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पाटीदार आरक्षण पर कांग्रेस का फार्मूला हमें मंजूर, बीजेपी के खिलाफ लड़ाई जरूरी: हार्दिक पटेल

Gujarat Election 2017, Hardik Patel: गुजरात में नौ दिसंबर और 14 दिसंबर को विधान सभा चुनाव के लिए मतदान होना है। चुनाव नतीजे 18 दिसंबर को आएंगे।

गुजरात के पाटीदार नेता हार्दिक पटेल। (फाइल फोटो)

पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (पीएएसएस) नेता हार्दिक पटेल ने बुधवार (22 नवंबर) को अहमदाबाद में पत्रकारों से कहा कि उनके संगठन और कांग्रेस के बीच पाटीदार समाज को आरक्षण दिए जाने के फार्मूले पर सहमति बन गयी है। पटेल ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) दो दशकों से अधिक समय से राज्य की सत्ता में है और उसके खिलाफ लड़ाई लड़नी जरूरी है। पटेल ने पत्रकारों से कहा कि उन्होंने विधान सभा चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस के साथ कोई सौदा नहीं किया है। पटेल ने आरोप लगाया कि बीजेपी उनके साथियों को 50-50 लाख रुपये के ऑफर देकर तोड़ने की कोशिश कर रही है। गुजरात में अगले महीने विधान सभा चुनाव हैं। गुजरात में नौ दिसंबर और 14 दिसंबर को विधान सभा चुनाव के लिए मतदान होना है। चुनाव नतीजे 18 दिसंबर को आएंगे। राज्य में कुल 182 विधान सभा सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए 92 सीटो पर चुनाव जीतना जरूरी होगा। राज्य में पिछले दो दशकों से ज्यादा समय से भारतीय जनता पार्टी सत्ता में है। साल 2012 के विधान सभा चुनाव में बीजेपी को 116 सीटें मिली थीं।

हार्दिक पटेल ने कहा कि वो ढाई साल तक किसी भी राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ेंगे। पटेल ने कहा कि वो बीजेपी से लड़ाई लड़ेंगे क्योंकि उसने पाटीदार समाज पर अत्याचार किया। पटेल ने कहा कि कांग्रेस को वो खुलकर समर्थन नहीं कर रहे हैं लेकिन वो बीजेपी के खिलाफ लड़ रहे हैं तो ये एक तरह से कांग्रेस का समर्थन है। पटेल ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने उन्हें आश्वास्त किया है कि चुनाव में जीत के बाद पाटीदार समाज को उचित प्रतिनिधित्व मिलेगा।

बीजेपी पिछले तीन विधान सभा चुनाव नरेंद्र मोदी को मुख्यमंत्री पद का चेहरा बनाकर चुनाव लड़ी थी। साल 2002, 2007 और 2012 में बीजेपी ने जीत हासिल की थी। साल 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री और अमित शाह के बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन जाने के बाद पहली बार राज्य में विधान सभा चुनाव हो रहा है। नरेंद्र मोदी की जगह आनंदीबेन पटेल मुख्यमंत्री बनी थीं लेकिन उन्हें बीच में ही हटाकर विजय रुपाणी को राज्य का सीएम बनाया गया। गुजरात पिछले दो सालों में पाटीदार आंदोलन और दलित आंदोलन के कारण चर्चा में रहा है। आनंदीबेन को पद से हटाए जाने के पीछे इन आंदोलनों को रोकने में विफल रहने को प्रमुख वजह माना गया था।

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