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पिछले फायनेंशियल ईयर की तुलना में 2019 में गिरा सरकार का हेल्‍थ केयर बजट

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019-21 ने देश के प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य खर्च में मामूली बदलाव के बावजूद पिछले 2015-16 के सर्वेक्षण की तुलना में कई स्वास्थ्य मानकों पर लाभ दर्शाया है।

पिछले फायनेंशियल ईयर की तुलना में 2019 में गिरा सरकार का हेल्‍थ केयर बजट

केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 में हेल्थकेयर पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 1.28 प्रतिशत खर्च किया है, जो वित्त वर्ष 2017-18 के मुकाबले कम है 1.35 प्रतिशत था। वित्त वर्ष 2017-18 में यह आंकड़ा 1.35 फीसदी था। सरकार, लोगों, निजी संस्थाओं और बाहरी वित्त पोषण द्वारा हेल्थकेयर पर खर्च किया गया कुल धन 2018-19 में समाप्त होने वाले पांच वर्षों में सकल घरेलू उत्पाद 3.2% है। पहले यह आंकड़ा 3.9% था। ये आंकड़े सोमवार को जारी किये गए।

सकल घरेलू उत्पाद के अनुपात में गिरावट देश के कुल स्वास्थ्य व्यय में सरकार की हिस्सेदारी में वृद्धि के बावजूद हुई है। 2014-15 में कुल स्वास्थ्य व्यय में सरकार की हिस्सेदारी 29 प्रतिशत थी और 2018-19 में यह 40.6 प्रतिशत तक पहुंच गई। वहीं स्वास्थ्य योजनाओं पर सरकारी खर्च कुल स्वास्थ्य व्यय का 9.6 प्रतिशत है, जबकि पिछले वर्ष यह 9 प्रतिशत था। आयुष्मान भारत को उसी वर्ष (सितम्बर 2018) सितंबर में शुरू किया गया था।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत का प्रति व्यक्ति कुल स्वास्थ्य व्यय 2013-14 में 3,174 रुपये था जो 2016-17 में बढ़कर 3,503 रुपये हो गया। लेकिन इसके बाद 2018-19 में घटकर यह 3,314 रुपये हो गया। सकल घरेलू उत्पाद के संदर्भ में कुल स्वास्थ्य व्यय 2013-14 के मुकाबले 2018-19 में 4 प्रतिशत से घटकर 3.2 प्रतिशत हो गया।

स्वास्थ्य वित्तपोषण पर एक विशेषज्ञ ने नाम न छापने का अनुरोध करते हुए इंडियन एक्सप्रेस से बताया, “भले ही जीडीपी या देश की अर्थव्यवस्था का आकार पांच वर्षों में बढ़ा हो, हम उम्मीद करेंगे कि स्वास्थ्य सेवा पर खर्च या तो बढ़ेगा या बहुत कम स्थिर रहेगा। हालांकि ऐसा नहीं हुआ है। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र की अंडर-फंडिंग सबसे गरीब लोगों को प्रभावित करती है। सार्वजनिक सुविधाओं में खराब बुनियादी ढांचे, एम्स जैसे अस्पतालों में लंबी कतारें, या सुविधा तक पहुंचने के मुद्दों के कारण गरीब का खर्च जेब से बाहर हो जाता है और यहां तक ​​​​कि वह बिना लाइसेंस वाले चिकित्सकों के पास भी जाता है।”

2017-18 की रिपोर्ट में दर्ज की गई 10 प्रतिशत की गिरावट से विशेषज्ञ चिंतित हैं। एक विशेषज्ञ ने कहा, “पॉकेट खर्च में भारी गिरावट के लिए कोई जमीनी स्पष्टीकरण नहीं है, इसलिए हमें कार्यप्रणाली को देखने की जरूरत है। यह गिरावट कई लोगों को चिंतित कर रही है।”

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First published on: 13-09-2022 at 09:19:21 am
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