। मामले में आरोपी पुलिस वालों का कहना था कि शेख का ताल्लुक आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा से था। वह गुजरात में किसी बड़े नेता की हत्या के लिए मौजूद था और इसी दौरान एनकाउंटर में उसे मार गिराया गया।

2006 को मामले में सोहराबुद्दीन के भाई रबाबुद्दीन ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर एनकाउंटर की जांच कराने की मांग की। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात पुलिस अधिकारी वीएल सोलंकी को शेख को अगवा करने के एक मात्र गवाह प्रजापति की पूछताछ का निर्देश दिया। कुछ दिनों बाद ही प्रजापति का भी कथित तौर पर एनकाउंटर कर दिया गया। प्रजापति की मां ने भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिक दाखिल की और इंसाफ की मांग की। पहले यह मामला गुजरात सीआईडी के हाथ में था लेकिन, 2010 में इसे सीबीआई को हैंडओवर कर दिया गया।

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