केंद्र सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय ने सोमवार को एक बड़ी प्रशासनिक गलती सुधारते हुए उसी दिन जारी की गई राजपत्र (गजट) अधिसूचना वापस ले ली। इस अधिसूचना में गलती से पश्चिम बंगाल की राज्यसभा की तीन सीटों पर हुए उपचुनाव के नतीजों को दोबारा प्रकाशित कर दिया गया था, जबकि इसमें मिजोरम की एक राज्यसभा सीट के चुनाव परिणाम की अधिसूचना जारी होनी थी। यह जानकारी मंगलवार को सरकार और चुनाव आयोग के सूत्रों ने दी।

आपको बता दें कि तृणमूल कांग्रेस छोड़कर जून में भाजपा में शामिल हुए सुष्मिता देव, प्रकाश चिक बराइक और सुखेंदु शेखर राय हाल ही में बीजेपी के टिकट पर राज्यसभा के लिए फिर से निर्वाचित हुए थे। इनके चुनाव परिणाम की अधिसूचना 17 जुलाई को पहले ही जारी की जा चुकी थी। लेकिन सोमवार को मंत्रालय ने तकनीकी गलती से इन्हीं नतीजों को दोबारा प्रकाशित कर दिया। बाद में इसे रद्द कर सही अधिसूचना जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई।

राज्यसभा चुनाव से जुड़ी गलत गजट अधिसूचना वापस

केंद्र सरकार के कानून एवं न्याय मंत्रालय ने सोमवार को राज्यसभा चुनाव से जुड़ी एक गलत गजट अधिसूचना वापस ले ली। मंत्रालय ने पहले मिजोरम की राज्यसभा सीट के चुनाव परिणाम की अधिसूचना जारी की थी लेकिन उसमें गलती से पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों के उपचुनाव के नतीजे दोबारा छाप दिए गए थे।

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विधायी विभाग ने गजट अधिसूचना में कहा कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 67 के तहत 17 जुलाई 2026 की तीन अधिसूचनाओं को रद्द किया जाता है।

गौर करने वाली बात है कि जिस अधिसूचना का शीर्षक ‘मिजोरम से राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनाव के परिणाम का प्रकाशन’ था, उसके भीतर का पूरा विवरण पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों के उपचुनाव के नतीजों का था। ये वही परिणाम थे जिन्हें 17 जुलाई को पहले ही अधिसूचित किया जा चुका था।

इन सीटों पर तृणमूल कांग्रेस छोड़कर जून में भाजपा में शामिल हुए सुष्मिता देव, प्रकाश चिक बराइक और सुखेंदु शेखर राय भाजपा के टिकट पर दोबारा राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे। उनके चुनाव परिणाम 17 जुलाई को ही आधिकारिक रूप से जारी कर दिए गए थे।

गलत अधिसूचना रद्द करने के बाद कानून मंत्रालय ने सही गजट अधिसूचना जारी की। इसमें जोरम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) के नेता खियांगते लालत्लुआंगकिमा के मिजोरम से राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने की आधिकारिक घोषणा की गई।

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