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सरकारी तेल कंपनियों ने 365 दिन में कमाए 68 हजार करोड़, मोदी सरकार के पास नहीं है प्राइवेट का हिसाब

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों के पिछले वर्ष के कारोबार, लाभ और सामाजिक जिम्मेदारी मद में दिए खर्च का ब्यौरा उपलब्ध कराया है। जिसके मुताबिक कुल दस सरकारी कंपनियों ने महज एक साल में जहां 12.92 लाख करोड़ से ज्यादा का कारोबार किया वहीं 68596.07 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया।

Author नई दिल्ली | July 24, 2018 9:49 AM
केंद्र सरकार ने एक सवाल के जवाब में बताया कि निजी पेट्रोल कंपनियों की कमाई का कोई हिसाब-किताब उपलब्ध नहीं है।

तेल और गैस बैचकर सरकारी और निजी पेट्रोलियम कंपनियां मालामाल हो रहीं हैं। जीएसटी के दायरे से पेट्रो उत्पादों को बाहर रखने के फैसले से जहां कंपनियों की चांदी कट रही है, वहीं आम जनता की जेब ढीली।केंद्रीय उत्पाद शुल्क सहित राज्यों के स्तर से भी अलग-अलग दर पर टैक्स थोपने से पेट्रोलियम पदार्थों की महंगाई आसमान पर है। बानगी के तौर पर एक जुलाई को दिल्ली में पेट्रोल और डीजल पर नजर डालें। इस दिन से जहां पेट्रोल का रेट 75.55 रुपये तो डीजल का दाम 67.38 रुपये प्रभावी है। टैक्स की गणना करें तो इसमें पेट्रोल और डीजल पर जहां केंद्रीय उत्पाद शुल्क क्रमशः 19.48 और 15.33 रुपये  लीटर तो राज्य सरकार 27 और 17.26 रुपये वैट आदि कर वसूल रही है।

उधर, एक बार फिर संसद में हुए सवाल पर पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बता दिया है कि अभी पेट्रोल, डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने का कोई फैसला नहीं हुआ है। ऐसे फैसले जीएसटी काउंसिल ही ले सकती है। ऐसे में समझा जा सकता है कि जनता को तेल और गैस की बढ़ी कीमतों से फिलहाल निजात नहीं मिलने वाली। सरकार ने अपने स्वामित्व वाली कंपनियों की वर्ष 2017-18 के दौरान हुई कमाई का जो ब्यौरा बताया है, वह सुनकर आप चौंक पड़ेंगे। खास बात  है कि सरकार के पास निजी तेल कंपनियों के कारोबार और कमाई का कोई आंकड़ा ही नहीं है। एक लिखित सवाल के जवाब में खुद संसद में सरकार ने यह स्वीकार किया है। समझा जा सकता है कि जब सरकारी कंपनियों इतनी कमाई कर रहीं  तो फिर निजी कंपनियों ने भी कितना मुनाफा जुटाया होगा। सरकार ने सोमवार को एक सवाल पर लिखित जवाब में बताया कि पेट्रोलियम एवं गैस मंत्रालय निजी क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों के लाभ का ब्यौरा नहीं रखता है।

दरअसल तृणमूल सांसद प्रो. सौगत राय ने लोकसभा में तीन लिखित सवाल पूछे थे। उन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष में सरकारी स्वामित्व वाली पेट्रोलियम कंपनियों के कारोबार और लाभ का जहां कंपनीवार ब्यौरा मांगा था, वहीं उस अवधि के दौरान निजी पेट्रोल कंपनियों की कमाई का तुलनात्मक हिसाब भी पूछा था। सरकार से यह भी बताने को कहा था कि सरकारी कंपनियों ने ज्यादा कमाया या फिर निजी कंपनियों ने।  सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों ने कमाई का एक निश्चित हिस्सा सीएसआर मद में सामाजिक कार्यों के लिए खर्च किया या नहीं, इस पर भी उन्होंने सवाल किया था। इस पर पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने वर्ष 2017-18 के दौरान पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के अधीन आने वाली तेल और गैस कंपनियों के कारोबार, लाभ और सामाजिक जिम्मेदारी मद में दिए खर्च का ब्यौरा उपलब्ध कराया है। जिसके मुताबिक कुल दस सरकारी कंपनियों ने महज एक साल में जहां 12.92 लाख करोड़ से ज्यादा का कारोबार किया वहीं 68596.07 रुपये का मुनाफा कमाया।

सबसे ज्यादा इंडियन ऑयल हुआ मालामालः इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने वर्ष 2017-18 में सबसे ज्यादा 509842.00 करोड़ रुपये का कारोबार किया, वहीं कमाई 21,346 करोड़ रुपये हुई। दूसरे नंबर पर भारत पेटोलियम रहा। इसने 277162.23 करोड़ कारोबार और 7919.34 लाख रुपये का मुनाफा कमाया। तीसरे स्थान पर रहे हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने 244085.12 करोड़ रुपये का कुल कारोबार किया, वहीं लाभ 6357.07 करोड़ रुपये हुआ। तेल और प्राकृतिक गैस निगम ने 85004 करोड़ का कारोबार और 19945 करोड़ का लाभ कमाया। कुल दस सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों में कारोबार के मामले में सबसे नीचे इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड कंपनी रही। जिसने 1787.58 करोड़ का कारोबार और 377.87 करोड़ रुपये का लाभ अर्जित किया। (देखें कंपनीवार कारोबार और कमाई की पूरी सारिणी)

तेल कंपनियों की कमाई के बारे में पेट्रोलिएम एवं प्राकृति गैस मंत्रालय की ओर से उपलब्ध कराया गया ब्यौरा।

समाज के लिए इतना किया खर्चः सरकारी स्वामित्व वाली सभी दस तेल और गैस कंपनियों ने सामाजिक कार्यों में 1458.02 करोड़ रुपये खर्च किया।दरअसल कंपनीज एक्ट 2013 के तहत सभी तरह की कंपनियों को कुल कमाई का कम से कम दो प्रतिशत सामाजिक कार्यों के लिए खर्च करना पड़ता है। जिसे कारपोरेट सोशल रेस्पोंसिबिलिटी(सीएसआर) फंड कहते हैं। इस लिहाज से इंडियन ऑयल ने सर्वाधिक 331.05, भारत पेट्रोलियम ने 166.02, हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने 156.87 करोड़ रुपये सामाजिक कार्यों के लिए खर्च किए।

 

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