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चुनाव आयुक्त अशोक लवासा का पुराना रिकॉर्ड खंगालने का आदेश, 11 चीफ विजिलेंस ऑफिसर्स को भेजा गया आदेश

लवासा ने चुनाव आयोग के बहुमत वाले उस फैसले से असहमति जताई थी जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी चीफ अमित शाह को मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन से जुड़ी 5 शिकायतों के मामले में क्लीनचिट दी गई थी।

Author नई दिल्ली | Updated: November 5, 2019 11:02 AM
अशोक लवासा दिसंबर 2013 तक 4 साल के लिए बिजली मंत्रालय में थे। (indian express file)

Election Commissioner Ashok Lavasa: केंद्र ने सरकारी नियंत्रण वाली 11 पीएसयू को लिखा है कि वे अपने रिकॉर्ड्स को खंगालें और यह पता लगाएं कि कहीं चुनाव आयुक्त अशोक लवासा ने विद्युत मंत्रालय में अपने 2009 से 2013 के कार्यकाल के दौरान अपने ‘प्रभाव का अवांछित’ इस्तेमाल तो नहीं किया। यह गोपनीय चिट्ठी 29 अगस्त को जारी की गई है। इसे पावर सेक्रेटरी की ‘रजामंदी’ से सभी पीएसयू के चीफ विजिलेंस ऑफिसरों को भेजा गया है।

चिट्ठी में लिखा है, ‘ऐसा आरोप लगाया गया है कि आईएएस श्री अशोक लवासा ने पावर मिनिस्ट्री में सितंबर 2009 से लेकर दिसंबर 2013 तक बतौर जेएस/अडिशनल सेक्रेटरी/स्पेशल सेक्रेटरी अपने कार्यकाल के दौरान अपने पद के प्रभाव का अवांछित इस्तेमाल किया और कुछ कंपनियों या सहयोगी कंपनियों को फायदा पहुंचाया।’ लेटर के साथ पावर मिनिस्ट्री ने 14 कंपनियों की सूची भी दी है, जो पावर और रिनुएबल एनर्जी सेक्टर से जुड़ी हैं। इन कंपनियों में चुनाव आयुक्त की पत्नी नोवल लवासा ने डायरेक्टर के तौर पर सेवाएं दी हैं।

चिट्ठी में विभिन्न पीएसयू और राज्य सरकारों द्वारा A2Z समूह की कंपनियों को दिए गए 135 प्रोजेक्ट्स की भी सूची है। इसमें नोवल लवासा को 45.8 लाख रुपये के भुगतान की भी जानकारियां हैं। एक अन्य सूची भी है, जिसमें उन 13 बड़े प्रोजेक्ट्स का जिक्र है, जिन्हें विभिन्न राज्य सरकारों ने A2Z वेस्ट मैनेजमेंट लिमिटेड को 2009 से 2011 को दिया था। इस समयावधि में अशोक लवासा पावर मिनिस्ट्री में तैनात थे। जिन पीएसयू को यह चिट्ठी मिली है, उनमें नैशनल थर्मल पावर कारपोरेशन और पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन भी शामिल है।

इस चिट्ठी के बारे में पूछे जाने पर अशोक लवासा ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, ‘मेरे पास कहने के लिए कुछ भी नहीं है क्योंकि मुझे ऐसी किसी बात की कोई जानकारी नहीं है।’ बता दें कि लोकसभा चुनाव के दौरान द इंडियन एक्सप्रेस ने खबर दी थी कि लवासा ने चुनाव आयोग के बहुमत वाले उस फैसले से असहमति जताई थी जिसमें पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी चीफ अमित शाह को मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के उल्लंघन से जुड़ी 5 शिकायतों के मामले में क्लीनचिट दी गई थी। लवासा वरिष्ठता क्रम में मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा के बाद दूसरे नंबर पर हैं। उन्होंने बाद में मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट के मुद्दे पर हुई बैठकों से दूरी बना ली थी।

द इंडियन एक्सप्रेस ने सितंबर में यह खबर भी प्रकाशित की थी कि लवासा की पत्नी समेत उनके परिवार के तीन सदस्य इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की जांच के दायरे में हैं। उन पर आय की घोषणा न करने और आय से अधिक संपत्ति जुटाने आदि के आरोप हैं। लवासा के बेटे अबीर लवासा की कंपनी नॉरिश आर्गेनिक और उनकी डॉक्टर बहन शकुंतला लवासा को इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की ओर से नोटिस मिल चुका है। इन मामलों में सुनवाई चल रही है।

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