40 डिग्री की भीषण गर्मी में करीब 100 लोग एक शामियाना के नीचे डेरा डाले हुए हैं। इनमें से करीब 50 महिलाएं हैं। धरना स्थल पर आयोजित ‘डायरो’ (गुजरात की पारंपरिक लोकसभा) में लोक संगीत और घुड़सवारी परेड का आयोजन किया जा रहा है। यहां झालावाड़ क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिल रही है। मोरबी और सुरेंद्रनगर जिले इसी झालावाड़ क्षेत्र का हिस्सा हैं।

यहां आए लोग विरोध-प्रदर्शन करने के लिए इकट्ठा हुए हैं। कुछ पुरुषों ने अपना सिर मुंडवा लिया है। 17 जून से कुछ प्रदर्शनकारी भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं, कुछ लोगों को चिकित्सीय सहायता की जरूरत है।

प्रदर्शन कर रहे अधिकतर प्रदर्शनकारियों में पाटीदार किसान हैं। इन आंदोलनकारियों की मांग है कि कच्छ जिले के खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी ज़ोन से बिजली पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन और टावरों के लिए इस्तेमाल की जा रही उनकी जमीन का मुआवजा बढ़ाया जाए।

जमीन का मुआवजा बढ़ाने की मांग

आंदोलन में शामिल अधिकांश किसान पाटीदार समुदाय से हैं। उनकी मांग है कि कच्छ जिले के खावड़ा रिन्यूएबल एनर्जी ज़ोन से बिजली पहुंचाने के लिए बनाई जा रही हाई-वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइन और टावरों के लिए इस्तेमाल की जा रही उनकी जमीन का मुआवजा बढ़ाया जाए।

हाई-टेंशन बिजली ट्रांसमिशन लाइन के टावर हलवद ट्रांसमिशन लिमिटेड (Halvad Transmission Limited) द्वारा लगाए जा रहे हैं। यह कंपनी अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस लिमिटेड (Adani Energy Solutions Limited -AESL) की एक स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) है। AESL देश की सबसे बड़ी निजी बिजली ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों में से एक है।

हाई-टेंशन ट्रांसमिशन लाइन और टावरों के खिलाफ किसानों का विरोध 9 जून से गुजरात के कई इलाकों में शुरू हुआ था। सबसे ज्यादा प्रदर्शन मोरबी जिले में देखने को मिला। यहां के किसानों का कहना है कि इस परियोजना से सबसे अधिक प्रभावित वही हुए हैं।

कब शुरु हुआ किसानों का विरोध-प्रदर्शन

15 जून को गुजरात कांग्रेस ने गांधीनगर में एक रैली निकालकर राज्यभर में प्रदर्शन शुरु किया था। इस आंदोलन को उस समय और मजबूती मिली जब पार्टी ने अपनी मांगों में मोरबी के किसानों की मुआवजे की मांग को शामिल कर लिया। इसके बाद बड़ी संख्या में मोरबी के किसान राज्य के अन्य जिलों में निकाली जा रही रैली में भी शामिल हुए।

हालांकि, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने अब तक प्रदर्शनकारियों से औपचारिक बातचीत शुरू नहीं की है। लेकिन वह यह संदेश भी नहीं देना चाहती कि वह किसानों के विरोध में है। पाटीदार बहुल मोरबी जिला इस आंदोलन का केंद्र है और राज्य की राजनीति में हमेशा से अहम भूमिका निभाता रहा है।

मोरबी जिले के जेटपर गांव के 65 वर्षीय किसान रामजीभाई नंजीभाई भडजा का कहना है कि उनकी 12 बीघा जमीन में से करीब 70 प्रतिशत हिस्से पर ट्रांसमिशन टावर और बिजली की लाइनें लगाई जाएंगी। राज्य राजमार्ग के किनारे स्थित उनकी जमीन की मौजूदा कीमत करीब 40 लाख रुपये प्रति बीघा है लेकिन उनका कहना है कि बिजली ढांचा बनने के बाद इसकी कीमत काफी घट जाएगी।

Halvad Transmission Limited SPV, Hunger strike
35 गांव के सरपंचों ने इस प्रदर्शन को अपना समर्थन दिया है।

किसानों का कहना है कि जमीन का मालिकाना हक तो उनके पास रहेगा लेकिन टावर और हाई-टेंशन लाइनें लगने के बाद खेती करना मुश्किल हो जाएगा और जमीन खरीदने वाले भी नहीं मिलेंगे। रामजीभाई के मुताबिक, उनकी 8.3 बीघा जमीन के बदले उन्हें केवल करीब 30 लाख रुपये मुआवजा देने की पेशकश की गई है और इसे वह बेहद कम मानते हैं।

रामजीभाई के बेटे अमितभाई ने कहा, ”हम मजबूरी में भूख हड़ताल पर बैठे हैं। राज्य सरकार हमारी मांगों पर ध्यान नहीं दे रही है। पिछले कुछ दिनों में कई किसानों, महिलाओं और यहां तक कि बच्चों को भी प्रदर्शन स्थलों से हिरासत में लिया गया है।”

मोरबी के पुलिस अधीक्षक एम. एन. पटेल ने कहा कि किसानों ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं ली थी। इसके बावजूद पुलिस इस मामले को संवेदनशील मानते हुए संयम बरत रही है। एसपी ने कहा, ”हलवद-मालिया हाइवे रोकने की कोशिश करने और बाधा उत्पन्न करने के लिए करीब दो हफ्ते पहले कुछ किसानों को दो दिनों के लिए हिरासत में लिया गया था। हमने किसी नाबालिग को नहीं पकड़ा, बच्चे अपनी माताओं के साथ आने पर अड़े हुए थे और खुद ही पुलिस के वाहन पर चढ़ गए। कुछ पुलिसकर्मियों को इस दौरान चोटें भी आईं।”

प्रदर्शन की वजह आखिर है क्या?

यह विरोध प्रदर्शन हलवद ट्रांसमिशन लिमिटेड द्वारा बिछाई जा रही 756 केवी डीसी (डायरेक्ट करंट) ट्रांसमिशन लाइन के खिलाफ हो रहा है। यह लाइन कच्छ के खावड़ा स्थित KPS-2 पूलिंग स्टेशन से मोरबी के हलवद में बनाए जा रहे नए स्विचिंग स्टेशन तक करीब 246 किलोमीटर लंबी होगी।

प्रदर्शन के 13वें दिन मंगलवार (30 जून 2026) को इंडियन एक्सप्रेस इस गांव में पहुंचा जहां नौ किसान भूख हड़ताल पर बैठे हुए थे। गांव के मुख्य बाजार में बस स्टैंड के पास बने ‘उपवास छावनी’ (भूख हड़ताल स्थल) पर मिनी ट्रक और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में सवार बड़ी संख्या में पुरुष और महिला प्रदर्शनकारी तिरंगा लहराते हुए पहुंच रहे हैं।

भूख हड़ताल पर बैठे किसानों में 57 वर्षीय राकेशभाई शिवलाल अमरूतिया और 51 वर्षीय भरतभाई अमरूतिया भी शामिल हैं। दोनों गुजरात सरकार में श्रम, कौशल विकास एवं रोजगार राज्य मंत्री और मोरबी से भाजपा विधायक कांतिलाल अमरूतिया के भाई हैं।

राकेशभाई ने कहा, ”भूख हड़ताल शुरू करने से कुछ दिन पहले मेरे भाई (मंत्री) हमसे मिलने आए थे और उन्होंने मामले का समाधान निकालने की पूरी कोशिश की। लेकिन लगता है कि सरकार में शीर्ष स्तर पर इस मुद्दे को लेकर कोई गंभीरता नहीं है।”

उन्होंने कहा, ”मैं और मेरे भाई दोनों इस स्थिति से दुखी हैं। मैं एक किसान हूं और किसानों के साथ खड़ा होना मेरा कर्तव्य है। मेरी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं है।”

भरतभाई ने कहा, ”ट्रांसमिशन लाइन से मेरे खेत को कोई नुकसान नहीं हो रहा है। लेकिन मैं यहां उन किसानों के समर्थन के लिए हूं जिनके पास मुश्किल से 3-4 बीघा जमीन है और उन पर परिवार व बच्चों की जिममेदारी है।”

मोरबी के 35 से अधिक गांवों के सरपंच किसानों के समर्थन में

मोरबी में 35 से ज्यादा गांवों के सरपंचों ने प्रदर्शनारियों के समर्थन का ऐलान किया है। मोरबी जिला सरपंच संघ के अध्यक्ष और निची मंडल गांव के सरपंच रवीराजसिंह परमार ने कहा, ”हम दूसरी बार किसानों के समर्थन में जेटपर आए हैं। जरूरत पड़ी तो फिर आएंगे।”

 Patidar farmers protest
प्रदर्शन कर रहे लोगों में बीजेपी मंंत्री के दो भाई भी शामिल हैं।

किसानों ने सरकार के सामने छह प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें सबसे अहम मांग यह है कि जमीन का मुआवजा बाजार मूल्य का 400 प्रतिशत दिया जाए। किसानों का कहना है कि मुआवजा राज्य सरकार की जंत्री (सर्किल रेट) के आधार पर नहीं बल्कि राजस्थान की तर्ज पर बाजार भाव के अनुसार तय किया जाए।

17 जून से भूख हड़ताल पर बैठे किसानों में शामिल नेहुलकुमार धीरजलाल अमरूतिया ने कहा कि 14 जून 2024 के केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, मार्केट रेट कमेटी (MRC) ट्रांसमिशन टावर वाली जमीन के लिए बाजार मूल्य का 200 प्रतिशत मुआवजा तय करती है। लेकिन राजस्थान सरकार हाई-वोल्टेज बिजली लाइनों के मामलों में इसके ऊपर अतिरिक्त 200 प्रतिशत मुआवजा भी देती है।

उन्होंने कहा, “इसी आधार पर हम भी बाजार मूल्य का 400 प्रतिशत मुआवजा मांग रहे हैं ना कि जंत्री (सर्किल रेट) के आधार पर तय राशि।”

मोरबी के जिला कलेक्टर और जिला स्तरीय मूल्यांकन समिति (DLVC) के अध्यक्ष स्वप्निल खरे ने कहा कि राज्य सरकार ने 28 जून को किसानों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया था। सरकार ने उन्हें बताया था कि उनकी सभी मांगों पर विचार किया जा रहा है और समाधान केवल बातचीत के जरिए ही निकाला जा सकता है। हालांकि, किसानों की ओर से इस पर कोई जवाब नहीं मिला।

वहीं आंदोलन कर रहे किसानों का कहना है कि सरकार पहले उनकी सभी छह मांगों को लिखित रूप में स्वीकार करे, तभी वे बातचीत के लिए तैयार होंगे। टिकार गांव के किसान निलेशभाई एरवाडिया ने कहा, ”राज्य सरकार की ओर से कोई स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है। हमें उनके वादों पर भरोसा नहीं है। इसलिए हमने कहा है कि पहले लिखित में दें कि हमारी सभी छह मांगें मान ली गई हैं।”

निलेशभाई ने बताया कि भूख हड़ताल के दौरान उनका 16 किलो वजन कम हो गया जिसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल के आईसीयू में दो दिन तक भर्ती रहना पड़ा।

पुलिस के साथ कई बार टकराव

यह आंदोलन 9 जून को 50 पुरुषों और 100 महिलाओं की प्रतीकात्मक भूख हड़ताल के साथ शुरू हुआ था। लेकिन स्थानीय पुलिस के साथ कई बार हुए टकराव के बाद 17 जून से किसानों ने इसे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल में बदल दिया। 19 जून को करीब 15 किसानों ने विरोध के तौर पर मुंडन भी कराया।

हर शाम उपवास छावनी में बड़ी संख्या में लोग जुट रहे हैं। आंदोलन स्थल पर ‘किसान जिंदाबाद’ के नारे लगाए जा रहे हैं। किसान नुक्कड़ नाटकों और सामाजिक नेताओं के प्रेरक भाषणों के जरिए अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठा रहे हैं।

गुरुवार सुबह बारिश के कारण किसानों ने अपना धरना स्थल पास बने राम वाड़ी हॉल में शिफ्ट कर दिया। वहीं उपवास छावनी में बारिश से बचाव के लिए रेन-प्रूफ डोम बनाने का काम भी शुरू कर दिया गया है।

बुधवार को गुजरात के कृषि मंत्री और राज्य सरकार के प्रवक्ता जीतू वाघानी ने कहा कि किसानों की मांगों पर जल्द ही सकारात्मक फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के स्तर पर लगातार बातचीत चल रही है और किसानों के हितों को प्राथमिकता देते हुए उचित फैसला लिया जाएगा। वहीं, अडानी ग्रुप के प्रवक्ता ने कहा कि प्रभावित लोगों को सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार मुआवजे की पेशकश की गई है।

अडानी एनर्जी सॉलयूशंस लिमिटेड (AESL) के प्रवक्ता ने कहा कि कंपनी ने मौजूदा सरकारी नियमों के अनुसार प्रभावित जमीन मालिकों को मुआवजे की पेशकश की है। हालांकि, कुछ जमीन मालिक सरकार द्वारा तय मानकों से अधिक मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

प्रवक्ता ने बताया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत कंपनी ने जिला प्रशासन से मार्गदर्शन मांगा था। सभी पक्षों के साथ कई दौर की सुनवाई के बाद जिला प्रशासन ने मुआवजे की राशि तय की और जरूरत पड़ने पर पुलिस सुरक्षा के साथ कंपनी को काम जारी रखने की अनुमति भी दे दी।

कंपनी का कहना है कि वह कानून के तहत जिला प्रशासन द्वारा तय किए गए उचित मुआवजे का भुगतान करने और जमीन मालिकों से लगातार संवाद बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही कंपनी ने आरोप लगाया कि कुछ स्वार्थी तत्व जमीन मालिकों को भड़काने का काम कर रहे हैं।

किसान क्या चाहते हैं?

-जमीन का बाजार मूल्य पता करने के लिए मार्केट रेट कमेटी (MRC) का गठन
-टावर वाली जमीन के लिए बाजार मूल्य (MRC द्वारा तय) का 400% मुआवजा दिया जाए
-राइट ऑफ वे (RoW) यानी बिजली लाइनों के सुरक्षित कॉरिडोर वाली जमीन के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में 230%, नगर पालिका क्षेत्रों में 245% और नगर -निगम क्षेत्रों में 260% मुआवजा दिया जाए
-मुआवजे की पूरी राशि एकमुश्त और अग्रिम भुगतान की जाए
-ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर के आदेश जारी करने के बाद जिला कलेक्टर मुआवजा प्रक्रिया शुरू करें
-अन्य सभी मामलों में गुजरात ऊर्जा विभाग केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप आवश्यक सर्कुलर जारी करे