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केंद्र का कदम: फिल्म निर्माताओं ने निराशा जताई, देखना है ओटीटी पर पहरा कितना होगा गहरा

ओटीटी प्लेटफार्म पर किसी भी तरह की पाबंदी ना होने से यहां पर इसके निर्माताओं को कुछ भी कहने की आजादी थी। लेकिन इस चक्कर मे बहुत कुछ ऐसा दिखाया और परोसा जा रहा था जो सेंसर बोर्ड जैसे मानकों पर प्रतिबंधित होता।

OTT platform, webseriesओटीटी प्लेटफार्म पर बढ़ती हिंसा और अश्लीलता की सामग्री पर सरकार की नजर तिरछी हो गई है।

आरती सक्सेना
सिनेमा पर सेंसर बोर्ड की लगाम थी लेकिन ओटीटी प्लेटफार्म स्वच्छंद और उस पर सिनेमा में नए प्रयोग के नाम पर खूब हिंसा, गाली गलौज, फूहड़फन और खुलापन परोसा जा रहा था लेकिन अब केंद्र सरकार ने इस सबको नियंत्रण में लाने के लिए हाल में नए दिशानिर्देश जारी किए हैं। हालांकि इस पर ओटीटी प्लेटफार्म के लिए फिल्म बनाने वाली कंपनियों ने निराशा जताई है, वहीं इस तरह के नियंत्रण स्थापित करने के लिए दबाव बनाने वालों ने इसे सही दिशा में उठाया हुआ कदम बताया है।

केंद्र सरकार ने अब एक अहम फैसला लिया है। इसके तहत केंद्र सरकार ने आनलाइन पोर्टल के साथ ओटीटी प्लेटफार्म केंद्रीय सूचना प्रसारण के अधीन आएगा। इसके लिए एक नोडल अधिकारी की भी व्यवस्था की गई है। अब ओटीटी प्लेटफार्म पर दिखाई जाने वाली सभी सामग्री को पहले सूचना प्रसारण मंत्रालय की निगाहों से गुजरना पड़ेगा।

सरकार ने यह सख्ती आम लोगों की मांग पर की है क्योंकि लोकप्रिय हो चुके ओटीटी प्लेटफार्म पर दिखाई जा रही वेब सीरीज और फिल्मों में इतनी ज्यादा हिंसा परोसी जा रही थी कि उसका बुरा असर बच्चों और युवा पीढ़ी पर हो रहा था। और इन फिल्मों में कुछ समुदायों को भी बुरा प्रस्तुत किया गया था। इसी के चलते केद्र सरकार ने ओटीटी प्लेटफार्म पर सख्ती करने की तैयारी की है।

गौरतलब है ओटीटी प्लेटफार्म पर किसी भी तरह की पाबंदी ना होने से यहां पर इसके निर्माताओं को कुछ भी कहने की आजादी थी। लेकिन इस चक्कर मे बहुत कुछ ऐसा दिखाया और परोसा जा रहा था जो सेंसर बोर्ड जैसे मानकों पर प्रतिबंधित होता।

वास्तविकता के नाम पर कई वेब सीरिज में खून खराबा और गालीगलौज और हिंसा को दिखाने मे निर्माताओं ने हद ही पार कर दी थी। पहले ओटीटी प्लेटफार्म की पहुंच सीमित लोगों तक ही थी लेकिन कोरोना काल की पूर्णबंदी के कारण थियेटर बंद होने से बड़ी संख्या में लोग इंटरनेट के जरिए जुड़े और इस तरह की सामग्री देखने लगे। ओटीटी पर दर्शकों की संख्या बढ़ती देख और वेब सीरीज व फिल्में दिखाई जाने लगीं। जब ज्यादा लोग जुड़े तो उस पर आपत्तियां पर भी ज्यादा आने लगीं।अब और ज्यादा आपत्ति होनी शुरू हो गई है ।

विवादित फिल्में और वेब सीरीज
ओटीटी प्लेटफार्म पर कई विवादित फिल्मों और वेब सीरीज को दर्शकों ने नापसंद किया और इस पर कई लोगों ने केस करके आपत्ति जताई। इन फिल्मों में अक्षय कुमार की लक्ष्मी बम भी है। इसमें लक्ष्मी नाम के कारण धार्मिक भावना को ठेस पहुंचने की बात कही गई। लिहाजा फिल्म का नाम बदल कर सिर्फ लक्ष्मी रखा गया।

एकता कपूर की वैसे तो ज्यादातर वेब सीरीज खुले तौर पर समाज का एक आईना होती हैं जिससे कई लोग अवगत नही हैं लेकिन उनकी हालिया वेब सीरीज ट्रिपल एक्स 2 पर लोगों ने काफी एतराज जताया। क्योंकि इसमें उन्होंने देशभक्ति की भावना को ठेस पहुचाने वाले दृश्य पेश किए थे। हालांकि एकता ने बाद मे ऐसे दृश्य हटा दिए। प्रकाश झा की अति लोकप्रिय वेब सीरीज आश्रम धर्म के नाम पर अंधविश्वास फैलाने वालों पर प्रहार है। लेकिन इस पर भी कई लोगों ने आपति जताई है।

मिर्जापुर वेब सीरिज भी काफी लोकप्रिय रही, जिसके कारण मिर्जापुर 2 भी प्रस्तुत की गई। इस वेब सीरिज पर के राजनीतिकों समेत कई लोगों ने एतराज जताया और कहा कि मिर्जापुर की छवि ऐसी नहीं है जैसी कि इस फिल्म में दिखाई गई है।
अनुष्का शर्मा निर्मित पाताल लोक क्राइम थ्रिलर है इसमें खूब हिंसा परोसी गई है। इसके निर्माताओं को भी कानूनी नोटिस भेजा गया है। इसी तरह एक शो है जो विवाद में आया। इसमें एक छोटे शहर का कामेडियन, जो सीरियल किलर भी है, काफी चर्चा में रहा। यह शो डार्क कामेडी पर आधारित है इसका नाम हंसमुख है। इसके अलावा हंसल मेहता का स्केयर्ड गेम भी काफी विवादित रहा है।

इनके अलावा द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर, ठाकरे, इंदू सरकार, फिराक आदि कई वेब सीरीज और फिल्में विवादों से भरपूर रही हैं। केद्र सरकार के इस फैसले पर निर्माता हंसल मेहता ने कहा कि यह अभिव्यक्ति की आजादी पर आघात है। रीमा कागदी ने भी इसे निराशाजनक बताया है। उनके अनुसार यह कानून अगर हमारे हक में होता तो अच्छा रहता। हंसल मेहता और रीमा कागदी की तरह बाकी निर्माता भी इस निर्णय से खुश नहीं है लेकिन उन्होंने अपनी राय सार्वजनिक नहीं की है।

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