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कैबिनेट ने दी सीमा सुरक्षा बल के कैडर पुनर्गठन को मंजूरी

इस कदम का मकसद बल की संचालनात्मक और प्रशासनिक क्षमताओं को बढ़ाना है।

Author नई दिल्ली | September 13, 2016 5:33 AM
सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) (पीटीआई फोटो)

केंद्रीय कैबिनेट ने सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों के बहुप्रतीक्षित कैडर पुनर्गठन को सोमवार को मंजूरी दे दी। इससे 74 नए पद सृजित होंगे। इस कदम का मकसद बल की संचालनात्मक और प्रशासनिक क्षमताओं को बढ़ाना है। एक सरकारी बयान में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने बीएसएफ के गु्रप ए कार्यकारी अधिकारियों की कैडर समीक्षा को मंजूरी दे दी है। साथ ही सहायक कमांडेंट से लेकर अतिरिक्त महानिदेशक रैंक तक 74 पदों के सृजन का रास्ता साफ हो गया है। आखिरी बार ऐसा कार्य 1990 में किया गया था। इस पुनर्गठन से उप महानिरीक्षक, कमांडेंट और सेकेंड इन कमान रैंक पर अधिकतम 370 पदों का, डिप्टी कमांडेंट रैंक पर 330, महानिरीक्षक रैंक पर 19, सहायक कमांडेंट में 14 और अतिरिक्त डीजी रैंक पर एक पद सृजित होगा। सरकारी बयान के मुताबिक केंद्रीय कैबिनेट की बैठक ने भारत और अफगानिस्तान के बीच प्रत्यर्पण संधि पर हस्ताक्षर करने को मंजूरी दे दी है। संधि में आतंकवादियों, आर्थिक धोखाधड़ी करने वाले और दूसरे अपराधियों को अफगानिस्तान से प्रत्यर्पित करने और वहां भेजने को लेकर वैधानिक रूपरेखा तय होगी। भारत की कम से कम 37 देशों के साथ प्रत्यर्पण संधि है।

सरकार ने आवास एवं मानव बस्तियों से संबंधित मुद्दों पर समन्वय के लिए केन्या के साथ हस्ताक्षरित एक सहमति पत्र को भी मंजूरी दे दी। इस सहमति पत्र पर गत 11 जुलाई 2016 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नैरोबी दौरे के समय हस्ताक्षर किए गए थे। आाकारिक बयान के मुताबिक मंत्रिमंडल की बैठक में उस सहमति पत्र को मंजूरी दे दी गई जिस पर राष्ट्रीय आवास नीति विकास एवं प्रबंधन के क्षेत्र में समन्वय पर केन्या और भारत के बीच हस्ताक्षर हुए थे। सहमति पत्र के मुताबिक दोनों ही पक्ष कार्मिकों को प्रशिक्षण, परस्पर दौरे, प्रदर्शनियों, सम्मेलनों और कार्यशालाओं सहित विभिन्न रणनीतियों के माध्यम से आवास एवं मानव बस्तियों संबंधी समस्त मुद्दों पर समन्वय करेंगे। इसके अलावा दोनों देश बाजार की प्रवृत्तियों, बेहतर चलन एवं निवेश अवसरों सहित आवास और रीयल एस्टेट के आंकड़ों को साझा करने व विकास पर समन्वय करेंगे।सरकार जल्द ही उच्च शिक्षा वित्तपोषण एजंसी स्थापित करेगी। इस एजंसी का उद्देश्य आइआइटी, एनआइटी व आइआइएम जैसे प्रीमियर संस्थानों के लिए अनुसंधान केंद्रित बुनियाद ढांचे को मजबूत बनाने के लिए जरूरी धन जुटाने मेंं मदद करना है।

प्रधानमंत्री अध्यक्षता में मंत्रिमंडल की बैठक में उच्च शिक्षा वित्त पोषण एजंसी की स्थापना संबंधी मानव संसाधन मंत्रालय के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बैठक के बाद संवाददाताओं को बताया कि एचईएफए का प्रवर्तन संयुक्त रूप से चिन्हित प्रवर्तक व मंत्रालय करेगा। इसकी अधिकृत पूंजी 2000 करोड़ रुपए की होगी जिसमें सरकारी हिस्सेदारी 1000 करोड़ रुपए की होगी। जावड़ेकर ने बताया कि एचईएफए का गठन पीएसयू बैंक, सरकारी स्वामित्व वाली एनबीएफसी (प्रवर्तक) के दायरे में ही विशेष उद्देश्यीय इकाई के रूप में किया जाएगा। यह इकाई आइआइटी, आइआइएम व एनआइटी आदि संस्थानों में विश्व स्तरीय प्रयोगशालाओं के विकास व बुनियादी ढांचे की परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए 20000 करोड़ रुपए तक की राशि जुटाएगी। मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि एचईएएफ सार्वजनिक व निजी क्षेत्र की कंपनियों से सीएसआर कोष भी जुटाएगी।

इसके अलावा एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि कैबिनेट की बैठक में पॉलीमेटेलिक नाड्यूल (मैंगनीज नाड्यूल) के उत्खनन के लिए भू-विज्ञान मंत्रालय और आईएसए के बीच अनुबंध की अवधि पांच साल तक बढ़ा दी गई है। इससे पहले का अनुबंध 24 मार्च 2017 को खत्म होने वाला है। अनुबंध के विस्तार से मध्य हिंद महासागर बेसिन उत्खनन जारी रहेगा।
बैठक में एशिया प्रशांत व्यापार करार के तहत आयात शुल्क रियायत के आदान-प्रदान को भी मंजूरी दे दी गई। इस कदम का मकसद भारत और चीन सहित छह सदस्य देशों के बीच व्यापार बढ़ाना है। फिलहाल एपीटीए के सदस्यों में बांग्लादेश, चीन, भारत, लाओ पीडीआर, कोरिया गणराज्य और श्रीलंका आते हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एपीटीए की प्रस्तावना में संशोधन को भी मंजूरी दे दी है। इससे एपीटीए में मंगोलिया को सातवें देश के रूप में शामिल किया गया है। बयान मेंं कहा गया है कि एपीटीए की मंत्रिस्तरीय परिषद का चौथा सत्र जल्द होगा जिसमें औपचारिक तौर पर सभी फैसलों को क्रियान्वित किया जाएगा।

इसी तरह सरकार ने दलहन का बफर स्टॉक आठ लाख टन से बढ़ाकर 20 लाख टन करने का फैसला किया है। इस पर करीब 18,500 करोड़ रुपए की लागत बैठेगी। दलहन कीमतों पर अंकुश और किसानों को दालों की खेती की ओर प्रोत्साहित करने के लिए यह कदम उठाया जा रहा है। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि आवश्यक वस्तुआें के दाम नियंत्रण में रखे जाएंगे। इसके साथ ही सरकार ने चेताया है कि वह इसकी खुदरा कीमतों पर अंकुश के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत अपने अधिकारों का इस्तेमाल कर सकती है। मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने सोमवार को बफर स्टॉक को आठ से बढ़ाकर 20 लाख टन करने के उपभोक्ता मामलों के विभाग के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। खाद्य मंत्री रामविलास पासवान ने संवाददाताआें से कहा कि सरकार 10 लाख टन दलहन का आयात करेगी और बाकी की खरीद स्थानीय बाजार से की जाएगी।

 

 

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