Indus Water Treaty News: सिंधु जल संधि के निलंबित होने से जम्मू-कश्मीर में हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट्स का निर्माण तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में, इस केंद्र शासित प्रदेश में मौजूदा साल के आखिर तक हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर की कुल क्षमता में कम से कम 46% की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है।
जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा विधानसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में दिए गए सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस केंद्र शासित प्रदेश की कुल हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर क्षमता अभी 3540.15 मेगावाट है। दिसंबर 2026 तक इसके बढ़कर 5164.15 मेगावाट हो जाने की उम्मीद है। उस समय दो हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट्स 1000 मेगावाट का पाकलदुल और 624 MW का किरू चालू हो जाएंगे। सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि इन दोनों प्रोजेक्ट्स पर 78% काम पूरा हो चुका है।
जून के आखिर का काम पूरा होने की उम्मीद
12 मेगावाट के करनाह हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर भी जून के आखिर तक काम पूरा होने की उम्मीद है। सरकार के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर की अनुमानित क्षमता लगभग 18000 मेगावाट है, जिसमें से लगभग 15000 मेगावाट की पहचान की जा चुकी है। आंकड़ों के अनुसार, इसमें से अब तक 3540.15 मेगावाट क्षमता का इस्तेमाल किया जा चुका है।
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क्षमता के इन अनुमानों में 13 प्रोजेक्ट्स शामिल हैं जिनकी कुल क्षमता 1197.4 मेगावाट है। छह केंद्रीय क्षेत्र के प्रोजेक्ट्स हैं जिनकी क्षमता 2250 मेगावाट है और 12 निजी क्षेत्र के प्रोजेक्ट्स हैं जिनकी कुल क्षमता 92.75 मेगवाट है। सरकार ने बताया कि सिंधु जल संधि के अब निलंबित होने के कारण, चल रहे प्रोजेक्ट्स का निर्माण कार्य तेज हो गया है।
सरकार के जवाब में क्या कहा गया?
सरकार के जवाब में कहा गया, “इसके अलावा, बाकी बची हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर क्षमता का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करने के लिए संभावित स्टोरेज प्रोजेक्ट्स की पहचान करने के प्रयास भी चल रहे हैं। यह केंद्र शासित प्रदेश 2035 तक अपनी हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर क्षमता को तीन गुना करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।” इसमें यह भी जोड़ा गया कि अगले दस सालों के लिए एक रोडमैप तैयार कर लिया गया है और उसे लागू किया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि आईपीपी (प्राइवेट) सेक्टर में अतिरिक्त 100–150 मेगावाट की उम्मीद है और यह भी बताया गया कि यूटी की कुल स्थापित पनबिजली क्षमता 2035 तक लगभग 11,000 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है।
जवाब में कहा गया, “इस बीच, जम्मू-कश्मीर हाईडल पॉलिसी 2025 का ड्राफ्ट अतीत के अनुभवों और पिछली नीतियों के परिणामों के आधार पर तैयार किया गया है।” इसमें यह भी जोड़ा गया कि पड़ोसी राज्यों की बेहतरीन कार्यप्रणालियों को भी इसमें शामिल किया गया है। इस ड्राफ्ट को सुझावों के लिए सार्वजनिक डोमेन में रखा गया है।
