राजस्थान के जोधपुर में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को गुजरात हाईकोर्ट से झटका लगा है। दरअसल, हाईकोर्ट ने आसाराम की 20 दिन की अस्थायी जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। आसाराम ने मानवीय आधार पर बीमार पत्नी को देखने के लिए राहत मांगी थी, लेकिन उन्हें यह राहत नहीं मिली है।
जस्टिस गीता गोपी और जस्टिस एलएस पीरजादा की डिवीजन बेंच ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि उन्हें अपनी पत्नी से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात करने की अनुमति दी गई है।
कोर्ट ने पुलिस को दिए थे यह निर्देश
कोर्ट ने मंगलवार को पुलिस को आसाराम की पत्नी की स्वास्थ्य स्थिति की जांच कर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। बुधवार को पुलिस ने अस्पताल की रिपोर्ट और उनका इलाज कर रहे दोनों डॉक्टरों के बयान के आधार पर आसाराम की याचिका को खारिज कर दिया गया।
आसाराम की पत्नी की तबियत का क्या है स्टेटस
कोर्ट में आसाराम के वकील ने कहा कि उनकी उम्र 86 साल है जबकि उनकी पत्नी की उम्र 83 साल है। पत्नी की स्वास्थ्य स्थिति लगातार चिंताजनक बनी हुई है। इसी दलील के आधार पर उन्होंने जमानत अर्जी दाखिल की थी। वहीं, सरकारी वकील ने डॉक्टरों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि आसाराम की पत्नी ठीक हैं। फिलहाल उनकी हालत स्थिर है। डॉक्टरों के अनुसार, उन्हें दो-तीन दिनों में अस्पताल से छुट्टी मिलने की संभावना है।
सरकारी वकील ने यह भी कहा कि उनकी पत्नी एक मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल में इलाज करा रही हैं और उनके रिश्तेदार तथा निजी डॉक्टर उनकी देखभाल कर रहे हैं। इसलिए आसाराम को अस्थायी जमानत देने की तत्काल आवश्यकता नहीं है।
किस मामले में सजा काट रहे आसाराम?
बता दें कि आसाराम बापू 2013 में एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के मामले में दोषी ठहराए जाने के कारण उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। साल 2013 में ही आसाराम पर उन्हीं के आश्रम में रहने वाली एक नाबालिग लड़की ने यौन शोषण का आरोप लगाया था। जोधपुर की विशेष अदालत ने आसाराम को नाबालिग से बलात्कार सहित कई धाराओं में दोषी ठहराया और प्राकृतिक जीवन के शेष समय तक उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
इसके बाद 27 मई 2026 को भी हाईकोर्ट ने नाबालिग से बलात्कार की उनकी दोषसिद्धि और उम्रकैद बरकरार रखी, हालांकि अदालत ने गैंगरेप और आपराधिक साजिश से जुड़े कुछ आरोपों में उन्हें बरी कर दिया। इसके बाद आसाराम ने सुप्रीम कोर्ट में अपील हुई तो वहां जून 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार से जवाब मांगा था और इस दौरान सजा को बरकरार रखा था।
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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में एक लड़की ने कथित तौर पर जिसे 15 सालों तक भाई मानकर राखी बांधी थी अब उसी से शादी कर ली है। इसके बाद परिवार ने प्राकृतिक तौर पर उसका अंतिम संस्कार कर उसकी तस्वीर पर ‘स्वर्गीय’ लिख दिया है। लड़की के घरवाले उस लड़के को अपनी बेटी का भाई मानते थे, परिवार का आरोप है कि उसने उनकी बेटी को बहलाया है। उसका घर आना-जाना था, हमारी बेटी उसे भाई मानती थी, इस खबर की इलाके में चर्चा है। यहां पढ़ें पूरी खबर…
