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कारोबार: कोरोना से बाजार प्रभावित, बाहर के व्यापारियों का दिल्ली से परहेज

व्यापारियों को उम्मीद थी कि कोरोना काल के दौरान बाजार में आई मंदी की भरपाई दिवाली के बाजार में होगी। लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी बिक्री के लक्ष्य पाए नहीं जा सके। व्यापार संघों को 50 फीसद तक ही भरपाई की उम्मीद है।

धनतेरस पर बाजार में ज्‍वेलरी खरीदते लोग। फाइल फोटो।

दिल्ली में बढ़ते कोरोना के मामलों ने यहां के बाजारों को सीधे प्रभावित किया है। सदर के थोक व्यापारियों का कहना है कि इस बार बाहर के व्यापारियों ने दिल्ली से परहेज कर लिया है। बीस फीसद भी नए ग्राहक थोक कारोबार के लिए दिल्ली नहीं पहुंचे। उदास व्यापारियों के लिए खुदरा कारोबार के लिए अगले 48 घंटे अहम हंै।

व्यापारियों को उम्मीद थी कि कोरोना काल के दौरान बाजार में आई मंदी की भरपाई दिवाली के बाजार में होगी। लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी बिक्री के लक्ष्य पाए नहीं जा सके। व्यापार संघों को 50 फीसद तक ही भरपाई की उम्मीद है।

दिल्ली में छठ पर बाहर घाटों तक निकलने पर लगी पाबंदी ने कपड़े व्यापारियों को मायूस किया है। इससे व्यापार के और गिरने की आशंका लगाई गई है। इसके अलावा पटरी के दुकानदारों पर पुलिसिया और निगम की कमेटी की कार्रवाई ने भी बाजार को प्रभावित किया है। सभी प्रमुख बाजारों से पटरीवालों को हटा दिया गया है। बाजारों में जान फूंकने की लगातार कोशिशें जारी हैं, लेकिन कोरोना की मार और मंदी की तस्वीर साफ दिख रही है। दुकानों में पुराना माल ज्यादा है।

सीटीआइ चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि कोरोना से अर्थव्यवस्था पर पूरी तरह विराम लग गया था और कोरोना की सबसे अधिक मार व्यापारियों पर पड़ी थी। केंद्र और दिल्ली सरकार की ढील के बाद धीरे-धीरे काम पटरी पर लौटने लगा।

अब इलेक्ट्रॉनिक्स, मिठाई, नमकीन, ड्राइफ्रूट्स, क्रॉकरी, होम फर्नीशिंग, सजावटी सामान, कपड़े, जैसे कुछ क्षेत्रों में थोड़ी तेजी आई है।फेडेरेशन आॅफ सदर बाजार ट्रेडर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा ने कहा कि बढ़ते कोरोना संक्रमण ने दिल्ली की छवि गिरा दी।

कनाट प्लेस स्थित पालिका बाजार एसोसिएशन के प्रधान दर्शन लाल कक्कड़ का कहना है कि कोरोना से पूरे एहतिहात बरते जा रहे हंै, लेकिन व्यापार लगभग ठप है। दूसरी ओर एनडीएमसी की ओर से किराया का दबाव बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने खरीद-बिक्री पर कहा कि लोग आ तो जरूर रहे हैं, लेकिन खरीदारी नाममात्र की कर रहे हैं।

महासचिव विनय ठाकुर का कहना है कि यह दीवाली अब तक की सबसे बुरी दिवाली है। यहां के व्यापारियों का छह-छह महीने का किराया बकाया है। सीटीआइ अध्यक्ष सुभाष खंडेलवाल ने कहा कि दीपावली के बाद प्रमुख कारोबारी संस्थाओं और व्यापारी नेताओं के साथ वर्चुअल बैठक की जाएगी।

दीपावली पर 50 फीसद तक ही भरपाई की उम्मीद

प्रमुख व्यापारी संगठन चैंबर आॅफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआइ) का आकलन है कि दीपावली के अवसर पर दिल्ली में कोरोना से टूटे व्यापार का 50 फीसद तक की ही भरपाई हो सकती है। हालांकि यह भी व्यापारियों के लिए संतोषजनक माना जा सकता है।

अगला 48 घंटा महत्त्वपूर्ण है। बाजारों में भीड़ बढ़ रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि खरीदारी भी बढ़े। कोरोना की वजह से हुए भारी नुकसान की कुछ हद तक भरपाई होगी।

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