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‘रेडिएशन से बचाएगा गाय का गोबर’, कामधेनु आयोग के दावे पर वैज्ञानिकों ने उठाए सवाल

वैज्ञानिकों ने कहा कि जिस शोध के बारे में कथीरिया ने जिक्र किया था उस शोध में कई पहलुओं को छोड़ दिया गया है।

cow, dungसांकेतिक तस्वीर।

भारतीय वैज्ञानिकों के एक समूह ने केंद्र सरकार की एक एजेंसी के उस दावे कि निंदा की है जिसमें कहा गया था कि गाय के गोबर से रेडिएशन को खतरे को कम किया जा सकता है। गाय के गोबर को “एंटी-रेडिएशन” बताते हुए, राष्ट्रीय कामधेनु अयोग (आरकेए) के अध्यक्ष वल्लभभाई कथीरिया ने पिछले साल अक्टूबर में गाय के गोबर से बनी एक “चिप” लॉन्च की थी। इस चिप के लिए दावा किया गया था कि इस चिप से मोबाइल हैंडसेट से निकलने वाले रेडिएश में काफी कमी आएगी। गुजरात के सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी में भौतिकी वैज्ञानिकों ने गाय के गोबर पर एक प्रयोग किया था। सोमवार को वैज्ञानिकों ने कहा कि यह शोध इस बात का बेहतरीन उदाहरण है कि वो पूर्व निर्धारित नतीजे पर पहुंच गए।

Homi Bhabha Cent­re for Science Education, Mumbai के खगोल विज्ञानी, Aniket Sule उन वैज्ञानिकों में शामिल हैं जिन्होंने कथीरिया के दावों पर सवाल उठाया था। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कथीरिया ने कहा था गाय के गोबर से सभी की सुरक्षा होती है। यह एंटी रेडिएशन है। अगर इस गोबर को घर लाया जाता है तब पूरा घर इको-फ्रेंडली हो जाएगा, रेडिएशन मुक्त भी होजाएगा। इस विज्ञान ने साबित किया है। इसके बाद कथीरिया ने इस स्पेशल चिप को लॉन्च किया था और कहा कि था आप इसे अपने मोबाइल में रख सकते हैं। उनके मुताबिक यदि आप इस चिप को अपने मोबाइल में रखते हैं, तो यह चिप रेडिएशन को काफी कम कर सकती है। उन्होंने कहा था कि अगर आप बीमारी से बचना चाहते हैं तो इसका इस्तेमाल कीजिए।

यहां आपको बता दें कि कथीरिया के दावे के संबंध में करीब 600 वैज्ञानिकों और विज्ञान के शिक्षकों ने राष्ट्रीय कामधेनु आयोग के अध्यक्ष वल्लभभाई कथीरिया की पहले भी निंदा की थी और उनसे उनके एक्सपेरीमेंट को लेकर सबूत भी मांगा था। सोमवार को वैज्ञानिकों ने कहा कि जिस शोध के बारे में कथीरिया ने जिक्र किया था उस शोध में कई पहलुओं को छोड़ दिया गया है। अपनी शोध में सौराष्ट्र यूनिवर्सिटी के भौतिक विज्ञान के शिक्षकों ने बताया कि यह चिप रेडिएशन को 50 प्रतिशत तक कम करता है। लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि यह चिप किस तरह से रेडिएशन पर काम करता है। क्या होगा जब गाय के गोबर के बजाए ऊंट या खच्चर के गोबर का इस्तेमाल किया जाएगा? बिना किसी तुलनात्मक अध्ध्यन के इस डेटा में सिर्फ रेडिएशन के कम होने की बात कही गई है।

वैज्ञानिकों ने यह भी कहा कि रेडिएशन बहुआयामी होता है सिर्फ एक शोध के जरिए किसी निर्णय पर नहीं पहुंचा जा सकता है। Indian Institute of Science Education and Research, Calcutta के प्रोफेसर सुमित्र बनर्जी का कहना है गाय के गोबर और रेडिएशन के दावे को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता क्योंकि यह केंद्र सरकार की एजेंसी की तरफ से आई है।

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