एक महीने के भीतर दो क्रैश और 12 लोगों की मौत के बाद अब भारत सरकार चार्टर ऑपरेटरों की सुरक्षा रैंकिंग पर विचार कर रही है। भविष्य में इस क्रियान्वयन के संबंध में सख्त नियम लागू किए जाएंगे। इन हादसे से सचेत भारत अब नॉन शेड्यूल्ड ऑपरेटर परमिट (NSOP) या चार्टर और प्राइवेट जेट ऑपरेटरों को उनके सेफ्टी रिकॉर्ड के आधार पर रैंक कर सकता है।

अब देनी पड़ेंगी यह जानकारियां

हालांकि, यह रैंकिंग डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) की वेबसाइट पर डालने का प्रस्ताव है, लेकिन ऑपरेटरों को अब अपनी वेबसाइट पर “एयरक्राफ्ट की उम्र, मेंटेनेंस हिस्ट्री और पायलट के अनुभव सहित अन्य जरूरी सेफ्टी जानकारी” बताना भी जरूरी होगा। ऐसा इसलिए किया जाएगा ताकि लोगों को उनके द्वारा चार्टर किए गए एयरक्राफ्ट के “स्टैंडर्ड के बारे में पूरी जानकारी” हो।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार इन सब के साथ ही अब वैसे ऑपरेटरों के खिलाफ बड़ी पेनल्टी लगाई जाएगी जो विमान या क्रू यूटिलाइजेशन से संबंधित नियमों को तोड़ेंगे। वैसे पायलट जो फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन का उल्लंघन करेंगे या विमान को सुरक्षा न्यूनतम से नीचे लैंड कराने की कोशिश करेंगे उनके लाइसेंस को पांच साल तक रद्द कर दिया जाएगा। वहीं, जो ऑपरेटर कम्प्लायंस स्टैंडर्ड्स को पूरा नहीं करेंगे, उनके लाइसेंस सस्पेंड कर दिए जाएंगे।

इन्हें हादसों का मुख्य कारण बताया गया

रिपोर्ट के मुताबिक रेगुलेटर ने मंगलवार को सभी NSOP या चार्टर/प्राइवेट जेट ऑपरेटरों के साथ एक मीटिंग की ताकि “एविएशन हादसों में हाल ही में हुई बढ़ोतरी को ठीक किया जा सके” और “सेफ्टी पर ज्यादा ध्यान देने की बहुत जरूरत” पर जोर दिया जा सके। इस मीटिंग में स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOPs) का पालन न करना, ठीक से फ्लाइट प्लानिंग न होना, और ट्रेनिंग की कमियों की पहचान की गई और इन्हें हादसों का मुख्य कारण बताया गया।

साथ ही, जो चार्टर कंपनियां अपना मेंटेनेंस खुद करती हैं, पर स्टैंडर्ड के हिसाब से नहीं करती हैं, उनसे अब यह काम मान्यता प्राप्त MROs को आउटसोर्स करने के लिए कहा जाएगा। इंडस्ट्री के एक जानकार ने कहा, “NSOP ऑपरेशन में सबसे ज्यादा दिक्कतें एयरक्राफ्ट मेंटेनेंस और ऑपरेशन टीमों के गलत फैसले से जुड़ी होती हैं।”

कमर्शियल नतीजों के ऊपर है सेफ्टी

मीटिंग के बाद, DGCA ने “NSOP सेक्टर में सुरक्षा से जुड़े समझौतों के प्रति जीरो-टॉलरेंस पॉलिसी लागू करने के मकसद से नए उपाय” जारी किए। रेगुलेटर ने निर्देश दिया है कि सेफ्टी को सभी कमर्शियल बातों, चार्टर कमिटमेंट या VIP मूवमेंट से ऊपर रखा जाना चाहिए। इसने फिर से पुष्टि की कि सेफ्टी कारणों से फ्लाइट को डायवर्ट करने, देरी करने या कैंसिल करने का पायलट-इन-कमांड का फैसला आखिरी होता है और ऑपरेटरों को बिना किसी कमर्शियल नतीजे के इसका सम्मान करना चाहिए।

DGCA द्वारा NSOPs की सेफ्टी रैंकिंग करने और NSOPs द्वारा अपने फ्लीट और क्रू की जानकारी बताने के अलावा, रेगुलेटर अथॉरिटी ज्यादा रैंडम कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (CVR) ऑडिट करेगी और अनऑथराइज्ड ऑपरेशन या डेटा में गड़बड़ी का पता लगाने के लिए फ्यूल रिकॉर्ड और टेक्निकल लॉग को क्रॉस-वेरिफाई करेगी।

सिर्फ पायलटों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता

रिपोर्ट के मुताबिक रेगुलेटर का कहना है, “सिस्टम में नियमों का पालन न करने के लिए जवाबदेह मैनेजर और सीनियर लीडरशिप को निजी तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा, सेफ्टी में चूक के लिए सिर्फ पायलटों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।” अब पुराने एयरक्राफ्ट और जिनकी ओनरशिप बदल रही है, उनकी ज्यादा मॉनिटरिंग की जाएगी। जो NSOPs अपनी मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल (MRO) फैसिलिटी खुद चलाते हैं, उनका ऑडिट किया जाएगा। “जिनमें कमी पाई जाएगी, उन्हें मेंटेनेंस का काम अप्रूव्ड ऑर्गनाइजेशन को आउटसोर्स करना होगा।”

रेगुलेटर ने पाया है कि मौसम से जुड़े एक्सीडेंट “अक्सर मौसम के अनप्रेडिक्टेबल होने के बजाय गलत फैसले का नतीजा होते हैं।” ऑपरेटर्स के लिए रियल-टाइम वेदर अपडेट सिस्टम लगाना और तय SOPs का सख्ती से पालन करना जरूरी है। इसके अलावा, पायलटों की रेगुलर ट्रेनिंग में वेदर अवेयरनेस स्ट्रेटेजी और अनकंट्रोल्ड माहौल में फैसले लेने पर ज्यादा जोर देना चाहिए।

फैसले लेने में सिस्टम की कमियों को दूर करने और ऑपरेशनल डिसिप्लिन पक्का करने के लिए, रेगुलेटर कई क्विक फिक्स लागू कर रहा है।मीटिंग में मौजूद एक सीनियर अधिकारी ने कहा : “NSOP ऑपरेटर्स के लिए मैसेज साफ है – या तो सभी नॉर्म्स का 100% पालन करें या अपना लाइसेंस सरेंडर करके घर चले जाएं। उन्हें लाइन में आना होगा या बिजनेस से बाहर होना होगा।”

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झारखंड के लातेहार में अपने रेस्टोरेंट में शॉर्ट सर्किट के कारण लगी आग में घायल हुए संजय कुमार को जब 16 फरवरी को रांची के देवकमल अस्पताल में लाया गया, तो उनकी हालत गंभीर थी और वे 60-65% तक जल चुके थे। अस्पताल के सीईओ डॉ अनंत सिन्हा ने कहा कि उनके अस्पताल के डॉक्टरों ने परिवार के साथ ईमानदारी बरती। उन्होंने कहा, “60-65% जलने की स्थिति में, जिंदा रहने की कोई गारंटी नहीं होती। परिवार अक्सर बड़े केंद्रों में दूसरा विकल्प तलाशते हैं।” पढ़ें पूरी खबर…