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Gujarat: स्पीकर ने लिया स्कूली बच्चों से वादा- कभी नहीं खाओगे नॉन-वेज, यह हमारा संस्कार नहीं

Gujarat Speaker: विधान सभा अध्यक्ष ने छात्रों से यह वादा करने के लिए कहा कि, "अपने जीवन में कभी भी नॉन वेज (मांसाहारी) भोजन नहीं करेगें और पूरी जिदंगी वेजिटेरियन (शाकाहारी) रहेंगे।

गुजरात विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र त्रिवेदी

Gujarat: गुजरात विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र त्रिवेदी ने अहमदाबाद में श्री नारायण सांस्कृतिक मिशन द्वारा संचालित केंद्रीय विद्यालय के छात्रों से वादा कराया कि वे अपने जीवनकाल में कभी भी मांसाहारी भोजन नहीं करेंगे, क्योंकि यह “भारतीय संस्कृति” का हिस्सा नहीं है। बता दें कि त्रिवेदी यहां तीन दिवसीय स्वर्ण जयंती समारोह में अतिथि के रूप में भाग लेने पहुंचे थे। उन्होंने बच्चों को बताया कि जानवर के बच्चो का जब जन्म होता है तो उनकी आंखे बंद होती है इसलिए वह नॉन वेजिटेरियन (मांसाहारी) होते है।

भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है नॉन वेज: विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि, “भारतीय संस्कृति (भारतीय संस्कृति) कहती है कि हमें मांसाहारी भोजन नहीं करना चाहिए। हमें शाकाहारी होना चाहिए। क्योंकि हमारे ऋषि-मुनियों ने कहा कि जब बिल्ली का बच्चा पैदा होता है, तो उसकी आंखें बंद होती हैं। जब कुत्ते के बच्चे का जन्म होता है, तो उनकी भी आंखें बंद होती हैं। जबकि बाघों, शेरों के बच्चे जब पैदा होते हैं, तो उनकी भी आंखें बंद हो जाती हैं। इसलिए जिन जानवरों की संतानें जन्म के समय आंखें बंद कर लेती हैं, वे सभी मांसाहारी होते हैं। लेकिन इंसानों के बच्चे अपनी आंखों के साथ पैदा होते हैं, इसलिए हम मांसाहारी भोजन नहीं खा सकते हैं। प्रकृति ने हमें यही सिखाया है और हमारे संतों ने इसे देखा है। ”

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छात्रों से नॉन वेज न खाने का कराया वादा: इसके बाद विधान सभा अध्यक्ष ने छात्रों से यह वादा करने के लिए कहा कि, अपने जीवन में कभी भी नॉन वेज (मांसाहारी) भोजन नहीं करेगें और पूरी जिदंगी वेजिटेरियन (शाकाहारी) रहेंगे। इसका जवाब बच्चों ने “हां” के रूप में दिया। विधानसभा स्पीकर के बाद इस कार्यक्रम में तीन अन्य वक्ता बोलने के लिए मौजूद थे।

इससे पहले भी दिए थे बयान: बता दें कि इससे पहले राजेंद्र त्रिवेदी ने कहा था कि, “इतिहास बताता है कि ब्राह्मण हमेशा दूसरों को आगे बढ़ाते हैं। यह राव ही थे जिन्होंने अंबेडकर को अपने से आगे रखा। हमें अंबेडकर पर गर्व है क्योंकि उन्होंने 25 नवंबर,1949 को संविधान सभा में अपने भाषण में इसे कबूल किया।”

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