कॉकरोच जनता पार्टी ने चेतावनी दी है कि अगर केंद्र सरकार प्रदर्शनकारियों के खिलाफ एक्शन न लेने के अपने वादे से पीछे हटती है तो वह दोबारा अपना धरना-प्रदर्शन शुरू कर देगी। हालांकि दूसरी तरफ सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सरकार के वादे में कभी भी हिंसा के आरोपी या आपराधिक बैकग्राउंड वाले लोगों को शामिल नहीं किया गया था।
जंतर मंतर पर धरना प्रदर्शन खत्म करने से पहले सीजेपी ने केंद्र सरकार के सामने यह मांग रखी थी कि पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली और अन्य जगहों पर प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ दर्ज किए मामले वापस लिए जाएं। इसके बाद ही सीजेपी ने प्रदर्शन खत्म करने का ऐलान किया था।
सीजेपी ने अब सरकार पर बीजेपी शासित राज्यों में पुलिस को मामले दर्ज करने और गिरफ्तारियां करने की अनुमति देकर अपनी प्रतिबद्धता से पीछे हटने का आरोप लगाया है और आंदोलन को फिर से शुरू करने की चेतावनी दी है।
‘सिर्फ शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के लिए था वादा’
सीजेपी ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने उसे अभी तक वह साइन किया हुआ समझौता नहीं सौंपा है, जिसका उनसे वादा किया गया था।हालांकि इस मसले पर सरकारी सूत्रों ने बताया कि सरकार की तरफ से दिया गया भरोसा सिर्फ “शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों” के लिए था और इसमें “असामाजिक तत्व” शामिल नहीं थे।
एक सीनियर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि CJP और सरकार के बीच हुए समझौते की जानकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए दी गई थी। उन्होंने कहा कि बातचीत में शामिल जेपी नड्डा ने सरकार की ओर से जो भरोसा दिलाया, उसके शब्द बहुत सोच-समझकर चुने गए थे।
सोनम वांगचुक से भी किया गया यही वादा
उन्होंने साफ कहा कि विरोध-प्रदर्शन करने वालों और आयोजकों पर प्रदर्शन की गतिविधियों के लिए कोई केस दर्ज नहीं किया जाएगा, लेकिन जो लोग हिंसा में शामिल रहे हैं या जिनका आपराधिक बैकग्राउंड है, उनसे सख्ती से निपटा जाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि सोनम वांगचुक को दिए गए लिखित आश्वासन में भी सरकार ने सिर्फ “शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों” के खिलाफ एक्शन न लेने का वादा किया था।
एक अन्य सीनियर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र और CJP के बीच अभी भी कोई लिखित समझौता नहीं हुआ है और इस समझ के बारे में एकमात्र औपचारिक जानकारी स्वास्थ्य मंत्री नड्डा की शनिवार को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस से ही मिली है। सूत्रों ने बताया कि सीजेपी की तरफ जो प्रस्ताव दिया गया था, जिसे मंगलवार तक सरकार के हस्ताक्षर के साथ लौटाया जाना था, अभी तक सौंपा नहीं गया था।
बिहार और असम सरकार ने मामले वापस लेने का किया है ऐलान
बिहार और असम की सरकारें कल ही 26 जुलाई शाम छह बजे से पहले हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों के खिलाफ मामले वापस लेने का ऐलान कर चुकी हैं। इसके अलावा इस समय सीमा से पहले गिरफ्तार किए गए प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया जाएगा।
हालांकि पश्चिम बंगाल में दूसरी तरफ एक्शन जारी है। वहां 24 जुलाई को कोलकाता में हुई हिंसा के मामले सात FIR दर्ज की जा चुकी हैं और 16 को गिरफ्तार किया गया है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि जिनकी पहचान की गई है, उनमें से कई “छात्र नहीं” बल्कि “असामाजिक तत्व” थे।
किन लोगों के खिलाफ हटेंगी FIR?
सरकारी सूत्रों ने बताया कि सरकार असली प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके अलावा केंद्र पेपर लीक की वजह से NEET-UG परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने को लेकर भी सकारात्मक है।
उन्होंने कहा कि सरकार पीड़ित परिवारों को सिर्फ मुआवजे के चेक देने के अलावा और भी बहुत कुछ कर सकती है। वह पीड़ित परिवारों को नौकरी भी दे सकती है। सूत्र ने आगे कहा कि सरकार विरोध प्रदर्शनों में शामिल “असामाजिक तत्वों” के खिलाफ तभी एक्शन लेगी, जब वह मौजूदा कानून-व्यवस्था की स्थिति और अपने फैसलों के संभावित नतीजों का आकलन कर लेगी।
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कॉकरोच जनता पार्टी के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस रैंक के एक अधिकारी के ऑर्डर पर रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के एक जवान ने एंटी-रॉयट गन (ARG) का इस्तेमाल किया था। RAF के जवान ने ARG से दो बार फायरिंग की थी। पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें।
