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RSS के कार्यक्रम में पहुंचे गुजरात के गवर्नर, संघ नेता दत्तोपंत ठेंगड़ी को बताया ‘महापुरुष’

दत्तोपंत ठेंगड़ी महाराष्ट्र के वर्धा में पैदा हुए थे। वह एक हिंदू विचारक और ट्रेड यूनियन से जुड़े नेता थे। ठेंगड़ी ने BKS, MKS, स्वदेशी जागरण मंच की स्थापना और आखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की सह-स्थापना की।

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत। (फाइल फोटो सोर्स: द इंडियन एक्सप्रेस)

गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने रविवार को आरएसएस से जुड़े कई संगठनों के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी की 100वीं जयंती के मौके पर गांधीनगर में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्हें “महापुरुष” की संज्ञा दी। कार्यक्रम में लोगों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा, “मुझे कई बार ठेंगड़ी के साथ काम करना पड़ा, क्योंकि मैं 10 साल तक हरियाणा में BKS (भारतीय किसान यूनियन) का अध्यक्ष था। इस दौरान वह हम किसानों का मार्गदर्शन किया करते थे।”

राज्यपाल ने आगे कहा, “ठेंगड़ी कोई आम इंसान नहीं थे, बल्कि वह ‘महापुरुष’ थे। साधारण लोग उसी मार्ग का अनुसरण करेंगे, जो उनके पूर्वजों द्वारा उनके लिए पहले से निर्धारित किया गया है, जबकि महान व्यक्ति अपने गुणों के साथ एक नया मार्ग बनाता है और दूसरे भी उसका अनुसरण करते हैं।उन्हीं गुणों का उपयोग करते हुए ठेंगड़ी ने मात्र चार संगठनों की ही स्थापना नहीं की, बल्कि जीवन भर उनकी देखरेख और मार्गदर्शन किया। वह जबरदस्त शख्सियत, लेखक और एक बेहद कुशल संगठन संचालक थे।”

गौरतलब है कि दत्तोपंत ठेंगड़ी महाराष्ट्र के वर्धा में पैदा हुए थे। वह एक हिंदू विचारक और ट्रेड यूनियन से जुड़े नेता थे। ठेंगड़ी ने भारतीय किसान यूनियन (BKS), मजदूर किसान संघ (MKS), स्वदेशी जागरण मंच की स्थापना और आखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की सह-स्थापना की। ये सारे संगठन संघ की विचारधारा से जुड़े हुए हैं।

गौरतलब है कि गांधीनगर में इस कार्यक्रम का आयोजन उन तमाम संगठनों के सौजन्य से था जिनकी स्थापना ठेंगड़ी ने की थी। इस कार्यक्रम में राज्यपाल को विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया था। राज्यपाल ने इस दौरान उन्होंने ठेंगड़ी के चरित्र की तुलना सूरज के प्रकाश से की और उनके द्वारा स्थापित तमाम संस्थाओं के कार्यों की सराहना की।

राज्यपाल के अलावा इस दौरान संघ के पश्चिमी जोन के संघचालक ने कहा, “अपने 75 साल के जीवनकाल में ठेंगड़ी ने 60 साल आरएसएस को समर्पित कर दिए। अपने नेतृत्व कौशल और चुंबकीय व्यक्तित्व के माध्यम से उन्होंने विश्व स्तर पर चार संगठनों के रूप में उन्होंने हिंदुत्व की विचारधारा को अलग ही मुकाम दिया। अक्सर यह कहा जाता था कि ठेंगड़ी साल में 13 महीने और दिन में 25 घंटे काम करते हैं।”

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