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मुसलमान एक से ज्‍यादा शादी करता है तो जुर्म नहीं: हाईकोर्ट

अगर कोई मुसलमान एक से ज्‍यादा शादी करता है तो उस पर भारतीय अपराध संहिता (आईपीसी) के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। यह फैसला गुजरात हाईकोर्ट ने दिया है।

Author नई दिल्ली | November 6, 2015 12:53 PM
गुजरात हाई कोर्ट। (तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मकता के लिए)

अगर कोई मुसलमान एक से ज्‍यादा शादी करता है तो उस पर भारतीय अपराध संहिता (आईपीसी) के तहत मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। यह फैसला गुजरात हाईकोर्ट ने दिया है। कोर्ट ने इसकी वजह यह बताई है कि इस्‍लामी कानून के तहत एक से ज्‍यादा शादी की इजाजत है। हालांकि, अदालत का यह भी कहना है कि ‘एक से ज्‍यादा शादी करना अपवाद ही हो सकता है, नियम नहीं।’

कोर्ट का आदेश रायपुर के जफर अब्‍बास रसूल मोहम्‍मद मरचेंट की अपील पर आया है। उनकी पहली पत्‍नी सजीदा बानो ने उनके खिलाफ एफआईआर कराई थी।

भावनगर की सजीदा ने 2001 में विवाद होने पर शौहर को छोड़ दिया था। बाद में रसूल ने दूसरा निकाह कर लिया। इस पर सजीदा ने आईपीसी की धारा 494 (एक से ज्‍यादा शादी करना) और 498 ए (दहेज उत्‍पीड़न व घरेलू हिंसा) समेत आईपीसी की कई धाराओं के तहत मुकदमा किया। उन्‍होंने दलील दी कि उन्‍हें तलाक दिए बिना रसूल ने दूसरी शादी कर गुनाह किया है।

रसूल ने 2010 में हाईकोर्ट में एफआईआर खारिज करने का आदेश देने की अपील की। उन्‍होंने दलील दी कि इस्‍लाम में एक से ज्‍यादा शादी जायज है। लिहाजा आईपीसी की धारा 494 उन पर लागू नहीं होती। जस्टिस जे.बी. परदीवाल ने पुलिस को यह धारा हटाने का आदेश दिया।

 

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