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GOOD NEWS: दिवाली तक बाजार में आ जाएगी डायबिटीज, निमोनिया और हाइपरटेंशन की सस्‍ती दवा

डायबिटीज, निमोनिया और हाइपरटेंशन से पीडि़त लोगों के लिए अच्‍छी खबर है। ड्रग प्राइस रेगुलेटर- नेशनल फार्मास्‍यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) करीब 18 नए ब्रांड के प्राइस तय कर दिए हैं, जो कि दिवाली तक बाजार में आ जाएंगे।

Author नई दिल्ली | November 2, 2015 19:46 pm
डायबिटीज, निमोनिया और हाइपरटेंशन से पीडि़त लोगों के लिए अच्‍छी खबर है। ड्रग प्राइस रेगुलेटर- नेशनल फार्मास्‍यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) करीब 18 नए ब्रांड के प्राइस तय कर दिए हैं, जो कि दिवाली तक बाजार में आ जाएंगे।

डायबिटीज, निमोनिया और हाइपरटेंशन से पीडि़त लोगों के लिए अच्‍छी खबर है। ड्रग प्राइस रेगुलेटर- नेशनल फार्मास्‍यूटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (NPPA) करीब 18 नए ब्रांड के प्राइस तय कर दिए हैं, जो कि दिवाली तक बाजार में आ जाएंगे।

NPPA ने जिस ब्रांड्स की दवा के प्राइस फिक्‍स किए हैं, उनमें सिपला, मर्क, फ्रेंको, इंडियन, एलेमबिक फार्मा जैसी फार्मास्‍यूटिकल कंपनियां शामिल हैं।

अगर कोई भी फार्मास्‍यूटिकल कंपनी NPPA की ओर से तय की गई कीमत पर दवा नहीं बेचती है तो ओवरचार्ज डिपोजिट करना पड़ सकता है। इतना ही नहीं, अगर कोई कंपनी दवा बनाना बंद करना चाहती है तो उसे 6 महीने पहले NPPA को सूचना देनी होगी।

ड्रग प्राइस रेगुलटर ने इन दवाओं को ‘ड्रग प्राइस कंट्रोल ऑर्डर’ के रेगुलेशन नंबर 5 (DPCO) के तहत ले आया है। DPCO 2013 को मई 2014 के बाद से लागू किया गया था और तब से अब तक करीब 700 जरूरी दवाएं इसके अंतर्गत लाई जा चुकी हैं।

शरीर में इंसुलिन नाम का हॉर्मोन कम बनने से डायबिटीज होती है. इसमें सबसे आम है टाइप-2 डायबिटीज। इसके बाद है गर्भावस्था के दौरान होने वाली डायबिटीज। भारत में टाइप-1 डायबिटीज उतनी आम नहीं है, लेकिन यह ज्यादातर कम उम्र के लोगों को होती है।

इसके रोगियों को शुरू से इंसुलिन लेना पड़ता है। खून में शुगर का स्तर ज्यादा बढ़ने से वजन घटना शुरू हो जाता है। देश की 10 फीसदी आबादी को टाइप-2 डायबिटीज है। इलाज न करने पर इसके कारण आंखों, गुर्दे और नसों पर असर पडऩे लगता है। ऐसे में लाखों लोगों को लगातार दवा का सेवन करना पड़ता है। अब दवा सस्‍ती होने की खबर से उन्‍हें राहत जरूर मिलेगी।

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