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दलित पिटाई मामला: राजनाथ ने संसद में कहा- गुजरात सरकार ने तेजी से कार्रवाई की, कांग्रेस में भी हुए हैं अत्याचार

एक मृत गाय की खाल उतारने को लेकर 11 जुलाई को कुछ दलित युवकों की गुजरात के गिर सोमनाथ जिला स्थित ऊना में कथित तौर पर बुरी तरह पिटाई की गई थी।

Author नई दिल्ली | July 21, 2016 9:03 AM
लोकसभा में राजनाथ सिंह। (फाइल फोटो-लोकसभा टीवी)

गुजरात में एक मृत गाय की खाल उतारने को लेकर दलित युवकों की पिटाई के मुद्दे पर केंद्र ने बुधवार (20 जुलाई) को कहा कि राज्य सरकार ने दोषियों के खिलाफ तेजी से और प्रभावी कार्रवाई की है और अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। पीड़ितों के लिए मुआवजे की घोषणा की गई है और मामले की जांच के लिये राज्य सरकार विशेष अदालत गठित करने पर भी विचार कर रही है।

घटना की तीखी निंदा करते हुए गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी घटना के बारे में जानने के बाद बहुत दुखी और आहत हुए हैं। लेकिन साथ ही उन्होंने कांग्रेस शासन के तहत हुए अत्याचार की घटनाओं के आंकड़ों का जिक्र करते हुए विपक्षी पार्टी पर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि सरकार संसद के दोनों सदनों में चर्चा करने के लिए तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस दलितों पर अत्याचार के मुद्दे का हल करने के प्रति गंभीर नहीं है।

उन्होंने यह दावा करने के लिए आंकड़ों का जिक्र किया कि साल 2001 में नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्य में दलितों के खिलाफ अत्याचार के मामलों में कमी आई। साथ ही, उन्होंने राज्य सरकार की तीव्र और प्रभावी कार्रवाई के लिए सराहना की। बसपा और कांग्रेस सहित कई विपक्षी पार्टियों द्वारा मुद्दा उठाए जाने के बाद वह बोल रहे थे। बसपा और कांग्रेस ने तृणमूल कांग्रेस के साथ लोकसभा में वॉकआउट किया।

सिंह ने कहा, ‘यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। इसकी निंदा करने के लिए कोई शब्द नहीं है लेकिन यह पहला मौका नहीं है जब ऐसे अत्याचार हुए हैं।’ मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार मामले के लिए एक विशेष अदालत गठित किए जाने की योजना बना रही है। ‘मैं राज्य सरकार की तीव्र और प्रभावी कार्रवाई के लिए उसे धन्यवाद देता हूं।’

सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत ने कहा कि राज्य प्रशासन ने इस घटना के सिलसिले में अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। सिंह ने बाद में संसद के बाहर कहा, ‘एक ऐसे समाज में जो न्याय और समानता का समर्थन करता हो, सर्वाधिक वंचित और शोषित तबकों को निशाना बनाने वाले, ऐसे कार्यों के लिए कोई जगह नहीं है। इसकी बजाय हमें हर संभव तरीके से उनकी हिफाजत करने की जरूरत है।’

कांग्रेस के वॉकआउट के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा कि इससे जाहिर होता है कि कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर गंभीर नहीं है।
गहलोत ने संवाददाताओं से कहा, ‘इस मामले में हर आवश्यक कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकार ने बहुत फुर्ती दिखाई है। और मामले में अब तक 17 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। उनके खिलाफ मामले भी दर्ज किए गए हैं। जहां तक मेरे मंत्रालय का सवाल है, हम पीड़ित दलित परिवारों को पांच लाख रूपये का मुआवजा मुहैया करायेंगे।’

गौरतलब है कि एक मृत गाय की खाल उतारने को लेकर 11 जुलाई को कुछ दलित युवकों की गुजरात के गिर सोमनाथ जिला स्थित ऊना में कथित तौर पर बुरी तरह पिटाई की गई थी। इसके बाद राज्य में हिंसक प्रदर्शन हुए जिसमें एक हेड कांस्टेबल मारा गया और राज्य परिवहन की बसों पर हमला किया गया। दलित समुदाय के कुछ सदस्यों ने भी कथित तौर पर आत्महत्या की कोशिश की।

इस मुद्दे पर सूचना एवं प्रसारण मंत्री वेंकैया नायडू ने कहा कि राज्य सरकार इस मामले में हर आवश्यक कदम उठा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मुद्दे पर मगरमच्छ के आंसू बहा रही है और दलितों के लिए अब तक कुछ नहीं किया है।
संवाददाताओं से बात करते हुए बसपा प्रमुख मायावती ने कहा, ‘सिर्फ बसपा ही दलितों को लेकर गंभीर है। जबकि कांग्रेस जैसी पार्टियां भाजपा के साथ ऐसे मुद्दों को दबाने की कोशिश कर रही है।’

विपक्ष ने आरोप लगाया कि अगले साल के विधानसभा चुनाव से पहले साम्प्रदायिक धु्रवीकरण करने के लिए हमले को भाजपा और आरएसएस ने प्रायोजित किया। हालांकि गृह मंत्री ने इस आरोप को खारिज कर दिया। राजनाथ सिंह ने दावा किया, ‘भारत में किसी सरकार ने गरीबों और दलितों के लिए इतना नहीं किया जितना कि मोदी सरकार ने किया है।’ उन्होंने जन धन और स्टार्ट अप इंडिया जैसी योजनाएं गिनाई जो वित्तीय समावेशन के प्रति लक्षित हैं।

उन्होंने राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि साल 2004 में अनुसूचित जाति, जनजाति समेत दलितों के खिलाफ अत्याचार के 32 हजार से अधिक मामले दर्ज किये गए जबकि 2005 में 29 हजार मामले, 2006 में 32 हजार मामले, 2007 में 35 हजार से अधिक मामले, 2008 में 38 हजार से अधिक मामले, 2009 में 34 हजार से अधिक मामले दर्ज किये गए। उन्होंने कांग्रेस के इस दावे को खारिज कर दिया कि ऐसी घटनाओं के पीछे भाजपा का हाथ था।

गृह मंत्री ने कहा, ‘मैं सभी राजनीतिक दलों से अनुरोध करता हूं कि वे ऐसे अत्याचार मिटाने के लिए खुद को प्रतिबद्ध करें।’
उन्होंने कहा कि यह विडंबना है कि कमजोर तबके को निशाना बनाने वाली ऐसी घटनाएं देश की आजादी के इतने बरसों बाद भी हो रही हैं। ‘यह एक सामाजिक समस्या है। यह एक सामाजिक बुराई है।’

वहीं, माकपा ने इस घटना की निंदा करते हुए राज्य की भाजपा सरकार से दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही, गो रक्षा समितियों की गतिविधियों पर कार्रवाई की भी मांग की। पार्टी ने इसे उन्मादी साम्प्रदायिक संगठन बताया। पार्टी ने एक बयान में कहा कि उच्च्ना हमले ने एक बार फिर से तथाकथित गौ रक्षा समितियों की भूमिका को उजागर कर दिया है जो कुछ और नहीं बल्कि उन्मादी साम्प्रदायिक संगठन है जो पशुओं के व्यापार और मृत पशु की खाल उतारने के काम में शामिल मुसलमानों और दलितों को निशाना बनाता है।

इस बीच, अहमदाबाद से प्राप्त खबर के मुताबिक ऊना घटना को लेकर गुजरात में विरोध प्रदर्शन तेज हो गया है। राज्य के कई स्थानों से हिंसा की घटनाएं होने की खबरें हैं। समुदाय के गुस्साए सदस्यों ने कस्बों और शहरों में रैलियां निकली, सड़कों की नाकेबंदी कर दी, बसों को क्षतिग्रस्त कर दिया और यहां तक कि एक ट्रेन भी सुरेंद्रनगर जिले के वाधवन के पास रोक दी।
मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल राजकोट अस्पताल जा कर पीड़ितों से और ऊना में उनके परिवार के सदस्यों से मिली तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

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