गुजरात में आर्थिक रूप से पिछड़ों को 10 फीसद आरक्षण का एलान - Jansatta
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गुजरात में आर्थिक रूप से पिछड़ों को 10 फीसद आरक्षण का एलान

पटेल आरक्षण आंदोलन के दबाव के मद्देनजर गुजरात की भाजपा सरकार ने सामान्य वर्ग में पाटीदारों सहित आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए 10 फीसद आरक्षण की शुक्रवार को घोषणा की।

Author अमदाबाद/गांधीनगर | April 30, 2016 2:05 AM
गुजरात सीएम आनंदीबेन पटेल

पटेल आरक्षण आंदोलन के दबाव के मद्देनजर गुजरात की भाजपा सरकार ने सामान्य वर्ग में पाटीदारों सहित आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए 10 फीसद आरक्षण की शुक्रवार को घोषणा की। इस घोषणा के अनुसार छह लाख रुपए से कम वार्षिक आय वाले परिवार आरक्षण के पात्र होंगे। हालांकि हार्दिक पटेल नीत संगठन ने इस घोषणा को खारिज कर दिया है। विपक्षी कांग्रेस ने कहा कि आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए 10 फीसद आरक्षण की घोषणा ‘धोखा’ है और यह पटेल समुदाय को शांत करने की कोशिश है।

यह फैसला भाजपा की राज्य इकाई के कोर ग्रुप की बैठक में लिया गया जिसमें भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी शामिल हुए। यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब पार्टी स्थानीय निकाय के हाल के परिणामों के कारण चिंतित है। राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इस फैसले से सुप्रीम कोर्ट से तय की गई 50 फीसद की आरक्षण सीमा का उल्लंघन होगा लेकिन राज्य सरकार ने कहा कि वह इस मुद्दे को लेकर ‘गंभीर’ है और इसके लिए कानूनी रूप से ‘लड़ेगी’। भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष विजय रुपाणी ने सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के लिए 10 फीसद आरक्षण की घोषणा की। घोषणा के समय मुख्यमंत्री आनंदीबेन पटेल और वरिष्ठ मंत्री नितिन
पटेल भी मौजूद थे।

रुपाणी ने संवाददाताओं से कहा-राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की अध्यक्षता में कोर ग्रुप की हमारी बैठक में सामान्य वर्ग में आर्थिक रूप से पिछडेÞ लोगों के लिए 10 फीसद आरक्षण दिए जाने का फैसला किया गया। उन्होंने कहा- अधिसूचना एक मई को गुजरात राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर जारी की जाएगी और सामान्य वर्ग के ईबीसी आगामी अकादमिक वर्ष से शिक्षा व नौकरियों में आरक्षण का लाभ लेने में सक्षम होंगे। उन्होंने कहा- छह लाख रुपए या इससे कम वार्षिक आय वाले परिवार इस आरक्षण के पात्र होंगे। इसका अर्थ यह हुआ कि प्रतिमाह 50,000 रुपए तक की आय वाले लोग इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।

सरकार ने जिस आरक्षण की घोषणा की है वह सुप्रीम कोर्ट से आरक्षण के लिए तय 50 फीसद की सीमा से अधिक होगा। राज्य सरकार पहले की एससी/ एसटी और ओबीसी को 50 फीसद आरक्षण मुहैया कराती है। यह पूछने पर कि यह नई घोषणा कानूनी आधार पर टिक पाएगी या नहीं,रुपाणी ने कहा- हम इसे लेकर बहुत गंभीर हैं और हम सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों के आरक्षण के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे।
उधर गांधीवगर से मिली खबरों के मुताबिक अपनी शुरुआती प्रतिक्रिया में आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल के पाटीदार अनामत आंदोलन समिति ने इस कदम को भाजपा और राज्य सरकार द्वारा उनके समुदाय को ‘गुमराह’ करने के लिए एक और ‘लॉलीपॉप’ बताकर खारिज कर दिया। हालांकि आरक्षण के लिए आंदोलन करने वाले एक अन्य संगठन सरदार पटेल समूह (एसपीजी) ने सरकार की इस पहल का स्वागत किया। लेकिन साथ ही उसने यह भी कहा कि इस योजना से पटेल समुदाय को कितनी और किस हद तक मदद मिलेगी, वे इसका आकलन करेंगे। विपक्षी कांग्रेस ने भी कहा कि आर्थिक रूप से पिछड़ों के लिए 10 फीसद आरक्षण की घोषणा ‘धोखा’ है और यह पटेल समुदाय को शांत करने की कोशिश है।

सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है जब भाजपा को नगर निकाय चुनावों में नुकसान झेलना पड़ा था और इस राज्य में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। भाजपा सरकार हार्दिक पटेल और लालजी पटेल के नेतृत्व में संख्या व सामाजिक स्थिति के आधार पर मजबूत पटेल समुदाय के हिंसक विरोध प्रदर्शनों से जूझ रही है। पटेल समुदाय ओबीसी श्रेणी के तहत शिक्षा व सरकारी नौकरियों में आरक्षण की मांग कर रहा है। भाजपा को हाल में हुए ग्रामीण स्थानीय निकाय चुनावों में भारी नुकसान हुआ है जिसके लिए पटेल आरक्षण आंदोलन को जिम्मेदार माना जा रहा है।

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