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संसद में विपक्ष के ‘ललितगेट’ के जवाब में सरकार ने उछाला ‘वाड्रा मुद्दा’

संसद सत्र पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा द्वारा फेसबुक पर की गयी टिप्पणी को लेकर सत्ता पक्ष ने आज उन्हें संसद में बुलाकर दंडित करने की...

लोकसभा में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी (पीटीआई फोटो)

ललित मोदी विवाद और व्यापमं घोटाले को लेकर गुरुवार को भी संसद के दोनों सत्रों में गतिरोध जारी रहा। गतिरोध का यह लगातार तीसरा दिन था। कांग्रेस के नेतृत्व में विपक्ष ‘इस्तीफा नहीं तो कामकाज नहीं’ के अपने रुख पर अड़ा रहा।

वहीं सत्तापक्ष ने कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की एक टिप्पणी को लेकर विपक्ष पर प्रहार किया और किसी भी इस्तीफे की संभावना को साफ तौर पर खारिज कर दिया। इन मुद्दों पर आपसी आरोप-प्रत्यारोप के कारण हुए हंगामे के चलते जहां लोकसभा की कार्रवाई को एक बार के स्थगन के बाद दोपहर करीब सवा बारह बजे और राज्यसभा में दो बार के स्थगन के बाद दो बजकर पांच मिनट पर पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।

विपक्ष जहां विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान व मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्रियों के इस्तीफे की मांग कर रहा है वहीं लोकसभा में भाजपा ने वाड्रा की फेसबुक पर की गई एक टिप्पणी को उठाते हुए संसद की छवि खराब करने के लिए उन्हें संसद में तलब कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। भाजपा के प्रह्लाद जोशी ने वाड्रा की टिप्पणी को संसद पर हमला बताते हुए कहा कि इससे संसद की गरिमा को ठेस पहुंची है। उन्होंने मांग की कि वाड्रा को तुरंत सदन में बुलाकर उन्हें उनकी टिप्पणी के लिए दंडित किया जाए।

भाजपा के मुख्य सचेतक अर्जुन राम मेघवाल ने वाड्रा की कथित फेसबुक टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा कि वे संसद के बारे में फेसबुक पर लिख रहे हैं और हम कैसे चुप रह सकते हैं। जोशी व मेघवाल ने इस मामले को विशेषाधिकार समिति को भेजे जाने की मांग की।

सदन में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने इसका कड़ा प्रतिवाद करते हुए कहा कि वाड्रा सदन के सदस्य नहीं हैं इसलिए जोशी की टिप्पणी को कार्यवाही से निकाला जाए। कांगे्रस के अधिकतर सदस्यों ने वाड्रा का नाम लिए जाने पर कड़ी आपत्ति की।

जोशी की इस टिप्पणी पर सदन में मौजूद सोनिया गांधी उद्वेलित नजर आईं और अपनी पार्टी के सदस्यों से कुछ कहती देखी गईं। उल्लेखनीय है कि वाड्रा ने 21 जुलाई को फेसबुक पर संसद सत्र के बारे में टिप्पणी करते हुए कहा था, ‘संसद शुरू हो गई है और साथ ही शुरू हो गई है उनकी क्षुद्र विभाजनकारी राजनीति। भारत की जनता बेवकूफ नहीं है। खेद है कि भारत का नेतृत्व ऐसे तथाकथित नेता कर रहे हैं।’

लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने हालांकि बुधवार को विपक्ष को चेतावनी दी थी कि सदस्य सदन में काली पट्टी बांधकर नहीं आएं और न ही पोस्टर और पर्चे दिखाएं। लेकिन गुरुवार को विपक्ष ही नहीं बल्कि सत्ता पक्ष के सदस्यों ने भी विभिन्न नारे लिखे पर्चे लहराए।

कांगेस के सदस्यों ने तख्तियां भी दिखाईं जिन पर लिखा था- ‘भ्रष्टाचार पर लंबे चौड़े भाषण, ललित मोदी पर क्यों मौनासान’, ‘जब बड़े मोदी मेहरबान, तो छोटे मोदी पहलवान’, ‘मोदीजी 56 इंच दिखाओ, सुषमा, वसुंधरा को हटाओ’। उधर सत्ता पक्ष के कई सदस्य भी हाथों में पर्चे लेकर अग्रिम पंक्ति में आए थे। पर्चों पर लिखा था- ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे, किसान की जमीन दामाद को बांटे’, ‘कांग्रेस का राज है जहां, घोटालों की बाढ़ है वहां’।

उधर राज्यसभा में कांगे्रस नेता आनंद शर्मा सहित विपक्ष की ओर से गुरुवार को फिर ललित मोदी विवाद व व्यापमं मामले में कार्यस्थगन नोटिस के तहत चर्चा की मांग की गई लेकिन सदन के नेता अरुण जेटली, संचार मंत्री रविशंकर प्रसाद और संसदीय कार्य राज्यमंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की ओर से कहा गया कि विपक्ष चर्चा से बच रहा है और उसे फौरन चर्चा शुरू करनी चाहिए। नकवी ने किसी भी मंत्री के इस्तीफे की विपक्ष की मांग को खारिज कर दिया।

हंगामे के कारण उच्च सदन में कोई कामकाज नहीं हो सका और बैठक को दो बार के स्थगन के बाद आखिरकार दोपहर दो बजे पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। राज्यसभा में दोपहर बारह बजे के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सदन में आए। लेकिन उनके आने के कुछ ही पलों बाद हंगामे के कारण बैठक दोपहर दो बजे के लिए स्थगित हो गई। मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व अन्य विपक्षी नेताओं से मुस्कुराते हुए बातचीत की।

उधर, सुबह संसद की कार्यवाही शुरू होने से पहले कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी और लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने राकांपा नेता तारिक अनवर, झामुमो के विजय हंसदक और आप नेता भगवंत मान के साथ बैठक करके निर्णय किया गया कि इस्तीफा नहीं, तो काम नहीं की रणनीति को जारी रखा जाएगा।

राहुल ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री ने चुनाव के समय पूरे हिंदुस्तान को यह भरोसा दिया था कि न मैं खाऊंगा, और न खाने दूंगा। पीएम के शब्दों का वजन होता है। लेकिन जो इनके दिल में आता है, कह देते हैं। इनकी विश्वसनीयता आहिस्ता, आहिस्ता घट रही है।

कांग्रेस नेता की उक्त टिप्पणी पर पलटवार करते हुए संसदीय कार्य मंत्री एम वेंकैया नायडू ने मीडिया से कहा कि विश्वसनीयता उस दल की समाप्त हुई है जो 440 से घटकर 44 सीट पर आ गई है और कांग्रेस पार्टी को इस विषय पर आत्मचिंतन करने की जरूरत है।

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