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चैनलों को बैन करने के कारणों पर हुई सरकार की किरकिरी, जावड़ेकर बोले- पीएम भी चिंतित थे

दोनों चैनलों से प्रतिबंध सरकार ने यह कहते हुए वापस लिया कि वह प्रेस की स्वतंत्रता का समर्थन करती है। इस फैसले के बाद एशियानेट न्यूज शनिवार को दोपहर 1 बजे वापस आ गया, वहीं मीडिया वन न्यूज ने सुबह 9.30 बजे टेलीकास्ट शुरू किया।

केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर। (indian express)

दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा को लेकर की गई रिपोर्टिंग के संबंध में दो मलयालम समाचार चैनलों पर सरकार ने 48 घंटे का प्रतिबंध लगा दिया था, जिसे सरकार ने शनिवार को वापस ले लिया। दोनों चैनलों से प्रतिबंध सरकार ने यह कहते हुए वापस लिया कि वह प्रेस की स्वतंत्रता का समर्थन करती है। इस फैसले के बाद एशियानेट न्यूज शनिवार को दोपहर 1 बजे वापस आ गया, वहीं मीडिया वन न्यूज ने सुबह 9.30 बजे टेलीकास्ट शुरू किया।

पुणे में द संडे एक्सप्रेस से बात करते हुए, केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि दो टेलीविजन चैनलों ने प्रसारण आचार संहिता का उल्लंघन किया था, लेकिन उन्हें जारी किए गए नोटिस का ठीक से उल्लेख नहीं किया गया था। जावड़ेकर ने कहा कि केंद्र ने मलयाली भाषा के दो समाचार चैनलों पर लगाया गया 48 घंटे का प्रतिबंध शनिवार को हटा लिया। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार प्रेस की स्वतंत्रता का समर्थन करती है। सूचना और प्रसारण मंत्री ने कहा कि वह इस मामले को देखेंगे और जरूरत पड़ने पर आदेश जारी करेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस पूरे मुद्दे पर चिंता जाहिर की है।

केबल टीवी नेटवर्क (विनियम) अधिनियम, 1995 के उल्लंघनों का हवाला देते हुए दो अलग-अलग आदेशों जारी किए गए। इन आदेशों में प्रतिबंध का कारण “एक विशेष समुदाय के प्रति पक्ष लेना” और “दिल्ली पुलिस और आरएसएस के प्रति आलोचनात्मक” होने को बताया गया है।

एशियानेट न्यूज और मीडिया वन पर शुक्रवार को 48 घंटे का प्रतिबंध लगा दिया गया था। यह रोक ऐसी खबरों को लेकर लगाई गई थी जो देश में ‘‘सांप्रदायिक विद्वेष को बढ़ावा दे सकती हैं।” जावड़ेकर ने कहा, “केरल के दो चैनलों के प्रसारण पर 48 घंटे का प्रतिबंध लगाया गया था। हमने तुरंत पता लगाया कि असल में क्या हुआ और इसलिए हमने तुरंत चैनलों का प्रसारण फिर से शुरू कर दिया।” मंत्री ने बताया कि एशियानेट न्यूज का प्रसारण शुक्रवार रात से बहाल कर दिया गया जब उसके मालिक ने उनसे बात की और मीडिया वन का प्रसारण शनिवार की सुबह शुरू किया गया।

उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि प्रेस की स्वतंत्रता किसी लोकतांत्रिक ढांचे में अत्यंत आवश्यक है और यही मोदी सरकार की प्रतिबद्धता है।” आपातकाल का संदर्भ देते हुए जावड़ेकर ने कहा कि उन दिनों प्रेस की स्वतंत्रता का दमन किया गया था। साथ ही उन्होंने कहा, “हम उसके खिलाफ जेल गए और हमने प्रेस की स्वतंत्रता बहाल रखी।” उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पूरे मुद्दे पर चिंता जाहिर की है।

मंत्री ने कहा, “मैं निश्चित तौर पर मामले की गहराई तक जाऊंगा और कुछ गलत हुआ होगा तो जरूरी कदम उठाऊंगा। लेकिन मैं आपको यह भी बता दूं कि हर किसी को यह स्वीकार करना चाहिए कि स्वतंत्रता के साथ कुछ जिम्मेदारी भी होती है।” जावड़ेकर ने कहा कि न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन (एनबीए) के अध्यक्ष रजत शर्मा के साथ बात करने के बाद संगठन की राय मांगी गई है। उन्होंने कहा, “हमने उनका नजरिया मांगा है ताकि हम सही कदम उठा सकें। मुझे इस बात का पूरा भरोसा है कि मीडिया जिम्मेदारी से स्वतंत्रता का लाभ लेगा।”

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