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सरकारी कंपनियों को लघु दलित उद्योगों से लेना था माल, सरकार का प्‍लान हो गया फेल

'पब्लिक प्रोक्योरमेंट ऑर्डर' के तहत यूपीए-2 की सरकार ने 23 मार्च, 2012 को सभी केन्द्रीय सार्वजनिक कंपनियों को आदेश दिया था कि उन्हें अपनी कुल खरीद का 20 प्रतिशत माल सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों से खरीदना होगा।

Author Updated: July 23, 2018 2:21 PM
central psuआंकड़ों के अनुसार, सेंट्रल पीएसयू नहीं मान रहीं सरकार का आदेश (प्रतीकात्मक तस्वीर)

 P Vaidyanathan Iyer 

सरकार की एक महत्वकांक्षी योजना के तहत देश की सभी केन्द्रीय कंपनियों यानि कि पीएसयू (पब्लिक सर्विस अंडरटेकिंग) को अपने कुल माल खरीद का 4 प्रतिशत दलित उद्योगों से खरीदना था। लेकिन बीते 6 सालों में इस दिशा में कोई खास प्रगति नहीं हुई है और एक तरह से सरकार की यह योजना अभी तक फेल साबित हुई है। बता दें कि ‘पब्लिक प्रोक्योरमेंट ऑर्डर’ के तहत यूपीए-2 की सरकार ने 23 मार्च, 2012 को सभी केन्द्रीय सार्वजनिक कंपनियों को आदेश दिया था कि उन्हें अपनी कुल खरीद का 20 प्रतिशत माल सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों से खरीदना होगा। साथ ही सरकार ने यह भी तय किया कि इस 20 प्रतिशत खरीद में से 4 प्रतिशत माल दलितों द्वारा चलाए जा रहे उद्योगों से खरीदा जाएगा। लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो सका है।

बता दें कि साल 2017-18 में केन्द्रीय सार्वजनिक कंपनियों (पीएसयू) ने दलित उद्योगों से कुल 543.86 करोड़ रुपए की खरीद की, जबकि उनकी कुल खरीद 1,16,837 करोड़ रुपए रही। इस तरह सेंट्रल पीएसयू ने अपनी कुल खरीद का सिर्फ 0.46 प्रतिशत माल ही दलित उद्योगों से खरीदा। साल 2012-13 में भी यह आंकड़ा सिर्फ 0.5 प्रतिशत ही था। गौरतलब है कि साल 2015 से सरकार ने लघु और सूक्ष्म उद्योगों से 20 प्रतिशत माल खरीदना अनिवार्य कर दिया था और ऐसा ना करने पर सेंट्रल पीएसयू को MSME (Ministry of micro, small and medium enterprises) मंत्रालय को इसका कारण बताना जरुरी कर दिया था।

यह जानकारी आरटीआई के तहत MSME मंत्रालय के ऑफिस ऑफ डेवलेपमेंट कमिश्नर ने दी है। जानकारी के तहत सेंट्रल पीएसयू द्वारा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों से माल खरीदने का आंकड़ा काफी कम रहा। बाद के सालों में इसका कुछ सुधार हुआ, लेकिन दलित उद्योगों से माल की खरीद का आंकड़ा 0.5 प्रतिशत से भी कम ही रहा। बहरहाल देश के 37 मंत्रालयों के अधीन आने वाली 330 पीएसयू ने सरकार की खरीद पॉलिसी के तहत सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्योगों को खूब फायदा पहुंचाया है। साल 2017-18 में 86,671 छोटी कंपनियों को सरकार की इस पॉलिसी का फायदा मिला है, सिर्फ 2,235 छोटी कंपनियां ही इस पॉलिसी का फायदा उठाने में नाकाम रहीं। सरकार के एक अधिकारी ने द इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कहा कि “सरकार ट्रांसपेरेंसी बढ़ा रही है। केन्द्रीय कंपनियां ना सिर्फ अपनी वार्षिक खरीद प्रक्रिया को सार्वजनिक करेंगी, बल्कि सूक्ष्म और लघु उद्योगों से खरीदे गए माल की लिस्ट भी अपनी-अपनी वेबसाइट पर साझा करेंगी।”

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