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मुसलमानों को 650 करोड़ की हज सब्सिडी दे रही सरकार, नई कमिटी इस पर नए सिरे से करेगी विचार

साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से 10 वर्षों में हज सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से हटाने के रास्ते निकालने को कहा था।

मुस्लिमों का पवित्र तीर्थस्थल मक्का। (फाइल फोटो)

अल्पसंख्यक मंत्रालय ने 6 सदस्ययी कमिटी बनाने का फैसला किया है जो यह देखेगी कि बिना सरकारी सब्सिडी के भी इसे और सस्ती कैसे बनाया जाए। साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से 10 वर्षों में हज सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से हटाने के रास्ते निकालने को कहा था। हालांकि यह आगामी उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनावों में बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।

मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक एेसा नहीं है कि हम सब्सिडी खत्म करना चाहते हैं। कमिटी यह देखेगी कि सब्सिडी का सर्वश्रेष्ठ इस्तेमाल कैसे हो सकता है। वह यह भी देखेगी कि किस तरह से हज यात्री कम लागत या बिना सब्सिडी के यात्रा कर सकते हैं। हाल ही में मंत्रालय ने पूर्व नौकरशाह अफजल अमानउल्ला की अगुवाई में 11 सदस्ययी कमिटी बनाई थी, जिसका काम यह देखना था कि देश में अल्पसंख्यक यूनिवर्सिटीज कैसे स्थापित की जाएं। सब्सिडी फिलहाल 650 करोड़ रुपये की है।

साल 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को यह कहते हुए 10 साल में सब्सिडी हटाने का आदेश दिया था कि यह पैसा मुस्लिम समुदाय के सामाजिक और शैक्षणिक विकास में खर्च किया जा सकता है। इसके बाद तत्कालीन सरकार ने कहा था कि हज यात्रा का दायित्व प्राइवेट एयरलाइंसों को देने से हज यात्री बाजारू ताकतों के हाथों में पहुंच जाएंगे। इससे उन्हें मनमाने दामों पर किराए देने होंगे।

जस्टिस आफताब आलम की बेंच ने कहा कि 1 लाख से ज्यादा लोग हज पर जाते हैं कोई भी एयरलाइंस इसके लिए कम किराए की पेशकश कर सकता है। इत्तेफाक से अल्पसंख्यक मंत्री मुख्तार अब्बास नकली की सऊदी अरब यात्रा के बाद उसने भारत का जो 20 प्रतिशत हज कोटा काटा था, उसे बहाल कर दिया। इसके बाद भारत से हज पर जाने वाले यात्रियों की संख्या 1.75 लाख तक जा सकती है। हालांकि सरकार इसके बारे में लोगों को जल्द बताना चाहती है, लेकिन हज सब्सिडी को हटाने के बारे में बताने से यूपी विधानसभा चुनावों में उसे परेशानी हो सकती है। राज्य में करीब 20 प्रतिशत मुस्लिम आबादी है।

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