सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस कुरियन जोसेफ की अध्यक्षता में बनाई गई कमेटी ने तमिलनाडु सरकार को अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट को बुधवार को मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने विधानसभा में पेश किया। मुख्यमंत्री ने इसे एक संरचनात्मक सुधार की दिशा में अहम दस्तावेज बताया।

अप्रैल 2025 में गठित इस कमेटी की 387 पन्नों की रिपोर्ट में भाषा नीति, राज्यपाल पद और संविधान से जुड़े कई अहम मुद्दों पर खुलकर चर्चा की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का संघीय ढांचा समय के साथ अत्यधिक केंद्रीकरण की ओर बढ़ गया है, जिससे राज्यों की स्वायत्तता प्रभावित हुई है। देश की राजनीतिक परिपक्वता पूरी तरह से सामने नहीं आ पा रही है।

रिपोर्ट ‘लिबर्टी आर्ग्युमेंट’, ‘डेमोक्रेसी आर्ग्युमेंट’ और ‘इनोवेशन आर्ग्युमेंट’ जैसे सिद्धांतों पर जोर देती है। सबसे बड़ा सुझाव संवैधानिक संशोधनों को लेकर दिया गया है। इसमें कहा गया है कि बड़े संवैधानिक संशोधनों से पहले सभी राज्यों से व्यापक चर्चा होनी चाहिए और जब तक कम से कम दो-तिहाई राज्य अपनी मंजूरी न दें, तब तक ऐसे संशोधनों को लागू नहीं किया जाना चाहिए।

इसी तरह रिपोर्ट में अनुच्छेद 3 में संशोधन की भी सिफारिश की गई है। वर्तमान में संसद को किसी भी राज्य की सीमाओं में बदलाव का अधिकार है, लेकिन कमेटी ने सुझाव दिया है कि इस प्रक्रिया में संबंधित राज्य की सहमति अनिवार्य की जाए और कुछ मामलों में जनमत संग्रह कराने पर भी विचार हो।

भाषा नीति को लेकर भी कई अहम सुझाव दिए गए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि एक भाषा आधारित सोच से बाहर आने की जरूरत है। कमेटी ने अनुच्छेद 343 में संशोधन की सिफारिश करते हुए अंग्रेजी को स्थायी रूप से आधिकारिक भाषा बनाए रखने की बात कही है। साथ ही अनुच्छेद 345 में हिंदी को लेकर किए गए जिक्रों को हटाने की भी मांग हुई है।

राज्यपाल पद को लेकर कमेटी ने सुझाव दिए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई बार राज्यपाल अपने संवैधानिक दायित्वों से इतर कार्य करते दिखाई देते हैं। ऐसे में अनुच्छेद 155 में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है, जिसके तहत राष्ट्रपति राज्य सरकार द्वारा सुझाए गए तीन नामों में से किसी एक को राज्यपाल नियुक्त करें।

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