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गुजरात सरकार गोरक्षा समितियों को भंग करे: प्रकाश करात

प्रकाश करात ने कहा कि गुजरात की घटना ने भाजपा और आरएसएस के सावधानीपूर्वक गढ़े गए दलित प्रेम का पर्दाफाश कर दिया है।

Author नई दिल्ली | July 21, 2016 7:52 PM
सीपीएम नेता प्रकाश करात।

गुजरात के ऊना में दलितों की पिटाई के मामले पर भाजपा को आड़े हाथ लेते हुए माकपा ने गुरुवार को गुजरात सरकार से कहा कि वह गोरक्षा समितियों को भंग करे और ‘‘दलित-विरोधी’’ एवं ‘‘मुस्लिम-विरोधी’’ भावनाएं भड़का रहे उन्मादी सांप्रदायिक संगठनों पर सख्त कार्रवाई करे।

माकपा के पूर्व महासचिव प्रकाश करात ने कहा, ‘‘ऊना की घटना में शामिल दोषियों की गिरफ्तारी ही राज्य सरकार के लिए काफी नहीं है । उसे गोरक्षा समितियों को भंग करना चाहिए और ऐसे उन्मादी सांप्रदायिक संगठनों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए जो दलित-विरोधी और मुस्लिम-विरोधी भावनाएं भड़का रहे हैं ।’’

करात ने पार्टी के मुखपत्र ‘पीपुल्स डेमोक्रेसी’ के आगामी अंक के संपादकीय में यह बातें लिखी हैं। ऊना में दलित युवकों की सरेआम पिटाई की घटना की तुलना 2012 में हरियाणा के झज्जर में पांच दलित पुरूषों को पीट-पीटकर मार डालने की ‘‘बर्बर’’ घटना से करते हुए करात ने कहा कि हाल के महीनों में देश के कई हिस्सों में मवेशियों एवं चमड़े के व्यापार में शामिल मुस्लिमों और दलितों पर हमले हुए हैं।

करात ने दावा किया कि गोरक्षा समितियां मुस्लिमों और दलितों के खिलाफ उन्मादी कार्रवाई करती है । उन्होंने दादरी में मोहम्मद अखलाक की हत्या और झारखंड में दो पशु व्यापारियों को फंदे से लटका देने की घटनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये दोनों इसके ‘‘स्तब्ध’’ करने वाले उदाहरण हैं।  मार्क्सवादी नेता ने यह भी कहा कि गुजरात की घटना ने भाजपा और आरएसएस के ‘‘सावधानीपूर्वक गढ़े गए दलित प्रेम’’ का पर्दाफाश कर दिया है।

करात ने कहा, ‘‘भाजपा की केंद्र सरकार ने डॉ. बी आर अंबेडकर की 125वीं जयंती मनाने के लिए बड़ा भव्य आयोजन किया था। लेकिन दूसरी ओर, महाराष्ट्र की भाजपा सरकार ने मुंबई के दादर इलाके में स्थित उस ऐतिहासिक इमारत को गिरवा दिया जिसमें कभी डॉ. अंबेडकर का दफ्तर था।’’

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