गुजरातः विजय रूपाणी की बेटी का सवाल- ढाई बजे रात तक पिता करते थे काम, क्या सिर्फ कठोर छवि ही नेता की पहचान?

बेटी के मुताबिक, सितंबर 2002 में जब गांधीनगर (गुजरात) के अक्षरधाम मंदिर में आतंकी हमला हुआ था, तब उनके पिता ही पहले व्यक्ति थे, जो वहां गए थे। रूपाणी तब मोदी से भी पहले वहां पहुंचे थे।

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गुजरात के गांधीनगर में एक कार्यक्रम के दौरान विजय रूपाणी। (एक्सप्रेस फोटोः जावेद रज़ा)

भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) शासित गुजरात में मुख्यमंत्री बदले जाने के बाद पूर्व सीएम विजय रूपाणी की बेटी राधिका ने बताया है कि उनके पिता कठिन समय में देर रात ढाई बजे तक लोगों के लिए काम किया करते थे। साथ ही सवाल उठाया है कि क्या सिर्फ कठोर छवि ही नेता की पहचान होती है? वह लंदन में रहती हैं। उन्होंने रविवार (12 सितंबर, 2021) को ये बातें फेसबुक पोस्ट के जरिए कहीं। ‘विजय रूपाणी फ्रॉम दि आईज ऑफ ए डॉटर’ (एक बेटी की नजर से विजय रूपाणी) शीर्षक वाले पोस्ट में उन्होंने पिता की “मृदुभाषी” छवि को नष्ट करने वाले सभी लोगों की निंदा की। आगे पिता के सियासी जीवन के उदाहरणों का जिक्र किया और बताया कि कैसे वह एक “संवेदनशील” नेता बनना चाहते थे।

बेटी के मुताबिक, सितंबर 2002 में जब गांधीनगर (गुजरात) के अक्षरधाम मंदिर में आतंकी हमला हुआ था, तब उनके पिता ही पहले व्यक्ति थे, जो वहां गए थे। रूपाणी तब मोदी से भी पहले वहां पहुंचे थे। राधिका आगे बोलीं- कम ही लोग जानते हैं कि चक्रवाती तूफान तौकते और वैश्विक महामारी कोरोना वायरस सरीखे बड़े खतरों के दौरान मेरे पिता देर रात ढाई बजे तक जागते रहते थे और सीएम डैशबोर्ड और फोन कॉल्स के जरिए बंदोबस्त में जुटे रहते थे।

रूपाणी की ‘मृदुभाषी छवि ने ही उनके खिलाफ काम किया’ हेडलाइन का हवाला देते हुए राधिका ने आगे लिखा- क्या राजनेताओं में संवेदनशीलता और कृपा नहीं होनी चाहिए? क्या यह एक जरूरी गुण नहीं है, जो हमें एक नेता में चाहिए? उन्होंने (रूपाणी) कड़े कदम उठाए हैं और जमीन हथियाने वाला कानून, “लव जिहाद”, गुजरात आतंकवाद नियंत्रण और संगठित अपराध कानून (गुजसीटीओसी), सीएम डैशबोर्ड जैसे फैसले इस बात के सबूत हैं। क्या कठोर चेहरे का भाव ओढ़े रहना…एक नेता की निशानी है?”

बता दें कि गुजरात में विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने मुख्यमंत्री बदल दिया है। रूपाणी ने तीन दिन पहले सीएम पद से अचानक इस्तीफा दे दिया था। कोविड-19 महामारी के दौरान भाजपा शासित राज्यों में पद छोड़ने वाले रूपाणी चौथे मुख्यमंत्री हैं। उन्होंने दिसंबर 2017 में दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। उन्होंने इस वर्ष सात अगस्त को मुख्यमंत्री के तौर पर पांच वर्ष पूरे किये थे।

रूपाणी के बाद भूपेंद्र पटेल को सूबे की कमान सौंपी गई है। उन्होंने राज्य के 17वें मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली और वह सूबे में पाटीदार समुदाय से पांचवें सीएम हैं। गुजरात में पाटीदार एक प्रमुख जाति है। उसका चुनावी वोटों में से एक बड़े हिस्से पर नियंत्रण होने के साथ ही शिक्षा, रियल्टी और सहकारी क्षेत्रों पर मजबूत पकड़ भी है। ऐसे में जब दिसंबर 2022 में राज्य विधानसभा चुनाव होने की उम्मीद है, भाजपा ने चुनाव में जीत के लिए पटेल पर भरोसा जताया है।

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