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माहवारी के वक़्त अलग रखते थे, इस बार 66 लड़कियों के कपड़े उतरवाए, माफीनामा भी लिखवाया- प्रिंसिपल पर केस

छात्राओं और अधिकारियों ने पुष्टि की है कि संस्थान ने एक भेदभावपूर्ण प्रथा का पालन किया है जिसमें जिन लड़कियों को मासिक धर्म होता है उन्हें अलग रखा जाता है।

Author Edited By सिद्धार्थ राय नई दिल्ली | Updated: February 15, 2020 1:27 PM
भुज में श्री सहजानंद बालिका संस्थान। (Express)

गुजरात के भुज में श्री सहजनानंद महिला संस्थान की 66 लड़कियों के प्रदर्शन के बाद संस्थान की प्रिंसिपल रीता रानींगा, हॉस्टल कॉर्डिनेटर अनीता चौहान, हॉस्टल सुपरवाइज़र रमीलाबेन और चपरासी नयनबेन पर यौन उत्पीड़न, वसूली और आपराधिक धमकी का मामला दर्ज किया गया है। छात्राओं और अधिकारियों ने पुष्टि की है कि संस्थान ने एक भेदभावपूर्ण प्रथा का पालन किया है जिसमें जिन लड़कियों को मासिक धर्म होता है उन्हें अलग रखा जाता है। लेकिन यह पहली बार है जब उन्हें कपड़े उतारने पर मजबूर किया गया।

पुलिस अधीक्षक कच्छ (पश्चिम) सौरभ टोलुम्बिया ने द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि हमारी महिला पुलिस स्टेशन की एक टीम एक महिला काउंसलर के साथ वहां गई थी। काउंसलिंग के बाद, एक छात्रा ने शिकायत दर्ज की कि उन्हें न केवल कपड़े उतारने पर मजबूर किया बल्कि उनसे माफ़ीनामा भी लिखवाया गया था। उस शिकायत के आधार पर, हमने आईपीसी सेक्शन 354-A (यौन उत्पीड़न), 384 (जबरन वसूली), 506 (2) (आपराधिक धमकी) मामला दर्ज़ किया है।

संस्थान और छात्रावास दोनों भुज के स्वामीनारायण संप्रदाय द्वारा चलाए जाते हैं। कॉलेज आर्ट्स, विज्ञान और वाणिज्य और प्रमाणपत्र पाठ्यक्रमों में स्नातक पाठ्यक्रम प्रदान करता है। कॉलेज के स्नातक छात्रों ने गुरुवार को आरोप लगाया था कि कॉलेज की प्रिंसिपल, हॉस्टल सुपरवाइज़र, कॉर्डिनेटर और चपरासी ने 68 छात्रों से ये जानने की कोशिश की क्या उन्हें माहवारी हो रही है। दो छात्राओं ने बताया कि कॉलेज स्टाफ एक-एक करके छात्राओं को वाशरूम में ले गए फिर वहां उनके कपड़े उतरवाकर इसकी जांच कराई गई।

कॉलेज प्रशासन ने कार्रवाई को सही ठहराते हुए कहा कि छात्राओं को अपने मासिक धर्म के दौरान कॉलेज के इस नियम का पालन करना पड़ता है। कुछ हफ्ते पहले, लड़कियों को कथित तौर पर छात्रावास द्वारा बनाए गए रजिस्टर में उनके मासिक धर्म चक्र के विवरण दर्ज करने के लिए कहा गया था।


द इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए, छात्राओं ने कहा कि 11 फरवरी को स्ट्रिप करने से पहले प्रबंधन ने लड़कियों से व्यक्तिगत “माफी पत्र” पर हस्ताक्षर कराये, जिसमें उन्हें अपने मासिक धर्म की मासिक तिथियों का उल्लेख करने के लिए मजबूर किया गया था। छात्राओं का कहना है कि संस्था ने उन्हें बताया कि उनके मासिक धर्म चक्र की तारीखें छात्रावास में रखे गए एक रजिस्टर में मैंटेन की जाएगी, इस रजिस्टर में लड़कियों को हर महीने होने वाले मासिक धर्म की मासिक तिथियों का खुलासा करना होगा।

एक छात्रा ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया ‘हॉस्टल में उनका एक रजिस्टर है, जिसमें हर लड़की को अपना पीरियड शुरू होने के बाद हर बार अपना नाम लिखना होता है। फिर उस लड़की को अपने छात्रावास के कमरे को छोड़ना होता है और छात्रावास की इमारत के बेसमेंट में एक मंद रोशनी वाले कमरे में अलग-थलग रहने के लिए कहा जाता है, जिसमें दूसरों से कोई संपर्क नहीं होता है। उसे इस दौरान अपने कमरे या डाइनिंग हॉल में जाने या संस्था में प्रार्थनाओं में भाग लेने की अनुमति नहीं होती। अगर उसे अपने कमरे से कुछ चाहिए, तो वह अपने रूममेट को अलग-थलग कमरे के दरवाजे पर छोड़ने के लिए कह सकती है। उसे अलग बर्तन में भोजन दिया जाता है और उसे डाइनिंग हॉल की लॉबी में बैठकर भोजन करना होता है।

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