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खाली पड़ी सरकारी भूमि पर बन सकते हैं सस्ते घर

केंद्र सरकार, राज्य सरकारों की मदद से अतिरिक्त भूमि की तलाश कर रही है, ताकि इसका उचित उपयोग प्रधानमंत्री सस्ता आवास योजना के तहत घरों के निर्माण के लिए किया जा सके।

Author नई दिल्ली | August 29, 2017 7:32 AM
खान का मझगांव स्थित फ्लैट। (Photo: Express)

साल 2022 तक देश में सभी को आवास देने के प्रयासों के तहत केंद्र सरकार सार्वजनिक उपक्रमों की अतिरिक्त भूमि का उपयोग सस्ते आवाओं के निर्माण के लिए कर सकती है। यह बात यहां नरेडको के 14वें राष्ट्रीय सम्मेलन में आवास और शहरी मामलों के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने कही। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकारों की मदद से अतिरिक्त भूमि की तलाश कर रही है, ताकि इसका उचित उपयोग प्रधानमंत्री सस्ता आवास योजना के तहत घरों के निर्माण के लिए किया जा सके। केंद्र सरकार केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के पास उपलब्ध अतिरिक्त भूमि का उपयोग भी कमजोर वर्गों को 2022 तक अपना घर प्रदान करने के लिए उपयोग में ला सकती है। इस प्रकार की सभी संभावनाओं पर गंभीरता से काम किया जा रहा है।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार नरेडको द्वारा ‘इंडियन रियल एस्टेट-अनफोल्ंिडग द न्यू इरा आॅफ ग्रोथ’ विषय पर आयोजित इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए मिश्रा ने कहा कि इस संबंध में राज्यों और संघ शासित प्रदेशों के साथ आवश्यक परामर्श किया जा रहा है और केंद्र सरकार अपने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के पास उपलब्ध भूमि का अधिग्रहण करने के लिए सहमति बनाने का प्रयास भी कर रही है। इन सभी प्रयासों का एक ही उद्देश्य है कि पूरे देश में आम आदमी के लिए उसकी उसकी समर्थता के अनुसार सस्ते घरों का निर्माण किया जा सके।

साथ ही मिश्रा ने संकेत दिया कि इसके केंद्र सरकार दुनिया भर में उन्नत देशों से निर्माण के लिए सर्वाधिक आधुनिक तकनीकों में से सर्वश्रेष्ठ को भारत लाने का प्रयास कर रहा है ताकि घरों का निर्माण, विशेषकर समाज के कमजोर वर्गों और उसी प्रकार अन्य वर्गों के लिए काफी तेजी से किया जा सके। सरकार को पूरी उम्मीद है कि वह तेजी से घरों का निर्माण करने वाली ऐसी तकनीकों को भारतीय रीयल एस्टेट के लिए प्राप्त कर उपयोग में लाने में सफल होगी जिससे उम्मीद से पहले सभी के लिए घर का लक्ष्य हासिल किया जा सकेगा।

 

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