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RTI से खुलासा: गुजरातियों ने चार महीने में घोषित किया 18,000 करोड़ रुपये काला धन

जानकारी पाने के लिए झाला ने 21 दिसंबर, 2016 को ये अर्जी दाखिल की थी। ये आवेदन अहमदाबाद के रहने वाले प्रॉपर्टी डीलर महेश शाह की 13,860 करोड़ रुपये की अघोषित आय का खुलासा होने के बाद किया गया था।

प्रतीकात्मक तस्वीर (फाइल फोटोः ड्रीम्सटाइम)

पूरे देश में आय घोषणा योजना के तहत महज चार महीने के भीतर गुजरातियों ने 18,000 करोड़ रुपये घोषित किए हैं। ये पूरे देश में सामने आई अघोषित आय का करीब 29 प्रतिशत है। ये जून और सितंबर 2016 के बीच हुआ, जब नोटबंदी के कारण काले धन का मुद्दा चर्चा में था और प्रॉपर्टी डीलर महेश शाह की 13,860 करोड़ रुपये की अघोषित आय का भी खुलासा नहीं हुआ था।

एक आरटीआई के जवाब में, आयकर विभाग ने बताया कि करीब 18,000 करोड़ रुपये गुजरात में स्वैच्छिक आय घोषणा योजना के तहत जून 2016 से सितंबर 2016 के बीच घोषित किए गए। ये योजना के तहत घोषित की गई कुल रकम 65,250 करोड़ रुपये का करीब 29 फीसदी है। आयकर विभाग को आरटीआई के जरिए सवाल पूछने वाले भारत सिंह झाला को जानकारी उपलब्ध करवाने में करीब दो साल का वक्त लग गया।

जानकारी पाने के लिए झाला ने 21 दिसंबर, 2016 को ये अर्जी दाखिल की थी। ये आवेदन अहमदाबाद के रहने वाले प्रॉपर्टी डीलर महेश शाह की 13,860 करोड़ रुपये की अघोषित आय का खुलासा होने के बाद किया गया था। हालांकि उसका स्वैच्छिक आय घोषणा आवेदन रद कर दिया गया था जब वह अपनी पहली किश्त को चुकाने में नाकाम रहा था।

हालांकि विभाग ने नेताओं, पुलिस अधिकारियों और नौकरशाहों के द्वारा घोषित की गई आय पर विभाग ने अभी भी चुप्पी साध रखी है। टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक, झाला ने कहा कि उन्हें ये जानकारी हासिल करने के लिए दो सालों तक संघर्ष करना पड़ा। झाला ने कहा,”पहली बार में आवेदन पत्र ही गुम हो गया। बाद में विभाग ने इंकार कर दिया क्योंकि आवेदन गुजराती भाषा में लिखा गया था। बाद में, 5 सितंबर 2018 को दिल्ली में मुख्य सूचना आयुक्त ने आयकर विभाग को जानकारी उपलब्ध करवाने का निर्देश दिया।”

केंद्र सरकार ने साल 2016 में स्वैच्छिक आय घोषणा योजना की घोषणा की थी। इस योजना ने तहत अपने काले धन के बारे में विभाग को जून 2016 और सितंबर 2016 के बीच जानकारी दी जा सकती थी। घोषणा के बाद, कुल रकम का 25 फीसदी नवंबर 2016 तक चुका देना था और 25 प्रतिशत की दूसरी किश्त को मार्च 2017 तक चुकाना था। इसके बाद बाकी की रकम को नवंबर 2017 तक चुकाना था।

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