हाल-ए-गुजरातः अस्पताल ने संक्रमित बेटे को भर्ती करने से कर दिया इन्कार, बीच सड़क पर पुत्र संग बैठ गई मां

गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में सही वक्त पर इलाज ना मिल पाने के कारण और अस्पताल में भर्ती नहीं हो पाने की वजह से कई मरीज एम्बुलेंस में ही दम तोड़ रहे हैं।

ahmedabad, gujrat, cronavirusअहमदाबाद में एक मां अपने कोरोना संक्रमित बेटे को भर्ती कराने के लिए शारदा बेन हॉस्पिटल आई थी। लेकिन अस्पताल प्रशासन के द्वारा भर्ती नहीं किए जाने पर बुजुर्ग मां अपने कोरोना संक्रमित बेटे के साथ सड़क पर बैठने को मजबूर हो गई। (ट्विटर/free_thinker)

देशभर में कोरोना संक्रमण के मामले काफी तेजी से बढ़ रहे हैं। कोरोना की दूसरी लहर ने देश के ख़राब पड़े सिस्टम और स्वास्थ्य व्यवस्था की सच्चाई सबके सामने लाकर रख दी है। प्रधानमंत्री मोदी के गृह राज्य गुजरात में भी कोरोना का संक्रमण इतनी तेजी से फ़ैल रहा है कि हर दिन कोरोना के मामलों के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं। इसी बीच गुजरात की राजधानी अहमदाबाद से एक दिल दहलाने वाले तस्वीर सामने आई है जहां अस्पताल में भर्ती ना मिलने पर एक मां को अपने कोरोना संक्रमित बेटे को लेकर सड़क पर बैठने को मजबूर होना पड़ा।

दरअसल इन दिनों अहमदाबाद के शारदा बेन हॉस्पिटल का वीडियो काफी वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो के अनुसार एक मां अपने कोरोना संक्रमित बेटे को भर्ती कराने के लिए शारदा बेन हॉस्पिटल आई थी। लेकिन अस्पताल प्रशासन ने कोरोना प्रोटोकॉल और नियमों का हवाला देकर उनके बेटे को भर्ती नहीं किया। जिसके बाद सरकारी नियम कायदों की वजह से पीड़ित मां और और उसके कोरोना संक्रमित बेटे को अस्पताल के बाहर सड़क पर बैठने को मजबूर होना पड़ा। कहा यह भी जा रहा है कि शारदा बेन हॉस्पिटल के बाहर बाउंसर भी तैनात किए गए हैं ताकि मरीज बिना अस्पताल प्रशासन की अनुमति के अंदर ना जा सके।

दरअसल अहमदाबाद के शारदाबेन अस्पताल में प्रवेश के लिए एक प्रोटोकॉल बनाया गया है। प्रोटोकॉल के अनुसार सिर्फ 108 एम्बुलेंस सेवा के माध्यम से आने वाले मरीजों को ही भर्ती किया जा रहा है। लेकिन वह बुजुर्ग महिला अपने कोरोना संक्रमित बेटे को बिना 108 एम्बुलेंस के ही अस्पताल लेकर आ गई थी। जिसकी वजह से अस्पताल प्रशासन ने उसके कोरोना संक्रमित बेटे को भर्ती करने से मना कर दिया।

पिछले दिनों ऐसा ही एक और वाकया प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में हुआ था। जहां इलाज ना मिलने की वजह से एक जवान बेटे की मौत अपने मां के कदमों में ही हो गई। इतना ही नहीं जब बेटे की लाश को घर तक लाने के लिए कोई एम्बुलेंस नहीं मिली तो उस मां को ई-रिक्शा में अपने बेटे की लाश को लादना पड़ा। जानकारी के अनुसार उत्तरप्रदेश के जौनपुर के रहने वाली एक बुजुर्ग मां अपने जवान बेटे का इलाज कराने के लिए वाराणसी के एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकती रही। लेकिन किसी भी अस्पताल ने उसे भर्ती नहीं किया। आख़िरकार बेटे ने मां के कदमों में ही अपना तोड़ दिया।

बता दें कि गुजरात की राजधानी अहमदाबाद में सही वक्त पर इलाज ना मिल पाने के कारण और अस्पताल में भर्ती नहीं हो पाने की वजह से कई मरीज एम्बुलेंस में ही दम तोड़ रहे हैं। इसके बावजूद राज्य सरकार यह दावा कर रही है कि अहमदाबाद के सभी अस्पतालों में करीब 20 प्रतिशत बेड खाली हैं और सभी डेडिकेटेड कोविड अस्पताल में भी 14 प्रतिशत बेड खाली रहे हैं। अहमदाबाद में पिछले 24 घंटे में संक्रमण के 5142 नए मामले सामने आए हैं।

वहीं पूरे गुजरात में पिछले 24 घंटे में कोरोना वायरस के 13,105 मामले सामने आए हैं। नए मामले आने के साथ ही राज्य में संक्रमितों की संख्या 4,53,836 हो गई है। साथ ही पिछले 24 घंटे में 137 लोगों की मौत इस महामारी की वजह से हो गई। गुजरात में अभी तक कुल 5877 लोगों की मौत इस महामारी की वजह से हो चुकी है।

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