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पीएम मोदी के ‘कांग्रेस मुक्त’ भारत की असली तस्वीर, चार बीजेपी सरकारों में 23 मंत्रियों का कांग्रेस कनेक्शन

हिमाचल प्रदेश और गुजरात में विधान सभा चुनाव होने हैं। दोनों राज्यों में बीजेपी और कांग्रेस के बीच मुख्य मुकाबला माना जा रहा है।

हिमाचल प्रदेश के विधानसभा चुनाव में उतरे कुल 338 उम्मीदवारों में से 61 उम्मीदवारों (18 प्रतिशत) ने अपने ऊपर आपराधिक मामले घोषित किए हैं।

हिमाचल प्रदेश विधान सभा चुनाव से करीब एक महीने पहले कांग्रेस के विवादित नेता सुखराम और उनके बेटे अनिल शर्मा बीजेपी में शामिल हो गये तो सोशल मीडिया पर छोटा-मोटा भूचाल ही आ गया। लोगों को इससे उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव से पहले कांग्रेस की यूपी इकाई की पूर्व अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी बीजेपी में शामिल होना याद आ गया।। बीजेपी की यूपी में सरकार बनी तो जोशी को मंत्री भी बनाया गया। साल 2014 के लोक सभा चुनाव से पहले बीजेपी और तब उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी ने “कांग्रेस मुक्त भारत” का नारा दिया था। बीते तीन सालों में बीजेपी केंद्र समेत कई राज्यों में कांग्रेस से सत्ता छीन चुकी है। तो क्या सचमुच भारत “कांग्रेस मुक्त” होने की तरफ बढ़ रहा है?

द प्रिंट ने अपनी एक ताजा रिपोर्ट में बीजेपी शासित विभिन्न राज्यों के मंत्रिमंडल की पड़ताल की तो सामने आया कि बीजेपी सरकारों में “पूर्व कांग्रेसी” नेताओं की अच्छी-खासी मौजूदगी है। गोवा जैसे राज्य में तो 11 मंत्रियों में आठ पूर्व कांग्रेसी हैं। द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार असम, गोवा, मणिपुर और उत्तराखंड की बीजेपी सरकारों में कम से कम आधे मंत्री ऐसे हैं जो या तो पूर्व कांग्रेसी हैं या फिर कांग्रेसी के साझीदार दलों के पूर्व नेता रहे हैं। आइए एक नजर डालते हैं कि किस राज्य में बीजेपी में कितने पूर्व कांग्रेसी हैं।

साल 2016 में असम में बीजेपी ने पहली बार सरकार बनायी। बीजेपी की जीत का श्रेय सबसे ज्यादा ऐसे नेता को दिया गया जो चुनाव से पहले ही बीजेपी में आया था। वो नेता थे हेमंत बिस्वा शर्मा। बीजेपी की सरकार बनी तो शर्मा मिनिस्टर भी बने। मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल के बाद वो बीजेपी सरकार में नंबर दो की हैसियत के नेता हैं। शर्मा के अलावा तीन अन्य पू्र्व कांग्रेसी नेता सोनोवाल कैबिनेट में मंत्री हैं।

सैलानियों के प्रिय समुद्र तटीय राज्य गोवा में इसी साल फरवरी-मार्च में यूपी, पंजाब, मणिपुर और उत्तराखंड के साथ चुनाव हुए। नतीजे बीजेपी के लिए निराशाजनक रहे। राज्य में सत्ताधारी बीजेपी बहुमत पाने से वंचित हो गये। कांग्रेस को उससे ज्यादा सीटें मिलीं। राज्य की कुल 40 सीटों में से 14 बीजेपी को और 16 कांग्रेस को मिलीं। हालांकि दूसरे दलों की मदद से बीजेपी गोवा में सरकार बनाने में सफल रही। इसके लिए उसे मनोहर पर्रिकर को रक्षा मंत्री के पद से हटाकर वापस गोवा के मुख्यमंत्री के तौर पर वापस लाना पड़ा। मनोहर पर्रिकर मंत्रिमंडल के कुल 11 मंत्रियों में इस समय आठ मंत्री पूर्व कांग्रेसी या पूर्व सहयोगी रहे हैं।

मणिपुर में भी इसी साल विधान सभा चुनाव हुए थे। राज्य में सत्ताधारी कांग्रेस बहुमत पाने में विफल रही। ओकराम इबोबी सिंह पिछले तीन बार से राज्य के सीएम बनते आ रहे थे लेकिन इस बार उन्हें निराश होना पड़ा। बीजेपी ने दूसरे छोटे दलों के साथ मिलकर राज्य में सरकार बनायी। लेकिन बीजेपी सरकार में राज्य के सीएम बने एन बीरेन सिंह लम्बे समय तक कांग्रेस में रहे हैं। उनके 12 मंत्रियों में से छह पूर्व-कांग्रेसी या पूर्व कांग्रेस सहयोगी रहे हैं।

इसी साल बीजेपी ने उत्तराखंड में सरकार बनायी लेकिन चुनाव से ठीक पहले पार्टी थोक के भाव से कांग्रेसियों को शामिल करके विवाद में आ गयी थी। चुनाव से पहले ही 13 कांग्रेसी विधायकों ने दलबदल करते हुए बीजेपी का दामन थाम लिया। बीजेप की जीत के पीछे पूर्व कांग्रेसियों की बड़ी भूमिका मानी गयी। सरकार बनने के बाद छह पूर्व कांग्रेसी नेता मंत्री बनाये गये।

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