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गुजरातः चीफ जस्टिस जा रहे थे कोर्ट, आवारा गायों ने रोका रास्ता तो बिफरे, जानें कानून को लेकर क्या कहा

मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार ने उस वाकए का जिक्र किया जब सोमवार को हाई कोर्ट परिसर में प्रवेश करते समय उनकी कार को गायों के झुंड ने रोक दिया था।

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आवारा पशु (फाइल)

गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को आवारों गायों द्वारा उनका रास्ता रोकने के कारण परेशानियों का सामना करना पड़ा। इसका जिक्र उन्होंने एक मामले की सुनवाई के दौरान किया। मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार और जस्टिस एजे शास्त्री की खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कैसे इस समस्या ने गुजरात उच्च न्यायालय को भी प्रभावित किया है, जिसमें एक दर्जन गायों ने कोर्ट परिसर के रास्ते को अवरुद्ध कर दिया है।

मुख्य न्यायाधीश अरविंद कुमार ने उस वाकए का जिक्र किया जब सोमवार को हाई कोर्ट परिसर में प्रवेश करते समय उनकी कार को गायों के झुंड ने रोक दिया था। उन्होंने कहा, “मेरी कार आज कोर्ट में प्रवेश कर रही थी और तभी करीब 10-12 गायों ने रास्ता रोक लिया। पुलिस के सीटी बजाने के बाद भी गायें वहां से नहीं हट रही थीं।”

हाई कोर्ट राज्य में सड़कों की खराब गुणवत्ता और अहमदाबाद में मवेशियों की समस्या और पार्किंग की समस्याओं के संबंध में एक जनहित याचिका में अपने 2018 के फैसले में निहित निर्देशों का पालन न करने पर अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह अवमानना याचिका मुस्ताक हुसैन मेहंदी हुसैन कादरी द्वारा वकील अमित पांचाल के माध्यम से दायर की गई थी।

हाई कोर्ट में दायर इस याचिका में कहा गया है कि आवारा पशुओं के पुनर्वास, बेहतर सड़कों और यातायात निषेधाज्ञा के संबंध में 2018 में कोर्ट द्वारा दिए गए विभिन्न निर्देशों का आज तक पालन नहीं किया गया। याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि अहमदाबाद पुलिस आयुक्त ने इस मुद्दे को हल करने के लिए एक अधिसूचना जारी की है। जबकि, अहमदाबाद के बाहर के क्षेत्रों के लिए इसे नगर निगमों और राज्य सरकार को देखना होगा।

सरकारी वकील मनीषा लवकुमार ने इस दौरान दलील दी कि मवेशी अतिचार अधिनियम और बॉम्बे पुलिस अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा, ”हमने भारी वाहनों के आवागमन वाले क्षेत्रों में पशु-मुक्त क्षेत्र भी दिए हैं।” हालांकि, कोर्ट ने कहा कि कानून के क्रियान्वयन में ढिलाई बरती गई है। बेंच ने कहा कि कानून तो बन गया, लेकिन उस पर अमल नहीं हो सका।

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