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बिजली, पानी, सड़क के लिए तीन-तीन बार टैक्स वसूली, फिर भी पूरी सुविधा नहीं दे रही सरकार

हर नागरिक अपनी बिजली के लिए पैसे चुकाता है। लेकिन इसके अलावा उसे पॉवर बैकअप के लिए खुद ही व्यवस्था करनी पड़ती है।

शुद्ध पानी के लिए घरों में लगवाना होता है वाटर प्यूरीफायर (फाइल फोटो)

देश में हर नागरिक किसी न किसी रूप में सरकार को तमाम तरह के टैक्स अदा करता है। इसके एवज में सरकार उसे सुविधाएं उपलब्ध कराती है। नागरिकों की जरूरी आवश्यकताओं में शामिल बिजली, पानी और सड़क के लिए जितना टैक्स दिया जा रहा है, उतनी सुविधाएं सरकार से नहीं मिल पा रही हैं। नागरिक खास तौर पर शहरी नागरिक हर सुविधा के लिए सरकार को टैक्स के अलावा अपने खर्चे से अलग से व्यवस्था करता है। इसको जोड़ा जाए तो अमूमन नागरिक हर सुविधा के लिए तीन-तीन बार टैक्स चुका देता है।

शहरी नागरिक सरकार को जल मूल्य के अलावा जलकर (Water Tax) भी देते हैं। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराए। लेकिन इसके बावजूद अधिकतर शहरी नागरिकों को अपने पैसे से वाटर प्यूरीफायर लगवाना पड़ता है। यानी पानी को शुद्ध करने के लिए लोगों को स्वयं अपने पैसे व्यवस्था करनी पड़ती है। यह उन पर अतिरिक्त भार है। आम तौर पर 10,000 रुपए की औसत कीमत पर 1.5 करोड़ यूनिट की कुल बिक्री को मानने पर 1,000 करोड़ रुपए की वार्षिक रखरखाव लागत के साथ कुल खर्च 15,000 करोड़ रुपए तक खर्च आता है।

इसी तरह हर नागरिक अपनी बिजली के लिए पैसे चुकाता है। लेकिन इसके अलावा उसे पॉवर बैकअप के लिए खुद ही व्यवस्था करनी पड़ती है। घरों में इन्वर्टर और जेनरेटर लगवाना पड़ता है। यह अतिरिक्त खर्च है। यदि 2 करोड़ यूनिट अब तक 10,000 रुपए प्रति यूनिट की औसत कीमत के साथ बिजली बेची गई हैं तो यह 20,000 करोड़ रुपए पड़ता है। इसमें वार्षिक रखरखाव के लिए 1,500 करोड़ रुपए और शामिल कर सकते हैं।

जब सड़क की बात आती है तो अधिकतर उपभोक्ता इसके लिए कई बार पैसे चुकाते हैं। कई बार सीधे और कई बार परोक्ष रूप से खर्च करना पड़ता है। इसमें केंद्रीय और राज्य सरकारों द्वारा लिया जाने वाला रोड टैक्स, रजिस्ट्रेशन चार्ज, इंट्री टैक्स और वाहनों के दूसरे टैक्सों के अलावा राजमार्गों पर टोल्स और पेट्रोल-डीजल पर उपकर आदि भी शामिल है। इसके अलावा अधिकतर शहरों में वायु प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। 20,000 रुपए की औसत यूनिट कीमत के साथ 30 लाख एयर प्यूरीफायर की कुल बिक्री मानें तो कुल खर्च 6,000 करोड़ रुपए और फिल्टर पर लागत एक वर्ष में 400 करोड़ रुपए आ सकती है।

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